कोरोना वायरस: संक्रमण रोकने के लिए क्या कर रहे हैं दुनियाभर के देश?

सोशल डिस्टेंसिंग आज के समय की मांग बन चुकी है

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कोरोना वायरस का कोहराम पूरी दुनिया में मचा हुआ है. दुनिया के 146 से अधिक देश कोरोना वायरस की चपेट में हैं.

स्पेन से लेकर अमरीका तक सभी देशों की सरकारें अपनी तरफ़ से भरपूर कोशिश कर रही हैं कि वो इस वायरस पर काबू पा सकें.

अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के साथ-साथ, कुछ देशों ने अपनी सीमाओं को भी दूसरे देशों के लिए बंद कर दिया है. इसके साथ ही लोगों को सावधानी बरतते हुए एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी बरतने को कहा गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि लोग अधिक संख्या में किसी जगह पर जमा ना हों.

स्वास्थ्य नीतियों और मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि देशों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के उल्लंघन के बीच संतुलन बनाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

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तो ऐसे में दुनियाभर के देश किस तरह के प्रतिबंध लागू कर रहे हैं और किस तरह से लोगों को अलग-थलग रखा जा रहा है और किस तरह से लॉकडाउन लागू किया जा रहा है. आइये जानते हैं.

चीन की हुई आलोचना

चीन, जहां से इस वायरस की शुरुआत हुई वहां हफ़्तों बाद इस वायरस के प्रसार में कमी देखी जा रही है. हालांकि शुरुआत में चीन को इस वायरस से निपटने के उपायों को लेकर काफ़ी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था. चीन पर आरोप लगे थे कि वो इस वायरस की गंभीरता को कम करके दिखाने की कोशिश कर रहा है.

हालांकि आगे चलकर जब स्थिति बेहद गंभीर हुई तो चीन ने इस वायरस के मूल यानी वुहान शहर को पूरी तरह से बंद कर दिया. परिवहन सेवाओं को एकदम से बंद कर दिया गया. हालांकि इस क़दम ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया.

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कम से कम दो सिटीज़न जर्नलिस्ट, जिन्होंने इस प्रकोप के बारे में जानकारी देने की कोशिश की थी, वे लापता बताए गए.

सड़कों पर तापमान की जांच के उपाय किये गए और कुछ लोगों ने यह भी बताया कि रिहायशी इमारतों के प्रवेश द्वार पर गार्ड्स को इस आदेश के साथ खड़ा किया गया है कि वो लोगों को बाहर ना जाने दें. उन्हें उनके घर में ही रहने को कहें. चीन पर लोगों को प्रतिबंधित और उनके स्वास्थ्य की निगरानी करने के लिए अपने सिस्टम का इस्तेमाल करने के भी आरोप लगे.

जैसे ही परिस्थितियां थोड़ी बेहतर हुई हैं, ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि चीन में ज़िंदगी धीरे-धीरे ही सही लेकिन पटरी पर लौट रही है. लेकिन चीन द्वारा इस प्रकोप से निपटने के लिए उठाए गए क़दम की जिस तरह से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सराहना की, उसकी ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे बहुत से समुदायों ने निंदा की है.

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इटली में लगाया जा रहा जुर्माना

वहीं चीन के बाद अगर दुनिया का कोई दूसरा देश इस वायरस से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है तो वो इटली है. इटली में भी इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सामान्य जन-जीवन के संदर्भ में कई तरह के परिवर्तन किए गए हैं. इटली के उत्तरी इलाक़े में सबसे पहले यातायात को प्रतिबंधित किया गया और उसके बाद ये पूरे देश में लागू कर दिया गया.

सरकार ने 6 करोड़ की आबादी को अगर संभव हो तो घर पर ही रहने की सलाह दी है. लोगों को केवल आपात स्थिति में या किसी विशेष ज़रूरत के लिए ही बाहर निकलने के लिए कहा गया है.

उनसे कहा गया है कि वो घर से तभी बाहर क़दम निकालें जब उनके पास इसके लिए कोई बेहद सटीक वजह या कारण हो. जिन लोगों को इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाएगा उन्हें क़रीब 16 हज़ार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है या फिर तीन महीने की उन्हें जेल भी हो सकती है.

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स्पेन में सेना की मदद ली गई

स्पेन की बात करें तो यहां के लोगों की भी सार्वजनिक ज़िंदगी पूरी तरह से ठप्प हो चुकी है. सभी ग़ैर-ज़रूरी संस्थानों को बंद कर दिया गया है. लोगों को कहा गया है कि जब तक ज़रूरी ना हो वे अपने घरों से बाहर ना निकलें. स्पेन के प्रधानमंत्री ने पब्लिक इमरजेंसी की घोषणा की है. हाल के इतिहास में ये दूसरा मौक़ा है जब स्पेन इस तरह के आपातकाल का सामना कर रहा है.

कुछ ख़बरों के मुताबिक़, सार्वजनिक समारोहों को प्रतिबंधित करने और ऐसा कोई समारोह ना हो ये सुनिश्चित करने के लिए सेना की भी मदद ली गई है. स्थानीय ख़बरों के मुताबिक़, देश में मौजूद बेघर लोगों के लिए भी सेना की ओर से प्रयास किये जा रहे हैं.

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सऊदी अरब में लाखों जुर्माना

कुछ देशों ने तो प्रतिबंधों के अनुपालन के लिए और कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सख़्त सज़ा का भी प्रावधान किया है. सऊदी अरब ने देश में प्रवेश करने वालों पर सेहत और यात्रा से जुड़ी सही जानकारी नहीं देने पर 98 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की घोषणा की है.

कुछ देशों ने अपने यहां आगमन को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है और यहां तक की अपनी हवाई और ज़मीनी सीमाओं को भी पूरी तरह बंद कर दिया है. कुछ देशों ने अपने यहां आने वालों के लिए 14 दिन के क्वारेंटाइन को आवश्यक कर दिया है.

अगर बात ऑस्ट्रेलिया की करें तो यहां आइसोलेशन को लेकर बेहद सख़्त नियम तय किए गए हैं. आइसोलेशन नियमों का पालन नहीं करने वालों को भारी जुर्माना भरना पड़ेगा और कुछ जगहों पर जेल की सज़ा का भी प्रावधान किया गया है. पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में अगर कोई नियमों की अनदेखी करेगा तो उसे सबसे अधिक जुर्माना भरना पड़ेगा, जो कि 37 लाख रुपये तय किया गया है.

न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने चेतावनी दी है कि जो यात्री आइसोलेशन के नियमों का पालन करने में असफल रहेंगे उन्हें भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है और या फिर उन्हें भगाया भी जा सकता है.

उन्होंने कहा, "अगर आप यहां आते हैं और अगर आपकी कोई नीयत नहीं है कि आप हमारी सलाह को मानें तो सीधी सी बात है कि आपका यहां बिल्कुल भी स्वागत नहीं है. और इससे पहले की हम आपको यहां से बाहर करें आप को ख़ुद ही यहां से चले जाना चाहिए."

न्यू ज़ीलैंड की प्रधानमंत्री

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अमरीका में सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अधिकारी इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए हर ज़रूरी क़दम उठा रहे हैं.

जिस समय वुहान में इस संक्रमण ने अपना रंग दिखाना शुरू किया था तो भारी संख्या में वहां रह रहे अमरीकी घर लौटने लगे लेकिन इन लौट रहे लोगों के लिए यह तय किया गया कि वो सबसे पहले कैलिफोर्निया मिलिट्री बेस में ख़ुद को क्वेरेंटाइन करेंगे और उसके बाद ही घर जाएंगे.

कुछ जगहों पर पहले से ही अतिरिक्त प्रतिबंध लगाते हुए किसी सार्वजनिक जगह पर 50 से अधिक लोगों के जमा होने पर रोक लगा दी गई है.

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बहुत से ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें आइसोलेशन के नियमों को तोड़ना मुद्दा बन गया है. स्थानीय ख़बरों के अनुसार, अमरीका के केंतुकी में एक शख़्स जिसने आइसोलेशन में रहने से इनक़ार कर दिया, उसके घर के आगे पुलिस की नियुक्ति की गई ताकि उसे घर के अंदर ही रखा जा सके.

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