कोरोना वायरस: अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने WHO का फंड किया बंद

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने अपने प्रशासन को विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO का फंड बंद करने का निर्देश दिया है.

ट्रंप ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने से रोकने में WHO बुनियादी काम करने में भी नाकाम रहा है. ट्रंप ने आरोप लगाया कि जब चीन से कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत हुई तो संयुक्त राष्ट्र का यह संगठन इसे संभालने में नाकाम रहा है और असली तस्वीर छुपाता रहा.

ट्रंप ने कहा कि WHO की जवाबदेही तय की जानी चाहिए. इससे पहले ट्रंप ने WHO को चीन परस्त क़रार दिया था.

अमरीका बुरी तरह से कोरोना वायरस की चपेट में है. अब तक यहां 25 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 592,743 लोग संक्रमित हैं. राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना हो रही है कि उन्होंने देश के भीतर इस महामारी को रोकने में ठीक से काम नहीं किया.

अमरीका WHO को सबसे ज़्यादा फंड देता है. पिछले साल अमरीका ने WHO को 40 करोड़ डॉलर का फंड दिया था. व्हाइट हाउस के रोज़ गार्डेन में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि वो देश में सब कुछ सामान्य करने को लेकर काम कर रहे हैं. ट्रंप ने कहा, ''मैं सभी 50 गवर्नरों से जल्द ही बात करूंगा. सभी राज्यों के सभी गवर्नरों को प्लान पर काम करने की ज़िम्मेदारी दी जाएगी.''

ट्रंप ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकेने में WHO की क्या भूमिका रही, इसकी समीक्षा की जाएगी.

जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की महामारी फैली हुई ऐसे में ट्रंप ने WHO का फंड रोकने का फ़ैसला किया है. इससे पहले ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र को दिए जाने वाले फंड पर भी सवाल उठाए थे और वैश्विक जलवायु समझौते से भी अमरीका को अलग कर लिया था. ट्रंप के निशाने पर वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइज़ेशन भी रहा है.

ट्रंप ने कहा कि अमरीका WHO को हर साल 40 से 50 करोड़ डॉलर देता है जबकि चीन महज़ चार करोड़ डॉलर ही देता है. अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि WHO अगर चीन में जाकर ज़मीन पर हालात देखा होता और वहां की पारदर्शिता के बारे में बताया होता तो अभी जैसी भयावह स्थिति है वैसी कभी नहीं होती.

WHO क्या है और इसे फ़ंड कौन देता है?

  • ग्लोबल पब्लिक हेल्थ के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना साल 1948 में स्विटजरलैंड के जिनेवा शहर में की गई थी. यह संयुक्त राष्ट्र का एक अंग है.
  • WHO में 194 सदस्य देश हैं और इसका उद्देश्य दुनिया को स्वस्थ रखना और ज़रूरतमंदों की मदद करना है.
  • टीकाकरण अभियान चलाना, हेल्थ इमरजेंसी और प्राथमिक इलाज में दुनियाभर के देशों की मदद करना.
  • सदस्य देशों से बतौर फीस फंड मिलता है जो आमदनी, आबादी के अलावा वॉलंटियर के तौर पर योगदान भी होता है.
  • अमरीका ने बीते साल WHO को साल 2018-19 में 40 करोड़ डॉलर दिए थे जो उसके बजट का 15 फ़ीसदी था.
  • चीन ने साल 2018-19 में 8.6 करोड़ डॉलर दिए. अमरीका के बाद WHO को सबसे ज़्यादा फ़ंड ब्रिटेन ने दिया.
  • WHO ने इस साल मार्च में अपील की और कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए 67.5 करोड़ डॉलर की ज़रूरत है. इस बात की भी जानकारी मिली है कि WHO एक अरब डॉलर जुटाने की नई अपील कर सकता है.
  • माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने एक ट्वीट में कहा, ''वैश्विक महामारी के इस मुश्किल दौर में विश्व स्वास्थ्य संगठन की फंडिंग रोकना बेहद डरावना है.''
  • बिल और मेलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन WHO को फंड देने के मामले में दूसरे स्थान पर हैं.

WHO की आलोचना क्यों हो रही है?

ऐसा पहली बार नहीं है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन को किसी महामारी की वजह से आलोचना झेलनी पड़ी हो.

14 जनवरी को संगठन ने ट्वीट किया कि चीन की शुरुआती जांच में इस बात के संकेत नहीं मिले हैं कि कोरोना वायरस इंसानों से इंसानों में फैलता है.

डोनल्ड ट्रंप और अन्य लोगों ने इस ट्वीट के जरिए WHO पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि संगठन आंख मूंदकर चीन की बातों पर भरोसा कर रहा है.

22 जनवरी को एक ट्वीट में WHO ने एक बयान जारी करके कहा कि वुहान में कोरोना वायरस के इंसानों से इंसानों में फैलने के मामले सामने आए हैं.

जनवरी के आखिर में WHO ने इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया.

ट्रंप क्या कह रहे हैं?

दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे अधिक मामले अमरीका में हैं. यहां अब तक संक्रमित लोगों का आंकड़ा छह लाख के पार हो चुका है और 26000 से अधिक की मौत हो चुकी है.

ट्रंप ने आरोप लगाया है कि WHO ने वक़्त रहते इस महामारी की जानकारी दुनिया को नहीं दी. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर WHO ने वक़्त रहते सही कदम उठाए होते तो इस महामारी को वुहान में ही रोका जा सकता था और मौतों का आंकड़ा भी बेहद कम होता.

उन्होंने कहा, ''हज़ारों लोगों की जान बचाई जा सकती थी और दुनियाभर में आर्थिक बदहाली से भी बचा जा सकता था. लेकिन WHO ने चीन की कही बातों पर भरोसा किया और चीनी सरकार के कामों का बचाव भी किया.''

हालांकि कोरोना वायरस से निपटने के मामले में डोनल्ड ट्रंप खुद चीन की तारीफ कर चुके हैं.

ट्रंप सरकार के विरोधियों का आरोप है कि चुनावों को देखते हुए ट्रंप ख़ुद को बचाने के लिए आरोप किसी और के सिर मढ़ना चाहते हैं.

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