कोरोना वायरस: ईस्टर पर निर्जन वैटिकन से पोप का संदेश 'चुनौतियों के लिए हम सब साझेदार हैं'

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ईस्टर के मौक़े पर ईसाई धर्मगुरु पोप फ़्रांसिस ने वैटिकन में सेंट पीटर्स बासिलिका के भीतर ही प्रार्थना की.
उन्होंने ख़ाली गिरिजाघर से ईस्टर संदेश दिया जिसे ऑनलाइन प्रसारित किया गया.
अपने भाषण में पोप ने कोरोना संकट से निबटने के लिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का आह्वान किया.
पोप ने कहा, "ये उदासीन रहने का समय नहीं है. क्योंकि सारी दुनिया तड़प रही है और उन्हें एक होना चाहिए."
पोप फ़्रांसिस ने साथ ही यूरोपीय संघ के टूटने की चेतावनी दी और ग़रीब देशों को कर्ज़ में राहत देने की अपील की.
पोप ने कहा, "ये आत्मकेंद्रित होने का समय नहीं है क्योंकि जो चुनौतियाँ हम झेल रहे हैं उसमें सब साझेदार हैं."
"उदासीनता, आत्मकेंद्रित रहना, बँटा हुआ रहना, भुला देना, इस समय ये सब शब्द नहीं सुनाई देने चाहिए. हम इन शब्दों को सदा के लिए बैन कर देना चाहते हैं."
पिछले साल ईस्टर के मौक़े पर 70,000 लोग वैटिकन में जुटे थे.
इस बार इटली कोरोना महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है और वैटिकन का रास्ता सील कर दिया गया है.
ईस्टर की पूर्व संध्या पर पोप ने लोगों से कोरोना वायरस से नहीं डरने का आग्रह किया और उनसे मौत के दौर में ज़िंदगी का संदेशवाहक बनने की अपील की.
वहीं ब्रिटेन में चर्च ऑफ़ इंग्लैंड के प्रमुख आर्चबिशप ऑफ़ केंटरबरी ने अंत्येष्टि गृहों और स्थानीय अधिकारियों से लॉकडाउन के दौरान मारे गए लोगों के साथ गरिमा बनाए रखने की अपील की है.
आर्चबिशप ने बीबीसी से कहा, "इंसानों को गरिमा के साथ अलविदा कहना चाहिए, चाहे जितनी भी जल्दी हो और चाहे जितने ही कम लोग क्यों ना हों."

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उन्होंने मारे गए लोगों के क़रीबी लोगों को सलाह दी कि इस डरावने स्वप्न जैसे दौर के बीत जाने के बाद उनकी याद में श्रद्धांजलि आयोजन करने के बारे में सोचें.
उधर येरुशलम में, जहाँ माना जाता है कि ईसा मसीह को सलीब पर चढ़ाया गया था, और जहाँ से वो दोबारा जीवित हुए, वो जगह पिछले 100 से भी अधिक वर्षों में पहली बार पूरी तरह बंद है.
रविवार को वहाँ चर्च ऑफ़ द होली सपुकर में बहुत कम संख्या में कुछ पादरी और कुछ श्रद्धालु जुटे.
वहाँ के आर्चबिशप ने कहा, "ईस्टर जीने का समय है. हर तरफ़ मौत के निशान होने के बावजूद, जीवन तब तक बचा रहेगा जब तक कि कोई दूसरों को प्यार करने के लिए अपनी ज़िंदगी देता रहेगा."
येरुशलम का पुराना इलाक़ा भी लगभग ख़ाली है क्योंकि इसराइल ने वहाँ सख़्ती से सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करवाया हुआ है.


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