हांगकांग: हत्या का अभियुक्त लड़का रिहा, विवादित प्रत्यर्पण विधेयक भी वापस

चान टोंग-काई

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हांगकांग में हत्या के उस संदिग्ध को रिहा कर दिया गया है जिनके केस पर वहां विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये थे.

हांगकांग में एक लड़की की हत्या के मामले में गिरफ़्तार उनके बॉयफ़्रेंड को रिहा कर दिया गया है.

इसी मामले के बाद प्रत्यर्पण क़ानूनों में बदलाव की योजना बनाई गई थी. इस क़दम से नाराज़ लोगों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे.

चान टोंग-काई नाम के युवक पर पिछले साल ताइवान में अपनी गर्भवती प्रेमिका की हत्या करके भागकर हांगकांग आने का आरोप है. लेकिन हांगकांग और ताइवान के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है. सरकार द्वारा क़ानून में संशोधन का प्रस्ताव पेश करते समय इस मामले का हवाला दिया गया था.

प्रेमिका की मौत के बाद उनके क्रेडिट कार्ड से पैसे निकालने के आरोप में उन्हें जेल भेजा गया था.

19 महीने जेल में रहने के बाद बुधवार को रिहा होकर 20 वर्षीय युवक ने पीड़ित परिवार से माफ़ी मांगी है.

उन्होंने कहा, "मैं आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हूं. साथ ही मुक़दमे के लिए और सज़ा काटने के लिए ताइवान जाने के लिए भी तैयार हूं."

युवक को ताइवान किस तरह भेजा जाए इसके क़ानूनी पहलू को लेकर हांगकांग और ताइवान के बीच कई बार भिड़ंत हो चुकी है.

फ़िलहाल अभी यह साफ़ नहीं है कि इस मामले में अगला क़दम क्या होगा.

हांगकांग का कहना था कि युवक ताइवान जाकर आत्मसमर्पण कर सकता है. वहीं ताइवान ने सुरक्षा कारणों से अधिकारियों को भेज उन्हें साथ में लाने का प्रस्ताव रखा, जिसे हांगकांग ने इनकार कर दिया है.

हांगकांग

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प्रस्तावित प्रत्यर्पण बिल पास होने से हांगकांग संदिग्ध अपराधियों को चीन, ताइवान और मकाऊ जैसे देशों में प्रत्यर्पित कर सकता है जिनके साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं है.

प्रस्तावित क़ानून के आलोचकों का कहना है कि चीन में प्रत्यर्पण से कई लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया जा सकेगा और अनुचित ढंग से मुक़दमा चलाया जा सकेगा और इसका ग़लत इस्तेमाल हो सकता है.

इस विवादास्पद विधेयक को बुधवार को औपचारिक रूप से वापस ले लिया गया है.

हांगकांग में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने जुलाई में घोषणा की थी कि वह इस विधेयक को निलंबित कर देगी.

हांगकांग में जो विरोध प्रदर्शन प्रत्यर्पण बिल को लेकर शुरू हुए थे वे बाद में लोकतंत्र से जुड़े मुद्दे और चीन से कम हस्तक्षेप को लेकर भी जारी रहे.

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