दिल्ली हिंसा पर ईरान के सर्वोच्च नेता ख़ामेनेई की टिप्पणी पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा, शुक्रिया

आयातुल्लाह ख़ामेनेई

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ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह ख़ामेनेई ने दिल्ली में हुए दंगों पर भारत की कड़ी निंदा की है. दिल्ली के उत्तर-पूर्वी ज़िले में 24-26 फ़रवरी को हुई हिंसा में क़रीब 50 लोग अब तक मारे जा चुके हैं और 200 से ज़्यादा घायल हैं.

मरने वालों में ज़्यादातर मुसलमान हैं.

ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता ख़ामेनेई ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि भारत में मुसलमानों पर ज़ुल्म हो रहा है और दुनिया भर के मुसलमान इससे दुखी हैं.

उन्होंने ट्वीट में लिखा, ''भारत में मुसलमानों के नरसंहार पर दुनियाभर के मुसलमानों का दिल दुखी है. भारत सरकार को कट्टर हिंदुओं और उनकी पार्टियों को रोकना चाहिए और इस्लामी दुनिया की ओर से भारत को अलग-थलग किए जाने से बचने के लिए भारत को मुसलमानों के नरसंहार को रोकना चाहिए.''

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ख़ामेनेई ने अपने ट्वीट के साथ #IndianMuslimslnDanger यानी 'भारतीय मुसलमान ख़तरे में हैं' लिखा.

इस पर अभी तक भारत की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने ट्वीट करके ख़ामनेई को धन्यवाद दिया है.

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उन्होंने लिखा, "मैं हिंदूवादी मोदी सरकार द्वारा भारत और भारत प्रशासित कश्मीर में मुसलमानों के दमन और नरसंहार के ख़िलाफ़ बोलने के लिए सर्वोच्च नेता ख़ामनेई और राष्ट्रपति आर्दोआन का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं. "

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इससे पूर्व इमरान ख़ान ने ट्वीट करके अफ़सोस ज़ाहिर किया था कि मुस्लिम मुल्कों से बहुत कम लोग हैं जो इसके खिलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं.

कुछ ही दिनों पहले ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने भी दिल्ली दंगों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.

उन्होंने ट्वीट कर कहा था, ''भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ प्रायोजित हिंसा की ईरान निंदा करता है. सदियों से ईरान और भारत दोस्त रहे हैं. मैं भारत की सरकार से आग्रह करता हूं कि सभी नागिरकों को सुरक्षा प्रदान करे.''

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पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने ईरान के इस रवैये का स्वागत किया है. ईरानी विदेश मंत्री के बयान पर भी उन्होंने सहमति जताई थी और अब ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता के बयान पर भी पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने फ़ौरन अपनी प्रतिक्रिया दी है.

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भारत ने ईरान के विदेश मंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए भारत में ईरान के राजदूत अली चेगेनी को विदेश मंत्रालय तलब किया था. इस दौरान भारत ने ईरान से साफ़ कहा था कि ईरान को भारत के अंदरुनी मामलों में दख़ल नहीं देना चाहिए.

ओआईसी ने भी जताई थी चिंता

इससे पहले ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने बयान जारी कर कहा था कि भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा चिंताजनक है. ओआईसी ने बयान जारी कर कहा था, ''ओआईसी भारत में हाल में हुए मुस्लिम विरोधी दंगे की निंदा करता है. दंगे के कारण कई बेगुनाहों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग ज़ख़्मी भी हुए हैं. मस्जिदों में तोड़फोड़ की गई है. हम पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना ज़ाहिर करते हैं और हिंसा की निंदा करते हैं.''

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पाकिस्तान, मलेशिया और तुर्की

पाकिस्तान, मलेशिया और तुर्की भी दिल्ली हिंसा पर अपनी चिंताएं ज़ाहिर कर चुके हैं.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने दिल्ली हिंसा की निंदा करते हुए कहा था, ''मोदी ने गुजरात में मुख्यमंत्री रहते मुसलमानों के साथ बर्बर बर्ताव किया और अब हम नई दिल्ली में वही होते हुए फिर से देख रहे हैं."

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने भी भारत में मुसलमानों की हालत पर चिंता जताई थी.

उन्होंने कहा था कि हिन्दू भारत में मुसलमानों का नरसंहार कर रहे हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ रेचप तैय्यप अर्दोआन ने अंकारा में एक भाषण के दौरान कहा था, "भारत अब एक ऐसा देश बन गया है जहां व्यापक स्तर पर नरसंहार हो रहा है. कैसा नरसंहार? मुसलमानों का नरसंहार. कौन कर रहा है? हिंदू."

तुर्की के राष्ट्रपति की इस टिप्पणी पर भारत ने कड़ा एतराज़ जताया था.

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था कि तुर्की भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है. रवीश कुमार ने कहा था कि तुर्की को पहले तथ्य समझना चाहिए तब कोई टिप्पणी करनी चाहिए.

भजनपुरा का पेट्रोल पम्प

मलेशिया के एक मुस्लिम यूथ ग्रुप ने दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा था, ''प्रशासन दंगे को नियंत्रित करने में नाकाम रहा है. धार्मिक अतिवादियों ने मुसलमानों के घरों और पूजास्थलों को टारगेट किया है. यह संभव नहीं है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था इस क़दर कमज़ोर है कि दंगे को न रोक सके. हम भारत के विवादित क़ानून सीएए को लेकर भी चिंतित हैं.''

इसके अलावा इंडोनेशिया के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने एक बयान जारी कर दिल्ली हिंसा की निंदा की थी.

संयुक्त राष्ट्र और अमरीका की संस्थाएं भी आपत्ति जता चुकी हैं

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद प्रमुख मिशेल बाचेलेत जेरिया ने भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) और सांप्रदायिक हिंसा को लेकर चिंता जताई थी.

जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के 43वें सत्र में यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स कमिशन की उच्चायुक्त ने पूरी दुनिया में मानवाधिकार की स्थिति और इसके सुधार के संबंध में हुई प्रगति को लेकर जानकारी दी थी.

इस दौरान भारत का भी ज़िक्र किया गया था. इसमें भारत प्रशासित कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के बाद के हालात और हाल ही में दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान हुई मौतों को लेकर चिंता जताई गई थी.

अमरीकी एजेंसी यूनाइटेड स्टेट्स कमिशन ऑन इंटरनेशनल रीलिजियस फ़्रीडम ने दिल्ली हिंसा की निंदा करते हुए कहा, "किसी भी ज़िम्मेदार सरकार की ज़िम्मेदारियों में एक काम ये भी है कि वो अपने नागरिकों को सुरक्षा मुहैया कराए. हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि वो भीड़ की हिंसा का निशाना बनाए जा रहे मुसलमानों और अन्य लोगों की सुरक्षा में गंभीर क़दम उठाए."

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भारत कहता रहा है कि नागरिकता संशोधन क़ानून हो या कश्मीर में अनुच्छेद 370 का हटाया जाना या फिर दिल्ली में हुई हिंसा की ताज़ा घटना, ये सभी भारत के आंतरिक मामले हैं और किसी भी तीसरे पक्ष का इसमें कोई रोल नहीं है.

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