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ट्रंप और ओबामा में किस बात पर छिड़ी है जंग
- Author, एंथनी जर्चर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नॉर्थ अमरीका
अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सुरक्षा सलाहकार के ख़िलाफ़ सभी आरोप रद्द करने के फ़ैसले के बाद अमरीका की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला शुरू हो गया है.
और इस बहस के केंद्र में देश के मौजूदा और पूर्व राष्ट्रपति हैं.
हालांकि पूर्व सुरक्षा सलाहकार माइकल फ़्लिन पर आरोप हटाने का फ़ैसला न्याय विभाग ने किया है.
राष्ट्रपति पद पर ट्रंप के कार्यकाल के शुरुआती दौर में माइकल फ़्लिन को इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया गया था.
माइकल फ़्लिन पर ये आरोप था कि उन्होंने रूस के सरकारी अधिकारियों से अपने रिश्तों के बारे में उपराष्ट्रपति माइक पेंस से झूठ बोला था.
रूस और ट्रंप के चुनाव अभियान के बीच रिश्तों की जाँच कर रहे फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (एफ़बीआई) के अधिकारियों के सामने भी माइकल फ़्लिन ने झूठ बोलने की बात स्वीकार कर ली थी.
सालों चली क़ानूनी रस्साकशी के बाद आख़िरकार पूर्व थ्री स्टार जनरल माइकल फ़्लिन अब आरोपों से मुक्त हैं.
ट्रंप और ओबामा क्या कह रहे हैं?
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा आम तौर पर डोनाल्ड ट्रंप पर टिप्पणी करने को लेकर बचते रहे हैं लेकिन बीते शुक्रवार को अपने पूर्व सहयोगियों और अधिकारियों से बातचीत में उन्होंने ट्रंप के कामकाज पर काफ़ी तल्ख़ टिप्पणी की.
उन्होंने कहा, "ऐसा कोई उदाहरण नहीं खोजा जा सकता कि किसी व्यक्ति पर शपथ लेकर झूठ बोलने का आरोप लगे और उसे यूं ही छोड़ दिया जाए. ये वो बात है जो आपको परेशान करती है. ये केवल निर्धारित प्रक्रियाओं और नियम-क़ायदों की बात नहीं है बल्कि क़ानून के शासन को लेकर हमारी बुनियादी समझ पर ख़तरा है."
हालांकि अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों पर इल्ज़ाम लगाने में ट्रंप कभी भी हिचके नहीं हैं. रविवार को उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ओबामा पर आरोप लगाते हुए इस बारे में कई ट्वीट्स और रीट्वीट्स किए.
ट्रंप का आरोप है कि ओबामा और उनके सहयोगी उनके प्रशासन की अहमियत कम करने की साज़िश में शामिल हैं.
ट्रंप ने दक्षिणपंथी विश्लेषकों के दावों को दोहराया और ओबामा, एफ़बीआई के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर एंड्रयू मैकेब, पूर्व डिप्टी अटॉर्नी जनरल रॉड रॉज़ेनस्टीन, टेलीविज़न प्रेजेंटर जिमी किमेल, कई मीडिया संस्थानों और रिपोर्टरों पर जमकर भड़ास निकाली.
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक टॉक-रेडियो शो के प्रेज़ेंटर के ट्वीट को रीट्वीट किया, "अमरीका के इतिहास में अभी तक का सबसे बड़ा राजनीतिक अपराध."
इस प्रेज़ेंटर ने ओबामा प्रशासन से जुड़े लोगों पर ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले उन्हें नुक़सान पहुंचाने का आरोप लगाया था.
विवाद क्यों शुरू हुआ?
राष्ट्रपति ने कई बार ''ओबामागेट'' शब्द का इस्तेमाल किया. यह निक्सन-युग के वाटरगेट स्कैंडल से मिलता जुलता है. उनके आरोपों और जाने माने कंज़र्वेटिव एक्टिविस्ट और ट्रंप से जुड़े दूसरे समर्थक गुटों ने तुरंत ये हैशटैग इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.
रविवार को इस हैशटैग से 20 लाख ट्वीट हुए. यह राष्ट्रपति ट्रंप की सोशल मीडिया पर ताक़त का एक और उदाहरण है.
पहले इस हैशटैग का इस्तेमाल कुछ कट्टर दक्षिणपंथी समूहों पर कुछ देर के लिए ही रहा ख़ासकर MAGA और QAnon यूज़र्स के बीच. लेकिन इससे इतर कभी नहीं जा पाया.
इस पर बड़ा उछाल अमरीका में रविवार को दिखा और 86 फ़ीसदी इस्तेमाल रीट्वीट्स में था. इससे ऐसा अहसास होता है कि शायद काफ़ी हद तक सामंजस्य बनाकर ये काम किया गया है. हालांकि इसमें किसी तरह के तकनीकी डिवाइस के इस्तेमाल के सबूत नहीं मिले.
आरोप क्यों हटाए गए?
फ़्लिन के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों को हटाने का निर्णय अमरीकी सरकार के एक वकील ने किया था, जिन्हें अटॉर्नी जनरल बिल बार ने अभियोजन की समीक्षा के लिए नियुक्त किया था.
बिल कहते हैं, ''क्योंकि फ़्लिन और उनके रूसी संपर्कों को लेकर एफ़बीआई की जाँच में कोई आधार नहीं मिले.'' फ़्लिन को इस बारे में झूठ बोलने के लिए अभियुक्त नहीं बनाया जा सकता.
फ़्लिन को एफ़बीआई की काउंटर इंटेलिजेंस इंक्वायरी में शामिल किया गया था जो मार्च 2016 में चली लेकिन वो एजेंसी के प्रयासों के मुख्य फोकस में तब आए उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इस बात से इनकार किया कि उन्होंने ट्रंप के चुनाव के बाद रूसी एंबेसडर सर्गेय किसलायक से अमरीकी प्रतिबंधों के बारे में चर्चा की है.
एफ़बीआई ने फ़्लिन की बातचीत की रिकॉर्डिंग इस्तेमाल की जिससे उनकी बातें विपरीत साबित हुईं.
फ़्लिन नए प्रशासन का हिस्सा भी नहीं थे जब वो प्रतिबंधों में नरमी बरतने को लेकर चर्चा कर रहे थे. आरोपों हटाने पर कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की ओर से काफ़ी आलोचना भी हुई.
उन्होंने लिखा, ''विभाग के मौजूदा नेतृत्व ने राष्ट्रपति के सहयोगियों को बचाने और उनके असली और काल्पनिक दुश्मनों को सज़ा देने के लिए काफ़ी असाधारण क़दम उठाए. हमारे विचार में ये मामले न्याय विभाग में निष्पक्ष न्याय के व्यवस्थित रूप से टूटने के गवाह हैं और एकजुट भ्रष्टाचार न भी हो तो राजनीतिक पूर्वाग्रह कूी तरफ इशारा करते हैं.''
ओबामा के ख़िलाफ़ ट्रंप के आरोपों का आधार है?
राष्ट्रपति ने हमेशा से अमरीका चुनाव में रूस के दख़ल को लेकर की जा रही जाँच को हमेशा अपने शासन की वैधता के लिए चुनौती के तौर पर देखा है.
एफ़बीआई और रूस की जाँच टीम के कुछ सदस्यों ने बतौर राष्ट्रपति उम्मीदवार ट्रंप की आलोचना की थी, जैसे ही इस बात के सबूत सामने आए उन्होंने ख़ुद को मान्य समझ लिया.
इन विचारों को बाद में पूर्व एफ़बीआई डायरेक्टर जेम्स कॉमी, पूर्व राष्ट्रीय ख़ुफ़िया निदेशक जेम्स क्लैपर से जोड़ा गया और अब ख़ुद उनकी नीतियों और राष्ट्रपति पद के दौर की आलोचना की है.
2016 के आख़िर के महीनों में अमरीकी सरकार को रूसी राष्ट्रपति की ख़ुफ़िया एजेंसियों से 2016 के राष्ट्रपति चुनाव को बाधित करने के संबंध में सख़्त चेतावनी मिल रही थी. ये बात रॉबर्ट मुलर की स्पेशल काउंसेल इनवेस्टिगेशन में सामने आई.
उन्होंने ट्रंप के प्रचार अभियान के सदस्यों और रूसी नागरिकों के बीच संपर्क की परतें भी खोलीं. इन संपर्कों और गतिविधियों की जाँच के लिए एफ़बीआई काउंटर-इंटेलिजेंस जाँच शुरू की गई थी.
ख़ुफ़िया विभाग में ओबामा प्रशासन के दौर के अधिकारियों, एफ़बीआई और व्हाइट हाउस ने इन साक्ष्य के आधार पर जो कार्रवाई की, उसे पूरी तरह से उचित बताया.
ट्रंप और उनके समर्थक जो ग़लत बातें करते हैं, अपना ग़ुस्सा दिखाकर, दबाव डालकर उन्हें छुपाने की कोशिश करते हैं.
फ़्लिन के बारे में पता चलने पर ट्रंप ने गुरुवार को अपने ओवल ऑफिस में कहा, ''मुझे बिल्कुल हैरानी नहीं होगी अगर आप आने वाले कुछ हफ्तों में बहुत सी चीज़ें होते हुए देख सकते हैं.'' फ़्लिन को लेकर जारी इस लड़ाई में बहस और तीखी हो सकती है.
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