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कोरोना महामारीः रेमडेसिविर दवा को अमरीका ने दी मंज़ूरी
अमरीका ने इबोला के इलाज की दवा रेमडेसिविर को गंभीर तौर पर बीमार कोरोना रोगियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी है.
अमरीका के फ़ूड एंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन के इस फ़ैसले के बाद अस्पतालों में भर्ती कोविड-19 के गंभीर मामलों में इस ऐंटी-वायरल दवा का उपयोग किया जा सकता है.
हाल ही में इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल से पता चला कि इससे गंभीर तौर पर बीमार रोगी जल्दी ठीक हो सकते हैं.
हालाँकि, इससे लोगों के बचने की संभावना बहुत बढ़ जाती हो, ऐसा नहीं देखा गया.
जानकारों ने चेतावनी दी है कि इस दवा को कोरोना वायरस से बचने का रामबाण नहीं समझा जाना चाहिए.
रेमिडेसिविर को गिलीएड नाम की एक कंपनी बनाती है जो अमरीका के कैलिफ़ोर्निया प्रदेश में स्थित है.
ये दवा वायरस के जीनोम पर असर करती है जिससे उसके बढ़ने की क्षमता पर असर पड़ता है.
गिलीएड के चीफ़ एग्ज़ेक्यूटिव डेनियल ओडे ने अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाक़ात के बाद एफ़डीए से मंज़ूरी मिलने को एक महत्वपूर्म पहला क़दम बताया.
उन्होंने कहा कि कंपनी दवा के 15 लाख कंटेनर दान करेगी.
एफ़डीए के कमिश्नर स्टीफ़न हान भी इस मुलाक़ात में मौजूद थे. उन्होंने कहा, "ये कोविड-19 का पहला आधिकारिक इलाज है, हमें इसका हिस्सा बनने पर फ़ख़्र है."
मगर आकस्मिक परिस्थितियों में एफ़डीए से मंज़ूरी मिलना सामान्य मंज़ूरी से अलग है, जिसके लिए उच्च स्तर से समीक्षा करवानी होती है.
रेमडेसिविर के बारे में हमें क्या पता है?
इस दवा से इबोला का इलाज होता हो, ऐसा नहीं है. गिलीएड ने अपनी वेबसाइट पर इस संबंध में लिखा है, " रेमडेसिविर एक प्रयोगात्मक दवा है जिसके सुरक्षित होने, या किसी भी बीमारी के इलाज में कारगर होने की पुष्टि नहीं हुई है."
कंपनी ने साथ ही में इसका साइड इफ़ेक्ट हो सकने की भी चेतावनी दी है.
अमरीकी संस्था नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ़ एलर्जी ऐंड इन्फ़ेक्शस डिज़ीज़ेस (NIAID) ने पाया कि रेमडेसिविर से इबोला के लक्षण बने रहने की अवधि 15 दिन से घटकर 11 दिन हो जाती है.
क्लीनिकल ट्रायल में दुनिया के कई देशों के हॉस्पिटलों में 1,063 लोगों पर परीक्षण किया गया जिनमें अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस, इटली, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं.
कुछ रोगियों को दवाएँ दी गईं जबकि कुछ का प्लैसीबो या वैकल्पिक इलाज किया गया.
NIAID के प्रमुख एंथनी फ़ॉसी ने कहा कि रेमडेसिविर से स्पष्ट देखा गया कि इससे रोगियों में सुधार का समय घट गया है.
हालाँकि, रेमडेसिविर से सुधार में मदद मिल सकती है, और शायद रोगियों को आईसीयू में जाने की ज़रूरत ना पड़े, मगर इस दवा से इस बात का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल सका है कि इससे कोरोना संक्रमण से होनेवाली मौतों को रोका जा सकता है.
कंपनी इस दवा के डोज़ेज़ के बारे में सलाह देती है कि वेंटिलेटर पर जा चुके रोगियों को 10 दिन और वेंटिलेटर पर नहीं जा चुके रोगियों को 5 दिन तक ये दवा दी जा सकती है.
क्या दूसरे देश इसका इस्तेमाल कर सकते हैं?
गिलीएड का कहना है कि अभी इस दवा का भंडार सीमित है.
अमरीकी सरकार अभी अमरीका के उन शहरों के अस्पतालों में इस दवा को बाँटने का प्रबंध करेगी जहाँ कोविड-19 का असर सबसे ज़्यादा हुआ है.
ऐसे में अभी ये स्पष्ट नहीं है कि क्या इसे अमरीका से बाहर भेजा जा सकेगा और उसकी क़ीमत क्या होगी.
गिलीएड का कहना है कि वो रेमडेसिविर के 15 लाख डोज़ दान करेगी जिसका मतलब है कि 140,000 लोगों का मुफ़्त इलाज हो सकता है.
लेकिन दुनिया भर में, 185 देशों में कोरोना वायरस के 30 लाख से ज़्यादा मरीज़ हैं.
गिलीएड का कहना है कि वो अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाना चाहती है.
उसका लक्ष्य है कि अक्तूबर तक 5 लाख लोगों, दिसंबर तक 10 लाख लोगों और ज़रूरत हुई तो 2021 तक लाखों और लोगों के लिए ये दवा तैयार की जा सकेगी.
दवाओं की क़ीमतों पर नज़र रखने वाली अमरीकी संस्था द इंस्टीच्यूट फ़ॉर क्लीनिकल ऐंड इकोनॉमिक रिव्यू का अनुमान है कि रेमडेसिविर के 10 दिन के इलाज की क़ीमत 10 डॉलर यानी लगभग 750 रुपए होनी चाहिए.
भारत में कैसे मिल पाएगी ये दवा?
रेमडेसिविर का ज़िक्र इस सप्ताह गुरुवार को भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस वार्ता में भी हुआ.
मगर दैनिक ब्रीफ़िंग के दौरान संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि इस पर आगे कुछ भी कहने से पहले फ़िलहाल थोड़ा रुकना चाहिए.
उन्होंने कहा, "रेमडेसिविर उन तमाम मेडिकल प्रोटोकॉल में से एक है जिसे दुनियाभर में एक्ज़ामिन किया जा रहा है. कोविड-19 के इलाज के लिए अभी तक कोई तय ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल फ़ॉलो नहीं किया जा रहा है. रेमडेसिविर भी उन स्टडी में से एक है जो हाल में पब्लिश हुई हैं. स्टडी में अब तक ये साबित नहीं हुआ है कि ये दवा 100 फ़ीसदी मददगार है. हालांकि इस मामले में कोई भी क़दम लेने से पहले अभी हम और एविडेंस का इंतज़ार कर रहे हैं."
अगर रेमडेसिविर दवा जाँच में सफल साबित होती है, तो आगे की प्रक्रिया क्या होगी और भारत में ये दवा कैसे पहुंचेगी?
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