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बिन्यामिन नेतन्याहू पर ट्रायल शुरू, क्या प्रधानमंत्री बने रह पाएंगे?
70 साल के बिन्यामिन नेतन्याहू देश के इतिहास में पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो पद पर रहते हुए ट्रायल का सामना कर रहे हैं. हालांकि, वह खुद पर लगे रिश्वत, फ्रॉड और भरोसा तोड़ने के आरोपों को खारिज करते हैं
सुनवाई के लिए अदालत पहुंचे नेतन्याहू ने कहा कि इन मामलों का मकसद "किसी भी मुमकिन तरीके से उन्हें नीचे गिराना है."
एक हफ्ते पहले ही उन्होंने एक तकरीबन नामुमकिन दिखने वाली यूनिटी गवर्नमेंट के मुखिया के तौर पर शपथ ली थी.
उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज ने एक साल में तीन बार बेनतीजा रहे चुनावों के बाद उनके साथ सत्ता की कुर्सी साझा करने का समझौता कर लिया था.
मुकदमे लड़ने के दौरान पद से इस्तीफा देने की विरोधियों की मांग को नेतन्याहू खारिज कर चुके हैं.
दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेतन्याहू इसराइल के सबसे ज्यादा वक्त तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं. वह 2009 से लगातार सत्ता में बने हुए हैं. इससे पहले वह 1996-1999 के दौरान भी पीएम रह चुके हैं.
कोर्ट में क्या हुआ?
रविवार को येरूशलम जिला कोर्ट में पहुंचने के बाद नेतन्याहू ने रिपोर्टरों से कहा, "मैं अपना सिर ऊंचा कर यहां आया हूं."
उन्होंने कहा, "जब आप, दक्षिणपंथ के एक मजबूत प्रधानमंत्री को गिराना चाहते हैं तो हर चीज जायज हो जाती है."
करीब एक घंटे चली सुनवाई की शुरूआत में नेतन्याहू ने जजों को बताया, "मैंने आरोपों को पढ़ा है और मैं इन्हें समझता हूं."
स्थानीय मीडिया के मुताबिक़, फेस मास्क लगाए नेतन्याहू ने सुनवाई के दौरान बचाव बेंच पर बैठने से इनकार कर दिया. वो तब तक खड़े रहे जब तक कि रिपोर्टर्स कमरे से बाहर नहीं निकल गए.
उनके वकीलों का कहना है कि उन्हें बचाव की दलीलें तैयार करने में कई महीनों का वक्त लगेगा. सुनवाई की अगली तारीख 19 जुलाई तय हुई है.
बिन्यामिन नेतन्याहू पर क्या आरोप हैं?
नेतन्याहू पर तीन मामलों में आरोप लगाए गए हैं. इन मतीन मामलों को 1,000, 2,000 और 4,000 कहा जाता है.
केस 1,000 - फ्रॉड और भरोसा तोड़ना : उन पर खासतौर पर सिगार और शैंपेन की बोतलों जैसे उपहार लेने का आरोप लगा है. आरोप है कि ताकतवर कारोबारियों ने अपने पक्ष में काम करने के बदले उन्हें ये उपहार दिए थे.
केस 2,000 - फ्रॉड और भरोसा तोड़ना : नेतन्याहू पर सकारात्मक कवरेज के बदले में इसराइली न्यूज़पेपर येडियट अहरोनोट के सर्कुलेशन में सुधार लाने में मदद की पेशकश करने का आरोप है.
केस 4,000 - रिश्वत, फ्रॉड और भरोसा तोड़ना : इस कथित मामले के वक्त बतौर पीएम और संचार मंत्री रहे नेतन्याहू पर आरोप है कि उन्होंने टेलीकॉम कंपनी बेज़ेक में कंट्रोलिंग स्टेक रखने वाले कारोबारी शाउल एलोविच (Shaul Elovitch) के पक्ष में रेगुलेटरी फैसले लिए. इसके बदले में एलोविच की वाला न्यूज़ साइट पर नेतन्याहू को पॉजिटिव कवरेज दिया गया.
नेतन्याहू ने अपने ख़िलाफ़ लगे सभी आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने इन्हें राजनीतिक विरोधियों की बदले की कार्रवाई करार दिया है. साथ ही उन्होंने अपने पाक-साफ निकलने की हुंकार भी भरी है.
प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए ट्रायल का सामना कैसे किया जा सकता है?
इसराइली कानूनों के मुताबिक, किसी अपराध के आरोपी किसी नेता के लिए इस्तीफा देना जरूरी नहीं है. लेकिन, इस तरह का वाकया पहले कभी सामने भी नहीं आया है.
पूर्व प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने 2008 में भ्रष्टाचार की जांच की जद में आते ही पार्टी लीडर के तौर पर इस्तीफा दे दिया था. लेकिन, वह अगले साल हुए चुनावों तक तकनीकी तौर पर प्रधानमंत्री बने रहे थे. इन चुनावों में बिन्यामिन नेतन्याहू जीतकर सत्ता में आ गए थे.
बेनी गैंट्ज के साथ मिलकर सरकार चलाने के समझौते के तहत "वैकल्पिक प्रधानमंत्री" का एक नया पद तैयार किया गया है. इसका मतलब है कि 18 महीने बाद जब दोनों लोग कुर्सियां बदलेंगे तो नेतन्याहू उस वक्त भी गैंट्ज के डिप्टी के तौर पर प्रधानमंत्री के दफ्तर में बने रहेंगे.
इस ट्रायल के देश के लिए क्या मायने हैं?
संक्षेप में, इस मामले में एक प्रधानमंत्री देश के सर्वोच्च पद पर बने रहते हुए खुद को पाक-साफ साबित करने और जेल जाने से बचने का संघर्ष करता दिखेगा.
विपक्षी नेता याइर लापिड ने इसे एक "शर्मिंदगी" और "देश के जज्बे के लिए डरावना" बताया है, हालांकि इससे सरकार की नीतियों पर बुरा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है.
आने वाले महीनों में नेतन्याहू के यदूदी बस्तियों और कब्जे वाले वेस्ट बैंक के इलाके जॉर्डन घाटी के विलय की योजनाओं पर आगे बढ़ने की उम्मीद है. यह एक ऐसा कदम है जिसे निश्चित तौर पर फ़लस्तीन के लोगों के बड़े गुस्से का सामना करना पड़ेगा.
नेतन्याहू को प्रधानमंत्री के पद पर बने रहना चाहिए या नहीं, इस सवाल पर इसराइल के लोग बंटे हुए हैं.
उनके आलोचकों का कहना है कि मुकदमे के शुरू होने से नेतन्याहू का कुर्सी पर बने रहना नामुमकिन हो गया है.
लेकिन, उनके समर्थकों का कहना है कि वह लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए हैं और उन्हें जबर्दस्ती पद से हटाया नहीं जा सकता है.
यहां तक कि दोषी करार दिए जाने पर भी नेतन्याहू के लिए तब तक इस्तीफा देने की कोई मजबूरी नहीं होगी जब तक कि उनके सभी कानूनी विकल्प खत्म नहीं हो जाते. इन मुकदमों को पूरा होने में महीनों और यहां तक कि सालों का वक्त लग सकता है.
पूर्व प्रधानमंत्रई एहुद ओल्मर्ट की अगर बात की जाए तो उनका ट्रायल 2009 में शुरू हुआ था और लंबी चली कानूनी प्रक्रिया में दोषी करार दिए जाने के बाद भी उनकी सजा 2016 में जाकर ही शुरू हो पाई.
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