डोनल्ड ट्रंप ने दी तुर्की की अर्थव्यवस्था 'तबाह' कर देने की धमकी

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि उत्तरी सीरिया से अमरीकी फ़ौजों के हटने के बाद अगर तुर्की 'अपनी हदें पार करता है' तो वो उसकी अर्थव्यवस्था को तबाह देंगे.

आशंका जताई जा रही है कि अगर अमरीकी सैनिक हटे तो तुर्की को सीमा के पास मौजूद कुर्द लड़ाकों के ख़िलाफ़ हमला बोलने का मौका मिल जाएगा.

कुर्द लड़ाके सीरिया में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका के प्रमुख सहयोगी रहे हैं. उधर तुर्की के रक्षा विभाग ने कहा है कि उत्तरी सीरिया में हमले के लिए वो पूरी तरह तैयार है.

ट्रंप ने कई ट्वीट करके अमरीकी सैनिकों को उत्तरी सीरिया से हटाने के अपने फ़ैसले का बचाव किया है.

मगर ट्रंप के रिपब्लिकन सहयोगी भी उनके फ़ैसले की तीखी आलोचना कर रहे हैं. डेमोक्रेटिक सदस्य नैंसी पेलोसी और रिपब्लिकन मिच मैकोनल ने इसे 'ख़तरनाक़' और 'उतावला' क़दम बताया है.

अमरीकी अधिकारियों की सफ़ाई

विदेश विभाग की प्रेस ब्रीफ़िंग में मौजूद रहे ब्लूमबर्ग न्यूज़ के संवाददाता निकोलस वेडम्स का कहना है कि विदेश विभाग ट्रंप के फ़ैसले पर लीपापोती कर रही है.

निकोलस वेडम्स ने कहा, "विदेश मंत्रालय के दो अधिकारियों ने स्पष्टीकरण दिया है कि वास्तव में अमरीका सिर्फ़ दो ठिकानों से अपने सैनिकों को वापस बुला रहा था. इनका यह कहना दिखाता है कि वे दरअसल अपने इन सैनिकों को किसी संभावित नुक़सान से बचा रहे थे."

"अधिकारियों ने ये भी कहा कि वे नहीं चाहते थे कि अमरीकी सैनिक वहां मौजूद रहें और वे हमले के लिए मूक सहमति देते दिखें. यानी ये उसी तरह की स्थिति है जहां राष्ट्रपति कहते कुछ और हैं और फिर उसे समझा कुछ और जाता है. और बाद में अधिकारी आगे आकर कुछ और ही कहानी सामने रख देते हैं."

सीरिया में अमरीका के 1,000 सैनिक तैनात हैं और फ़िलहाल सीमा से क़रीब दो दर्जन सैनिकों को हटा लिया गया है.

मुख्य कुर्द समूह ने सैनिकों को हटाने के फ़ैसले को पीठ में छूरा घोंपना क़रार दिया है. कुर्दों का कहना है कि अमरीकियों ने उन्हें भरोसा दिया था कि वो इस इलाक़े में किसी भी तुर्की सैन्य अभियान को नहीं होने देंगे.

सीरियाई कुर्द लड़ाकों के संगठन वाईपीजी के राजनीतिक संगठन पीवाईडी के प्रवक्ता सालेह मुस्लिम ने कहा कि इस फ़ैसले का उल्टा असर पड़ेगा.

अमरीका के क़दम से निराश हैं कुर्द

सालेह मुस्लिम कहते हैं, "अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को इस बारे में कुछ करना चाहिए. हम समझते हैं कि ये एक तरह से इस्लामिक स्टेट को फिर से संगठित होने का मौका देना है और ये बहुत ख़राब स्थिति है. हर किसी को इसके ख़िलाफ़ होना चाहिए. दाएश (आईएसआईएस) अभी ख़त्म नहीं हुआ है."

सालेह का कहना है कि तुर्की के किसी भी हमले का कुर्द लड़ाके और उनके सहयोगी मुक़ाबला करेंगे.

आलोचकों का कहना है कि अमरीकी सैनिकों के हटने से कुर्द लड़ाकों पर तुर्की का हमला हो सकता है और इस्लामिक स्टेट का फिर से उभार देखने को मिल सकता है.

कुर्द लड़ाकों को तुर्की चरमपंथी मानता है. लेकिन ट्रंप ने तुर्की को अपने फ़ैसले का फ़ायदा उठाने के प्रति चेतावनी दी है.

पेंटागन और विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सैनिक न हटाने की सलाह दी थी, फिर भी ट्रंप ने यह फ़ैसला ले लिया.

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