You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कोरोना वायरस: आर्थिक के साथ-साथ जलवायु संकट की भी होगी चुनौती
- Author, रॉगर्र हैराबिन
- पदनाम, बीबीसी पर्यावरण विश्लेषक
कोविड-19 से उपजे आर्थिक संकट के हल के साथ ही जलवायु परिवर्तन से लड़ने के तरीकों को जोड़ना भी ज़रूरी है. आने वाले हफ्ते में ब्रिटेन दूसरे देशों की सरकारों से यह कहने वाली है.
क़रीब 30 देशों के पर्यावरण मंत्री दो दिन चलने वाली ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में जुटेंगे. इस कॉन्फ्रेंस में ग्रीन हाउस गैस में कटौती को लेकर चर्चा होनी है.
इस सम्मेलन को पीट्सबर्ग क्लाइमेट डायलॉग नाम दिया गया है. यह सम्मेलन इस बात पर केंद्रित होगा कि कोरोना वायरस महामारी के समाप्त होने के बाद ग्रीन इकॉनोमिक रिकवरी को कैसे व्यवस्थित किया जाए.
इसके साथ ही इस ऑनलाइन सम्मेलन में COP26 के मुद्दे पर भी चर्चा होगी. कोरोना वायरस महामारी के कारण नवंबर महीने में ग्लासगो में होने वाले COP26 को फिलहाल टाल दिया गया है. जिसके लिए अभी कोई आगामी तारीख़ तय नहीं की गई है.
COP26 में कार्बन उत्सर्जन में कटौती को लेकर अंतरराष्ट्रीय समझौते पर चर्चा होनी थी.
ब्रिटेन के क्लाइमेट सेक्रेटरी और COP26 के अध्यक्ष आलोक शर्मा ने बताया, "मैं क्लाइमेट को लेकर किए जा रहे महत्वाकांक्षी प्रयासों के प्रति पूरी तरह से समर्पित हूं ताकि हम पेरिस समझौते को पूरा कर सकें. (धरती के तापमान को 2 डिग्री सेंटीग्रेड से कम रखना)"
उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया को मिलकर काम करने की ज़रूरत है और यह कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए भी है ताकि एक स्वस्थ पर्यावरण के साथ और लचीले तरीक़े से इससे उबर सकें जहां कोई भी पिछड़ा हुआ नहीं हो."
उन्होंने कहा कि पीट्सबर्ग क्लाइमेट डायलॉग में जब हम सभी एक साथ जुटेंगे तो इस बात पर चर्चा करेंगे कि जो सपने हम देख रहे हैं उन्हें हक़ीकत में कैसे अंजाम दिया जाए.
इस अनौपचारिक कॉन्फ्रेंस की मेज़बानी ब्रिटेन और जर्मनी कर रहे हैं.
कई विकसित और विकासशील देश भी इसमें शामिल होंगे. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेश भी इसमें हिस्सा लेंगे. सिविल सोसायटी और उद्योग जगत के भी कुछ लोग इसमें भाग लेंगे. पिछले सप्ताह महासचिव गुटरेश ने कहा था कि जलवायु परिवर्तन कोरोना वायरस से कहीं अधिक गहरी समस्या है.
हालांकि कुछ कैंपेन समूहों ने इस मीटिंग को लेकर संदेह जताया है. कार्बन उत्सर्जन को लेकर जब से पेरिस समझौता है, यह ग़ौर करने वाली बात है कि कार्बन डाईआक्साइड का स्तर बढ़ा ही है- हालांकि यहां इस बात का ज़िक्र करना अहम है कि कोरोना वायरस के कारण दुनिया के अधिकांश देशों में लॉकडाउन है जिसकी वजह से पार्यावरण कुछ साफ़ ज़रूर हुआ है और कई जगहों पर प्रदूषण में कमी आई है.
चैरिटी संस्था केयर ने इस बात को लेकर चेतावनी जारी की है कि कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए विकसित देशों की तरफ़ से विकासशील देशों को जो वित्तीय सहायता दी जानी थी उसमें साल 2018 में कमी आयी है.
चैरिटी संस्था केयर के स्वेन हार्मेलिंग के मुताबिक़, अगर सरकारें अपने आर्थिक प्रोत्साहन और सहायता को जारी रखने में विफल होती है तो जलवायु संकट से पैदा हुई आर्थिक, सामाजिक और इकॉलॉजिक समस्याएं हमारे ग्रह को और बड़े संकट में डाल देगा.
यूरोपीय संघ पहले से ही इसके प्रति काफी गंभीर है. कमीशन के ग्रीन डील चीफ़ फ्रांस टिमरमांस के मुताबिक़, कोविड 19 महामारी के समाप्त होने के बाद एक भी डॉलर जो हम ख़र्च करेंगे वो पर्यावरण और डिजीटल बदलाव से जुड़ा होगा.
उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा, "यूरोपीय ग्रीन डील, विकास की रणनीति और जीत की रणनीति है,"
उन्होंने लिखा, "यह कोई लक्ज़री नहीं है जिसे कोई और आपदा आने पर हम भुला दें. यह यूरोप के भविष्य के लिए ज़रूरी है."
इस बीच चीन अपने मौजूदा विकास के पथ पर ही बढ़ता दिख रहा है और दूसरी ओर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वो जीवाश्म ईंधन से जुड़े फर्म्स की भलाई के लिए आगे बढ़कर काम करेंगे.
यहां तक की यूरोप में भी सभी इस मत के पक्ष में नहीं दिखते.
जर्मनी के सीडीयू पार्टी के मार्कस पाइपर ने फ़ोकस नाम की एक मैगज़ीन को दिए साक्षात्कार में कहा कि स्वच्छ प्रौद्योगिकी में निवेश के लिए यूरोपीय संघ की व्यापक योजना अब संभव नहीं होगी.
उन्होंने कहा, ग्रीन डील किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए एक शीर्ष चुनौती थी. और अब कोरोना महामारी के बाद आर्थिक दृष्टि के मद्देनज़र कहीं से व्यवहारिक नज़र नहीं आती.
लेकिन ब्रिटेन के क्लाइमेट इकोनॉमिस्ट लॉर्ड स्टर्न ने बीबीसी से कहा, मौजूदा समय में प्राथमिकता कोरोना वायरस से निपटना है- लेकिन हमें भविष्य को भी बेहतर बनाने के लिए भी सोचना है.
उन्होंने कहा, टिमरमांस सही हैं और ट्रंप ग़लत. हमें सिर्फ़ उन फ़र्म्स को सहयोग देना चाहिए जो पर्यावरण के संकट से निपटने में मदद करने वाली है.
ऑनलाइन होने वाली यह कॉन्फ्रेंस 28 अप्रैल को होनी है.
- कोरोना महामारी, देश-दुनिया सतर्क
- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क पहनना क्यों ज़रूरी है?
- कोरोना: मास्क और सेनेटाइज़र अचानक कहां चले गए?
- अंडे, चिकन खाने से फैलेगा कोरोना वायरस?
- कोरोना वायरस: बच्चों को कोविड-19 के बारे में कैसे बताएं?
- कोरोना वायरस: संक्रमण के बाद बचने की कितनी संभावना है
- कोरोना वायरस: क्या करेंसी नोट और सिक्कों से भी फैल सकता है?
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)