कोरोना वायरसः चीन पर दुविधा और सुविधा की राजनीति में फंसे हुए हैं ट्रंप

ट्रंप और शी जिनपिंग

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    • Author, बारबरा प्लेट अशर
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

अमरीका और चीन के बीच की पुरानी रंज़िशें कोविड-19 की महामारी और आने वाले अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों की वजह से एक बार फिर परवान चढ़ती हुई दिख रही हैं.

इस हफ़्ते दोनों देशों की जुबानी जंग फिर इंतेहा पर पहुंच गई. आख़िर चीन पर अमरीका जिस तरह से तल्खी दिखा रहा है, इसके पीछे उसकी रणनीति क्या है, उसे क्या हासिल होगा?

दोबारा राष्ट्रपति बनने की अपनी मुहिम में इस हफ़्ते तो राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक तरह से खेल ही बदल दिया.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स से उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति चुनावों में मुझे हराने के लिए चीन कुछ भी कर गुजरेगा."

ऐसा लग रहा है कि चीन के ख़िलाफ़ ट्रंप के हल्ला बोल के साथ ही अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के एक नए चरण में दाखिल हो गया है और राष्ट्रपति ट्रंप कोविड-19 की महामारी के इर्द-गिर्द घूम रहे इलेक्शन कैम्पेन का एजेंडा अब बदलने की कोशिश कर रहे हैं.

रिपब्लिकन पार्टी की रणनीति

इससे संकेत मिलते हैं कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच उतार-चढ़ाव भरे रिश्तों को और मुश्किल हालात का सामना कर पड़ सकता है.

राष्ट्रपति ट्रंप की योजना अमरीका की फलती-फूलती अर्थव्यवस्था को अपने इलेक्शन कैम्पेन में प्रमुखता से जनता के सामने रखने की थी लेकिन वो धराशायी हो गई.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन पर चीन की तरफ़दारी करने के आरोप लगाए हैं

चुनाव सर्वेक्षण ये बता रहे हैं कि प्रमुख राज्यों में राष्ट्रपति ट्रंप के लिए समर्थन घटा है. कोरोना संकट से निपटने में उनके प्रदर्शन की आलोचना हो रही है.

इन सब के बीच चीन, जहां से महामारी की शुरुआत हुई थी, पर ये आरोप लग रहे हैं कि उसने इसे दुनिया भर में फैलने से रोकने के लिए बेहद सुस्ती से क़दम उठाये.

दरअसल, ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की रणनीति पूर्व उपराष्ट्रपति जोए बाइडन को निशाना बनाने की है.

इस साल होने वाले अमरीकी चुनाव में जोए बाइडन का डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ़ से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनना तय माना जा रहा है.

चुनावी एजेंडे में चीन का मुद्दा

ट्रंप के सहयोगी संगठन 'अमरीका फर्स्ट एक्शन' ने 'बीजिंग बाइडन' टाइटल से विज्ञापन जारी कर उन पर चीन को शह देने का इल्ज़ाम लगाया गया है. दूसरे खेमे ने भी पलटवार किया है.

चीन के शेनयांग में लगा एक बिलबोर्ड

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इमेज कैप्शन, चीन के शेनयांग में लगा एक बिलबोर्ड

जोए बाइडन की तरफ़ से ये आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने महामारी से निपटने में पहले सुस्ती दिखाई फिर अपनी नाकामी का दोष दूसरे पर मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.

बाइडन की कैम्पेन टीम का ये भी कहना है कि ट्रंप प्रशासन ने कोरोना वायरस के बारे में चीन की शुरुआती जानकार पर ज़रूरत से ज़्यादा ही भरोसा किया.

वो चाहे डेमोक्रेट्स हों या फिर रिपब्लिकन, चीन को लेकर दोनों का ही सख़्त रवैया है.

दोनों खेमों में एक चीज़ और कॉमन है, वो ये है कि अपने नेता को ऐसे कद्दावर और मज़बूत शख़्सियत के तौर पर पेश करना, जो चीन से सख़्ती से निपट सकने में सक्षम है.

'अमरीका फर्स्ट एक्शन' के केली सैडलर कहते हैं, "अगर आप पिउ पोल और गैलप के सर्वेक्षण देखें तो चीन को लेकर अमरीकियों का अविश्वास ऐतिहासिक रूप से चरम पर है. भले ही वो चाहें रिपब्लिकन समर्थक हों या फिर डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक. ये वो मुद्दा है जिस पर दोनों ही पार्टियों के लोग सहमत हो सकते हैं."

वेबसाइटों का स्क्रीनशॉट
इमेज कैप्शन, वायरस कहां से शुरू हुआ इसे लेकर कई तरह की आशंकाएं मीडिया में ज़ाहिर की जाती रही हैं

चीन पर जानकारी छुपाने का आरोप

इसमें कोई शक नहीं कि सत्ता संभालने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप जब से बीजिंग के साथ ट्रेड वॉर में उलझे हैं, तभी से अमरीका में चीन को लेकर नकारात्मक रुझान नाटकीय तरीक़े से बढ़ा है.

कोरोना संकट को लेकर चीन को कसूरवार ठहराए जाने की जब भी बात होती है, राष्ट्रपति ट्रंप दुविधा और सुविधा की राजनीति के बीच उलझे नज़र आते हैं.

वे कभी मुक्त कंठ से राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तारीफ़ करते सुनाई देते हैं तो कभी 'चाइनीज़ वायरस' के लिए कड़ी फटकार लगाते हुए.

लेकिन अब उनके कैम्पेन ने चीन के प्रति कड़ा रुख़ अपनाना शुरू कर दिया है, चीन से नुक़सान की भरपाई कराने की सौंगध खाई जा रही है.

चीन के ख़िलाफ़ आक्रामक बयानबाज़ी में अब ट्रंप प्रशासन के लोग और कांग्रेस के कई सदस्य शामिल हो गए हैं.

ज़ाहिर है कि चीन की सरकार पर दुनिया में महामारी फैलाने वाले कोरोना वायरस को लेकर जानकारी छुपाने का आरोप लगाया जा रहा है.

माइक पॉम्पियो की भूमिका

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो इस हल्ला बोल में मोर्चे पर सबसे आगे हैं. वो नियमित रूप से ये घोषणा करते रहे हैं कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी पर भरोसा नहीं किया जा सकता है.

कोरोना वायरस की समस्या सामने आने के बाद उसे रोकने में चीन की नाकामी पर माइक पॉम्पियो का ख़ासा ज़ोर है. वे चीन की प्रयोगशालाओं की सुरक्षा का सवाल भी उठाते रहे हैं.

हालांकि चीन ने इन सभी आरोपों का पूरी तरह से ख़ारिज किया है.

पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के प्रशासन में एशिया मामलों के सलाहकार रहे माइकल ग्रीन कहते हैं कि चीन के बर्ताव को लेकर सियासी हलकों में चिंता का माहौल है.

"लेकिन चीन को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टीम के लोगों की राय ये है कि उसका फ़ायदा अमरीका का नुक़सान है. उनका पूरा ध्यान हालात का फ़ायदा उठाने से चीन को रोकने पर केंद्रित है."

बर्लिन की दीवार पर बनी कलाकृति

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इमेज कैप्शन, दुनिया दो सुपरपॉवर देशों की बीच के इस संघर्ष को देख रही है

चीन का प्रोपैगैंडा

माइकल ग्रीन कहते हैं, "राष्ट्रपति शी जिनपिंग की रणनीति भी उनके पूर्ववर्तियों की तुलना में कहीं ज़्यादा आक्रामक है. चीन भी अपना प्रोपेगैंडा चला रहा है जिसमें ये संकेत दिए जा रहे हैं कि कोरोना वायरस फैलाने के पीछे अमरीकी सेना का हाथ हो सकता है."

लेकिन दोनों देशों के राष्ट्रवाद से विवाद बढ़ा है, सहयोग की संभावनाएं कम हुई हैं. दोनों देश मिलकर इस महामारी से लड़ सकते थे. किसी नई महामारी को आने से रोक सकते थे.

माइकल ग्रीन ये ध्यान दिलाते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में आने से अमरीकी संस्था 'सेंटर फ़ॉर डिजीज कंट्रोल' के दो दर्जन से भी ज़्यादा अमरीकी और चीनी वैज्ञानिक बीजिंग में 'इन मुद्दों पर' काम कर रहे थे.

कोरोना संकट शुरू होने के समय इन वैज्ञानिकों की संख्या घटकर तीन या चार रह गई थी. हालांकि माइकल ग्रीन इसके लिए दोनों देशों की सरकारों को दोष देते हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टीम के लोगों को राष्ट्रपति ट्रंप के ही उन क़रीबियों से चुनौती मिल रही है जो ये दलील देते हैं कि कारोबार के लिए अमरीका को चीन की ज़रूरत है.

गरमपंथी और नरमपंथी

चीनी मूल के अमरीकी गैरी लॉक राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर में बीजिंग में अमरीका के राजदूत रहे थे.

वे कहते हैं, "चीन और अमरीका के रिश्ते उबड़-खाबड़ रास्तों पर आगे बढ़ रहे हैं. एक स्तर पर भले ही वे एक दूसरे के विरोधी हों लेकिन आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच सहयोग की ज़रूरत है क्योंकि बहुत से अमरीकी किसान चीन पर इस बात के लिए निर्भर हैं कि वो उनके उत्पाद खरीदता है."

जैसे-जैसे चुनाव क़रीब आ रहे हैं, राष्ट्रपति ट्रंप ने ये संकेत दिए हैं कि वो चीन के प्रति आक्रामक रुख़ रखने वाले लोगों की बातों को ज़्यादा तवज्जो देंगे.

नक्शे पर

दुनिया भर में पुष्ट मामले

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

दोस्ताना सुर में बात करने वाले लोग दरकिनार हो जाएंगे. वैसे ये भी कम दिलचस्प विरोधाभास नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकारों की टीम में दोनों ही तरह के लोग हैं.

राष्ट्रपति को उन कांग्रेस सदस्यों का भी समर्थन मिल रहा है जो ये चाहते हैं कि ट्रंप प्रशासन चीन के ख़िलाफ़ सख़्ती से खड़ा रहे.

चीन पर अमरीका की निर्भरता

डोनल्ड ट्रंप

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कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने तो ऐसे क़ानून का मसौदा या फिर विचार रखे हैं जिनमें सूचना छिपाने या ग़लत जानकारी देने के लिए चीन को सज़ा देने की बात कही गई है.

मिसूरी और मिसिसिप्पी जैसे राज्यों ने तो नुक़सान की भरपाई के लिए चीन पर मुक़दमा चलाने का अभूतपूर्व कदम उठाया है.

और चीन के जबर्दस्त आलोचक रहे रिपब्लिकन पार्टी के नेता टॉम कॉटन ने तो यहां तक कह दिया कि चीन की सरकार ने जानबूझकर कोरोना वायरस को अपनी सरहदों से बाहर निकलने के लिए छोड़ दिया.

टॉम कॉटन ने कहा, "क्योंकि उन लोगों को आर्थिक नुक़सान होने जा रहा था इसलिए वे बाक़ी दुनिया को फलते-फूलते हुए नहीं देख सकते थे."

लेकिन जब उन्होंने अमरीका में आपूर्ति की व्यवस्था दुरुस्त करने की वकालत की, तो लगा कि वे दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर बोल रहे थे.

इस महामारी ने दवाओं और मेडिकल इक्विपमेंट के मामले में चीन पर अमरीका की निर्भरता पर सबका ध्यान आकर्षित कर दिया है.

नस्लीय हिंसा की घटनाएं

चिंता इस बात को लेकर भी जताई जा रही है कि चीन विरोधी शोर-शराबे के माहौल ने अमरीका में नस्लीय हिंसा की ज़मीन तैयार कर दी है.

महामारी के कारण अमरीका में एशियाई मूल के लोगों के ख़िलाफ़ टीका-टिप्पणी और हमले बढ़ गए हैं.

गैरी लॉक कहते हैं, "सिर्फ़ इसलिए कि मैं चीनी मूल का अमरीकी हूं, इसका मतलब ये नहीं कि मैं चीन सरकार का अधिकारी हो गया हूं."

जोए बाइडन के ख़िलाफ़ ट्रंप खेमे की मुहिम में डेमोक्रेट उम्मीदवार का साथ दे रहे गैरी लॉक को निशाना बनाया गया है.

दोनों ही उम्मीदवारों की कैम्पेन टीम ने नस्लीय घृणा फैलाने के आरोपों से इनकार किया है. लेकिन ये भी सच है कि अमरीकी चुनाव चीन विरोध के एजेंडे पर लड़ा जा रहा है.

ऐसे वक़्त में जब मतदाता नाराज़ हैं, उन्हें अपनी रोज़ी-रोटी छिन जाने का डर है. नवबंर तक उनकी नाराज़गी और ग़रीबी दोनों बढ़ जाएगी. तब बैलट बॉक्स से पता चलेगा कि उन्होंने इसके लिए किसे कसूरवार ठहराया.

भारत में कोरोनावायरस के मामले

यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.

राज्य या केंद्र शासित प्रदेश कुल मामले जो स्वस्थ हुए मौतें
महाराष्ट्र 1351153 1049947 35751
आंध्र प्रदेश 681161 612300 5745
तमिलनाडु 586397 530708 9383
कर्नाटक 582458 469750 8641
उत्तराखंड 390875 331270 5652
गोवा 273098 240703 5272
पश्चिम बंगाल 250580 219844 4837
ओडिशा 212609 177585 866
तेलंगाना 189283 158690 1116
बिहार 180032 166188 892
केरल 179923 121264 698
असम 173629 142297 667
हरियाणा 134623 114576 3431
राजस्थान 130971 109472 1456
हिमाचल प्रदेश 125412 108411 1331
मध्य प्रदेश 124166 100012 2242
पंजाब 111375 90345 3284
छत्तीसगढ़ 108458 74537 877
झारखंड 81417 68603 688
उत्तर प्रदेश 47502 36646 580
गुजरात 32396 27072 407
पुडुचेरी 26685 21156 515
जम्मू और कश्मीर 14457 10607 175
चंडीगढ़ 11678 9325 153
मणिपुर 10477 7982 64
लद्दाख 4152 3064 58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह 3803 3582 53
दिल्ली 3015 2836 2
मिज़ोरम 1958 1459 0

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

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