ईरानी सेना के 'ग़लती से' विमान गिराने पर क्या बोले ख़मेनेई

ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्लाह अली ख़ामेनेई ने यूक्रेन के यात्री विमान को गिराने के मामले में अपनी सेना का बचाव करते हुए कहा है कि उसने ईरान की सुरक्षा को क़ायम रखा.

ईरान की सेना ने 8 जनवरी को यूक्रेन के इस विमान को ग़लती से मार गिराने की बात स्वीकार की थी जिसमें उसपर सवार सभी 176 लोगों की मौत हो गई थी.

यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस के बोइंग 737-800 विमान ने तेहरान से यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ जाने के लिए उड़ान भरी ही थी जब वो दुर्घटना का शिकार हो गया. विमान पर बैठे लोगों में ईरान, कनाडा, स्वीडन और ब्रिटेन के नागरिक शामिल थे.

विमान के ईरानी हमले में गिरने की बात सामने आने के बाद विदेशों में इसे लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और ईरान सरकार पर इसे लेकर दबाव बना हुआ था.

मगर ख़मेनेई ने शुक्रवार को तेहरान में जुमे की नमाज़ के बाद ईरानी सेना का बचाव करते हुए उनके लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की. उन्होंने 2012 के बाद पहली बार जुमे की नमाज़ की अगुआई की.

उन्होंने कहा, हमारे दुश्मन इस दुर्घटना से उतने ही ख़ुश थे जितने कि हम दुःखी. वे ख़ुश थे कि उन्हें रिवॉल्यूशनरी गार्ड और हमारी सेनाओं पर सवाल उठाने के लिए कोई मुद्दा मिल गया.

दुश्मन से उनका इशारा अमरीका और उनके सहयोगियों की ओर था जिनके साथ ईरान की तनातनी उनके एक नामी जनरल की मौत के बाद शुरु हुई.

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सुलेमानी की मौत का जवाब

अमरीका ने ईरान की कुद्स फ़ोर्स के प्रमुख जनरल क़ासिम सुलेमानी को इराक़ में बग़दाद हवाई अड्डे के बाहर एक ड्रोन हमले में मार डाला था.

इसके जवाब में ईरान ने इराक़ में अमरीका के दो एयरबेसों पर मिसाइल हमला किया.

इसी के कुछ घंटे बाद यूक्रेन के विमान के गिरने की ख़बर आई. ईरान सरकार ने पहले इसमें कोई हाथ होने से इनकार किया था.

मगर अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने स्वीकार किया कि इस विमान को ग़लती से एक क्रूज़ मिसाइल समझ निशाना बनाया गया.

और क्या बोले ख़मेनेई

80 वर्षीय अयातोल्लाह ने ईरान की राजधानी तेहरानी की मोसल्ला मस्जिद से देश को संबोधित किया.

इससे पहले आख़िरी बार उन्होंने ऐसा संबोधन 2012 में दिया था जब ईरान की इस्लामिक क्रांति की 33वीं सालगिरह मनाई जा रही थी.

वाशिंगटन इंस्टीच्यूट फ़ॉर नियर ईस्ट पॉलिसी से जुड़े महदी ख़लजी का कहना है कि जुमे की नमाज़ की अगुआई करना एक ख़ास बात है और ऐसा ईरानी नेतृत्व तभी करता है जब वो कोई ख़ास संदेश देना चाहता है.

वो बताते हैं कि आम तौर पर जुमे की नमाज़ का नेतृत्व अयातोल्लाह के क़रीबी स्थानीय मौलाना करते हैं जो काफ़ी दमदार भाषण देने में दक्ष माने जाते हैं.

ख़मेनेई ने वहाँ सेना का बचाव करने के साथ-साथ ये सब भी कहाः

  • अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की "शैतान" सरकार की आलोचना करते हुए ट्रंप को "मसखरा" बताया
  • अमरीका पर इस बात को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया कि वो ईरानी जनता के साथ है, और कहा कि अमरीका उनपर "ज़हर बुझे खंज़र" से वार करेगा
  • इराक़ पर ईरान का मिसाइल हमला अमरीका के "चेहरे पर एक तमाचा" है
  • कुद्स फ़ोर्स "एक मानवीय संस्था है जो मानवीय मूल्यों में यक़ीन" रखती है, अमरीका उसे एक आतंकवादी संगठन मानता है
  • जनरल सुलेमानी का जनाज़ा और ईरानी सेना का जवाबी हमला "इतिहास को बदलने वाला एक मोड़" है

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