You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
गणित की मामूली ग़लतियां दिवालिया कर सकती हैं
- Author, डेविड रॉबसन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पंद्रह साल पहले इटली के लोगों ने एक अजीब तरह की मास हिस्टीरिया का अनुभव किया जिसे "53 फ़ीवर" के नाम से जाना जाता है.
यह लॉटरी से जुड़ा था. बारी, नेपल्स या वेनिस जैसे शहरों में खिलाड़ी 11 अलग-अलग व्हील्स को खेलने के लिए चुन सकते थे.
एक बार अपना व्हील चुन लेने के बाद एक से लेकर 90 के बीच की संख्याओं पर दांव लगा सकते हैं.
जीतने की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि आपने शुरुआत में कितना दांव लगाया है, आपने कितने नंबर चुने हैं और आपके अनुमान कितने सही होते हैं.
2003 में एक समय वेनिस के व्हील में 53 नंबर आना बंद हो गया. इससे पंटर्स इस नंबर पर बड़े दांव लगाने लगे. उनको लगा कि यह नंबर ज़ल्द ही लौटेगा.
2005 की शुरुआत तक "53 फ़ीवर" के कारण हजारों लोग दिवालिया हो गए. ख़ुदकुशी की घटनाएं बढ़ गईं.
यह हिस्टीरिया 9 फरवरी के ड्रॉ से ख़त्म हुआ जब 182 बार की नाकामी और 4 अरब डॉलर के दांव के बाद यह नंबर व्हील्स पर दिखा.
इसके शिकार हुए लोग रीजनिंग की एक ग़लती के शिकार हुए जिसे गैंबलर्स फ़ैलसी (Gambler's fallacy) कहा जाता है. यह एक सामान्य ग़लती है जो कई पेशेवर फ़ैसलों को पटरी से उतार सकती है.
फुटबॉल के पेनल्टी शूटआउट में गोलकीपर ग़लती कर जाता है. शेयर बाजार निवेश में ग़लती हो जाती है. यहां तक कि न्यायिक फ़ैसलों में भी चूक हो जाती है.
कहीं आप भ्रम में तो नहीं पड़ गए?
कल्पना कीजिए कि आप सिक्के उछाल रहे हैं और आपको ऐसे क्रम मिलते हैं- हेड्स, हेड्स, टेल्स, टेल्स, टेल्स, टेल्स, टेल्स, टेल्स, टेल्स, टेल्स, टेल्स, टेल्स. अब हेड्स आने की क्या संभावना होगी?
कई लोग मानते हैं कि हेड्स आने की संभावना बढ़ती जाती है क्योंकि क्रम बराबर होना चाहिए. यानी सिक्के की हर उछाल के बाद यह भ्रम बढ़ने लगता है कि अगली बार हेड्स ही आएगा.
लेकिन बुनियादी प्रायिकता सिद्धांत कहता है कि सिक्के की हर उछाल स्वतंत्र होती है यानी हेड्स या टेल्स आने की संभावना बराबर-बराबर होती है.
500 या 5,000 बार लगातार टेल्स आने के बाद भी हेड्स आने की संभावना 50 फीसदी ही होती है. इसी वजह से HTHTTH ठीक HHHHHH जैसा है.
कई लोग इससे सहमत नहीं होते और मानते हैं कि मिला-जुला क्रम आने की संभावना अधिक रहती है.
शोध क्या कहता है?
गैंबलर्स फ़ैलसी पर सबसे ज़्यादा ध्यान उन शोधकर्ताओं का गया है जो संभावनाओं के खेल का अध्ययन करते हैं.
इसे मोंटे कार्लो फ़ैलसी भी कहा जाता है. 1913 में मोनाको के रूलेट टेबल में लगातार 26 बार ब्लैक आने की कुख्यात घटना के बाद इसे यह नाम मिला था.
कसीनो के वीडियो फ़ुटेज से पुष्टि होती है कि यह आज भी दांव को प्रभावित करता है.
चीनी और अमरीकी शोधकर्ताओं के एक अध्ययन से पता चला कि ऊंची आईक्यू वाले लोग गैंबलर्स फ़ैलसी में आसानी से फंसते हैं.
हो सकता है कि ज़्यादा IQ वाले लोग पैटर्न के बारे में ज़्यादा सोचते हैं और उनको भ्रम रहता है कि वे इतने स्मार्ट हैं कि आगे क्या होने वाला है इसका अनुमान लगा सकते हैं.
वजह चाहे जो हो, गैंबलर्स फ़ैलसी कसीनो के बाहर भी गंभीर असर दिखाते हैं. मिसाल के लिए, शेयर बाजार के सौदों में भी यह पूर्वाग्रह मौजूद रहता है.
शेयर बाजार में अल्प-अवधि के उतार-चढ़ाव सामान्य हैं. जर्मनी की पैडरबोर्न यूनिवर्सिटी के मैटियास पेल्स्टर के मुताबिक निवेशक यह सोचकर फ़ैसले करते हैं कि कीमतें ज़ल्द ही पिछले स्तर पर आ जाएंगी.
इसलिए इटली के जुआरियों की तरह शेयर बाजार के निवेशक एक सीध के उलट ट्रेड करते हैं.
कुछ पेशों में जहां पूर्वाग्रह रहित फ़ैसलों की ज़रूरत होती है, वहां गैंबलर्स फ़ैलसी एक विशिष्ट समस्या है.
जज के फ़ैसलों में पूर्वाग्रह
शोधकर्ताओं की एक टीम ने शरणार्थियों को शरण देने या नहीं देने के अमेरिकी जजों के फ़ैसलों का अध्ययन किया.
तार्किक रूप में ऐसे मामलों में क्रम का कोई महत्व नहीं होना चाहिए. लेकिन शोधकर्ताओं ने पाया कि यदि जज ने पिछले दो मामलो में शरण देने का फ़ैसला किया है तो तीसरे मामले में इसकी संभावना 5.5 फीसदी घट जाती है.
क्या जज जानबूझकर ऐसा करते हैं? ऐसा लगता है कि वे एक ही तरह का फ़ैसला लगातार तीन मामलों में नहीं दुहराना चाहते, इसीलिए वे क्रम तोड़ते हैं.
शोधकर्ताओं ने कर्ज के आवेदनों पर बैंक अधिकारियों के रुख का भी अध्ययन किया. इससे एक बार फिर यह साबित हुआ कि आवेदनों के क्रम से फर्क पड़ता है.
दो या दो से अधिक आवेदनों को एक क्रम में मंजूर करने के बाद बैंक अधिकारी के पास कर्ज का आवेदन आता है तो उसे नामंजूर करने की संभावना 8 फीसदी अधिक रहती है.
शोधकर्ताओं ने बेसबॉल की मेजर लीग में अंपायर के फ़ैसलों का भी अध्ययन किया. अंपायर ने यदि पिछले पिच को स्ट्राइक करार दिया है तो अगले पिच को स्ट्राइक करार देने की संभावना 1.5 फीसदी कम होती है.
यह पूर्वाग्रह छोटा लगता है, लेकिन मैच के नतीजे पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है.
अध्ययन की सह-लेखिका केली शु शुरुआत में यह नतीजे देखकर हैरान थी. वह कहती हैं, "वे पेशेवर थे और अपने पेशेगत निर्णय ले रह थे, फिर भी वे पूर्वाग्रह के शिकार थे."
पेनल्टी शूटआउट में भ्रम
फुटबॉल के खिलाड़ी गैंबलर्स फ़ैलसी पर विशेष रूप से ध्यान दे सकते हैं. पेनल्टी शूटआउट में गेंद को गोल तक पहुंचने में 0.2 से 0.3 सेकेंड लगते हैं.
इसरायल की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी की सिमचा एवुगोस कहती हैं, "गोलकीपर को तय करना होता है कि वह दायीं या बायीं ओर छलांग लगाए या गोलपोस्ट के बीच में रहे. ठीक उसी समय किक मारने वाले खिलाड़ी को सोचना होता है कि वह किधर किक लगाए."
इसका मतलब यह हुआ कि छलांग किस ओर लगानी है, यह वास्तव में एक जुआ है.
एवुगोस की टीम ने हाल में फीफा वर्ल्ड कप और ब्रिटेन की चैंपियन लीग में शूटआउट का अध्ययन किया तो यही पाया.
इस नतीजे को देखकर टीम का तर्क है कि पेनल्टी शूटआउट में फुटबॉल खिलाड़ी एक ही दिशा में शूटिंग जारी रखकर इस प्रवृत्ति का फायदा उठा सकते हैं.
ज़्यादातार नौकरियां में ऐसे हालात नहीं होते, फिर भी शु को लगता है कि गैंबलर्स फ़ैलसी कई अन्य पेशों में भी हमारे फ़ैसलों पर असर डालती है, भले ही हम यह महसूस न कर पाएं कि अवचेतन में हम संभावना के आधार पर फ़ैसले कर रहे हैं.
वह कर्मचारियों की भर्ती का उदाहरण देती हैं. यदि इंटरव्यू लेने वालों ने पहले ही किसी अच्छे उम्मीदवार को देख लिया है तो मुमकिन है कि आगे वे किसी असाधारण व्यक्ति की उम्मीद न करें. ऐसे में संभावना होती है कि वे अगले कैंडिडेट को कड़ाई से रेटिंग दें.
शिक्षकों पर भी यह बात लागू होती है. इसी तरह अगर आप उपन्यासों के प्रकाशक हैं और हाल में ही कुछ बेमिसाल उपन्यासों को छापा है तो संभव है कि आप जेके रोलिंग की पांडुलिपि को भी नामंजूर कर दें.
आपका पेशा चाहे जो हो, आपको इटली के "53 फ़ीवर" और इससे मची अव्यवस्था को याद रखना चाहिए.
किसी भी तरह के क्रम में कभी-कभी पैटर्न बन सकता है और बनता है. हम सब अधिक तर्कसंगत होंगे यदि हम यह मंजूर करें कि इत्तफ़ाक़ के बारे में हमारी अटकल अक्सर निशाने से भटकी हुई होती है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)