अफ़ग़ानिस्तान चुनाव: अशरफ़ ग़नी विजेता घोषित

अशरफ़ ग़नी

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क़रीब पाँच महीने पहले अफ़ग़ानिस्तान में हुए विवादित चुनाव में राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी को विजेता घोषित किया गया है.

कहा जा रहा है कि अशरफ़ ग़नी को फिर से चुने जाने की घोषणा से अफ़ग़ानिस्तान नए संकट में फंस सकता है, क्योंकि चुनाव में भारी धांधली के आरोप लगे थे.

चुनावी नतीजे की घोषणा तब हुई है जब तालिबान से शांति समझौते की कोशिश चल रही है.

अफ़ग़ानिस्तान में पिछले साल 28 सितंबर को मतदान हुए थे. 2001 में अमरीकी बलों ने तालिबान को सत्ता से उखाड़ फेंका था. उसके बाद से यह चौथा चुनाव था. मतदान में भारी धांधली के आरोप लगे थे. मतदान के दौरान बायोमेट्रिक डिवाइस में तकनीकी समस्या भी आई थी. इसके अलावा कई तरह की अनियमितता के आरोप लगे थे.

मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान के इंडिपेंडेंट इलेक्शन कमिशन (आईइसी) ने कहा कि अशरफ़ ग़नी को 50.64% मत मिले और उनके प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला अब्दुल्ला को 39.52% वोट मिले.

आईइसी ने दिसंबर में शुरुआती नतीते घोषित किए थे और इसमें वर्ल्ड बैंक के पूर्व अधिकारी अशरफ़ ग़नी को मामूली अंतर से विजेता बताया गया था. हालांकि अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए चुनावी नतीजों को ख़ारिज कर दिया था. उन्होंने मतदान की समीक्षा की मांग की थी. दूसरी तरफ़ अशरफ़ ग़नी ने चुनाव में धांधली के आरोपों को ख़ारिज कर दिया था.

चुनावी नतीजों की घोषणा के बाद अब्दुल्ला अब्दुल्ला के चुनावी कैंपेन के प्रमुख फ़ज़ल अहमद मनावी ने ट्विटर पर कहा, ''हमलोग चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं. हमारी नज़रों में न तो आईइसी की कोई प्रासंगिकता है और न ही चुनावी नतीजों की घोषणा की. जो भी नाइंसाफ़ी हुई उसके साथ वक़्त ही इंसाफ़ करेगा.''

2014 के चुनाव में भी धोखाधड़ी के आरोप लगे थे. तब अशरफ़ ग़नी और अब्दुल्ला अब्दुल्ला दोनों ने धांधली के आरोप लगाए थे. ऐसे में अमरीका को बीच बचाव करना पड़ा था और दोनों को सत्ता में हिस्सेदारी मिली थी. अशरफ़ ग़नी राष्ट्रपति बने थे और अब्दुल्ला अब्दुल्ला चीफ़ एग्टेक्युटिव बनाया गया था. 2014 के बाद से ही दोनों के रिश्तों में पर्याप्त अविश्वास हैं.

अब्दुल्ला अब्दुल्ला

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इमेज कैप्शन, अशरफ़ ग़नी प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला अब्दुल्ला चुनावी नतीजों को अस्वीकार कर दिया है.

अफ़ग़ानिस्तान में ये राजनीतिक संकट तब घर कर रहा है जब अमरीका तालिबान से शांति समझौते की कोशिश कर रहा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार हिंसा में कमी की शुरुआत के साथ ही दोनों पक्ष किसी समझौते की घोषणा कर सकते हैं. अफ़ग़ानिस्तान के कार्यकारी गृह मंत्री ने भी कहा है कि तालिबान से बातचीत की ज़मीन तैयार हो रही है. शुरुआत में तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की सरकार से बात करने से इनकार कर दिया था. तालिबान का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान की सरकार अमरीका की कठपुतली है.

अफ़ग़ानिस्तान के उपराष्ट्रपति रहे अब्दुल राशिद दोस्तम ने पिछले हफ़्ते आगाह किया था कि अगर अशरफ़ ग़नी को विजेता घोषित किया गया तो अब्दु्ल्ला अब्दुल्ला और उनके समर्थक समानांतर सरकार गठन का ऐलान कर सकते हैं.

इस चुनाव में मतदान भी सबसे कम हुआ था. महज़ 10.82 लाख मतों की ही गिनती हुई थी. क़रीब 10 लाख मतों को अनियमितता के कारण अवैध बता दिया गया था. अफ़ग़ानिस्तान की कुल आबादी 3.7 करोड़ है और 90.6 लाख रजिस्टर्ड मतदाता हैं. कम मतदान की एक वजह असुरक्षा थी. तालिबान ने पोलिंग बूथों पर हमले की धमकी दी थी.

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