दिल्ली हिंसा: UNHRC चीफ़ ने CAA और सांप्रदायिक हिंसा पर जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद प्रमुख मिशेल बाचेलेत जेरिया ने भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) और सांप्रदायिक हिंसा को लेकर चिंता जताई है.

जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के 43वें सत्र में युनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स कमिशन की उच्चायुक्त ने पूरी दुनिया में मानवाधिकार की स्थिति और इसके सुधार के संबंध में हुई प्रगति को लेकर जानकारी दी.

इस दौरान भारत का भी ज़िक्र किया गया. इसमें भारत प्रशासित कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के बाद के हालात और हाल ही में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान हुई मौतों को लेकर चिंता जताई गई.

वहीं, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने पाकिस्तान पर फिर निशाना साधा है. भारत ने कहा कि पाकिस्तान को चरमपंथी संगठनों का समर्थन बंद कर अपने देश की जनता की भलाई के बारे में सोचना चाहिए, ख़ास कर अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करने में अपनी नाकामी को सुधारे.

भारत ने कहा कि मानवाधिकारों पर उपदेश देने से पहले पाकिस्तान ये याद रखे कि आतंकवाद मानवाधिकारों के हनन का सबसे बड़ा जरिया है.

जम्मू-कश्मीर को लेकर उठ रहे सवालों पर भारतीय प्रतिनिधि ने कहा, ''जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा. पाकिस्तान को इसका लालच छोड़ देना चाहिए.''

भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान का इरादा भारत के सामाजिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने का है.

भारत ने यह भी कहा कि वह सीमा पार से हो रहे चरमपंथ का सबसे बड़ा शिकार है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत का यह बयान मिशेल बाचेलेत जेरिया के बयान के बाद आया है.

मिशेल बाचेलेत ने नागरिकता संशोधन को लेकर जारी विरोध पर भी बात की और कहा कि इसका भारत के सभी समुदायों के संबंध रखने वाले लोगों ने विरोध किया है.

यूएनएचआरसी प्रमुख ने अपने संबोधन में भारत को लेकर जो कहा, आगे पढ़ें-

"जम्मू और कश्मीर में कुछ राजनेता रिहा कर दिए गए हैं और कुछ पहलुओं को लेकर आम जन-जीवन सामान्य होता दिख रहा है, बताया जा रहा है कि 800 के लगभग लोग अभी हिरासत में हैं जिनमें राजनेता, एक्टिविस्ट शामिल हैं."

"भारी संख्या में सेना की मौजूदगी के कारण स्कूल, व्यापारित प्रतिष्ठान और रोज़गार के ज़रिए प्रभावित हुए हैं और सुरक्षा बलों द्वारा अतिरिक्त बल प्रयोग व अन्य मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर कोई क़दम नहीं उठाया गया."

"सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले के बाद भारत सरकार ने मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को आंशिक रूप से बहाल किया है मगर प्रशासन सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर अतिरिक्त पाबंदियां लगा रहा है."

"भारत में बीते दिसंबर में लाया गया नागरिकता संशोधन क़ानून मुख्य तौर पर चिंता का विषय है. सभी समुदायों से संबंध रखने वाले भारतीयों ने बड़ी संख्या में, अधिकतर शांतिपूर्ण ढंग से इस कानून का विरोध किया है और देश में धर्मनिरपेक्षता के लंबे इतिहास का पक्ष लिया है."

"शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा अतिरिक्त बल प्रयोग किए जाने की पहले की ख़बरों और अन्य समूहों द्वारा मुसलमानों पर हमला किए जाने पर पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने की ख़बरों को लेकर चिंतित हूं. अब बात बढ़कर बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हमलों में तब्दील हो गई है और 23 फ़रवरी से लेकर अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है. मैं सभी राजनेताओं से अपील करती हूं कि हिंसा को रोकें."

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