डोनाल्ड ट्रंप की पेशकश, भारत-चीन सीमा विवाद पर मध्यस्थता के लिए तैयार

भारत और चीन के बीच सीमा मामले पर जारी गतिरोध के बीच अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश की है.

अमरीकी राष्ट्रपति ने ट्वीट किया है, "हमने भारत और चीन दोनों को सूचित कर दिया है कि उनके सीमा विवाद पर अमरीका मध्यस्थता करने को इच्छुक और समर्थ है."

वहीं, समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ बुधवार को चीन ने कहा था कि भारत के साथ सीमा पर स्थिति 'पूरी तरह स्थिर और नियंत्रणीय' है.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि दोनों देशों के पास बातचीत और परामर्श के ज़रिए मुद्दे सुलझाने का उचित तंत्र और संचार चैनल मौजूद है.

लिजियान ने कहा, "हम अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा और सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं. अब चीन-भारत सीमा पर स्थिति पूरी तरह स्थिर और नियंत्रणीय है. हम पूरी तरह बातचीत और परामर्श के ज़रिए मुद्दे सुलझाने में समर्थ हैं."

चीनी मीडिया ने विवाद पर क्या लिखा

भारत और चीन के बीच सीमा गतिरोध को लेकर तनाव की ख़बरें चीन की मीडिया में छायी हुई हैं.

चीनी मीडिया में जो ख़बरें आ रही हैं उनके मुताबिक़, भारत ने पिछले कुछ दिनों में लद्दाख में विवादास्पद गैलवान घाटी क्षेत्र में सीमा पार "अवैध रूप से रक्षा सुविधाओं" का निर्माण किया है.

इससे पूर्व चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने भारत से अपील की थी कि वे किसी भी तरह की एकतरफ़ा कार्रवाई से बचें क्योंकि ऐसे में परिस्थितियां और जटिल हो सकती हैं."

देश के मुखपत्र पीपल्स डेली के मुताबिक़, 21 मई को एक नियमित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा था,"चीन और भारत इस मुद्दे पर राजनयिक चैनलों के माध्यम से इस पर चर्चा कर रहे हैं."

दोनों पड़ोसी देशों के बीच यह गतिरोध ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और नेपाल के बीच भी क्षेत्रीय विवाद जारी है. हालांकि कुछ भारतीय मीडिया आउटलेट्स इसे अन्य गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के तरीक़े के रूप में देख रहे हैं.

दिल्ली का एक सोचा-समझा क़दम

ग्लोबल टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच शुरू हुआ सीमा विवाद किसी 'दुर्घटना का परिणाम नहीं है' बल्कि यह 'नई दिल्ली की एक सोची-समझी योजना' थी.

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, "भारतीय सैनिकों ने भी जानबूझकर अपने चीनी समकक्षों के साथ संघर्ष किया."

रिपोर्ट में लिखा गया है कि अगर भारत इस तरह के उकसावे भरे क़दम को जल्दी से जल्दी रोकने में असफल रहता है तो निश्चित तौर पर इससे दोनों देशों के राजनयिक संबंध प्रभावित होंगे.

ग्लोबल टाइम्स में छपी रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ भारतीयों ने अनुमान लगाया था कि जिस तरह कोरोना वायरस महामारी के कारण चीन की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ गई है जिस तरह पश्चिमी देश लगातार चीन पर महामारी को लेकर पारदर्शी रवैया नहीं रखने को लेकर आरोप लगा रहे हैं उससे उन्हें एक 'बड़ा अवसर' मिलेगा और सीमा विवाद भी 'उनके हित में जाएगा.'

चीन की नीतियों को दोषी ठहराया

सीमा पर चल रहे तनाव के बीच भारतीय समाचार पत्रों ने अपनी कवरेज में ख़ासतौर पर इस बात पर ज़ोर दिया है कि भारत को चीन के दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए.

यह चर्चा विवादित क्षेत्रों पर दोनों ओर की सेनाओं के बीच झड़प के साथ शुरू हुई. जिसमें कई सैनिक घायल भी हुए और कुछ को ऐसी गंभीर चोटें आयीं कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की ज़रूरत भी पड़ गई.

भारत के कई प्रमुख हिंदी अख़बारों ने अपने यहां ख़बर प्रकाशित की है कि सीमा रेखा पर चीन की आक्रामकता भारत पर दबाव बनाने का एक तरीक़ा मालूम होती है.

वहीं एक अन्य अख़बार ने लिखा है कि इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सीमा-विवाद नया नहीं है.

अख़बार लिखता है, "चीन की साम्राज्यवादी नीतियां किसी से छिपी नहीं हैं. यह भारत पर दबाव बनाने के इरादे से हर बार इसकी सीमा से लगे देशों को भड़काने की कोशिश करता रहा है."

25 मई के अंक में टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार ने लिखा था, "नई दिल्ली को चीनी दबाव के आगे मज़बूती से खड़ा होना चाहिए."

इसके अलावा इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने अपने एक अंक में लिखा था, "चीन के लिए अपनी स्थिति पर नए सिरे से विचार करना उचित होगा."

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