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नरेंद्र मोदी और इमरान ख़ान टाइटैनिक फ़िल्म से लें सबकः वुसअत का ब्लॉग
- Author, वुसअतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, पाकिस्तान से बीबीसी हिंदी के लिए
दिल्ली और इस्लामाबाद कम-से-कम एक हफ़्ते के लिए न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन शिफ़्ट हो चुके हैं.
मोदी ने अपनी पारी की शुरुआत धुआंधार अंदाज़ में ह्यूस्टन स्टेडियम से की है, दूसरी तरफ़ इमरान ख़ान न्यूयॉर्क में नेट प्रैक्सिट कर रहे हैं.
मोदी की ट्रंप से दूसरी मुलाक़ात अभी बाक़ी है जबकि इमरान ख़ान आज ट्रंप से मिलने वाले हैं.
देखना ये होगा कि ट्रंप "दि यूएसए लव्ज़ इंडिया" ट्वीट के बाद आज इमरान ख़ान से मुलाक़ात के बाद क्या ट्वीट करेंगे.
सबके अपने मुद्दे
भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों को कश्मीर के मुद्दे पर अमरीका की सख़्त ज़रूरत है.
भारत की पूरी कोशिश है कि कश्मीर का शब्द ट्रंप के किसी ट्वीट या बयान में न आए. उधर पाकिस्तान की पूरी कोशिश होगी कि ट्रंप से कम से कम ज़रूर एक बार यह कहलवा लें कि इंडिया-पाकिस्तान के बीच बिचौलिया बनने को अमरीका तैयार है.
मगर ट्रंप को दक्षिण एशिया की विकेट पर दोनों तरफ़ खड़े होकर रन बनाने हैं.
ट्रंप को 14 महीने बाद होने वाले चुनाव में डेमोक्रैट समर्थक 40 लाख भारतीय-अमरीकियों के अधिक से अधिक वोट भी तोड़ने हैं और अफ़ग़ानिस्तान से अपनी फ़ौज भी वापस बुलानी है.
भारत के साथ कारोबार भी बढ़ाना है और ईरान को कसने के लिए पाकिस्तान की ख़ामोश भी मदद भी चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र महासभा में मोदी की पूरी कोशिश होगी कि कश्मीर को भारत का अंदरूनी मामला कहकर आगे बढ़ लिया जाए. इमरान ख़ान मोदी के बाद तक़रीर करेंगे. उनकी पूरी कोशिश होगी कि कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय दिशा देने के लिए पूरा ज़ोर लगा दें.
ट्रंप की कोशिश ये होगी कि उनके भाषण में दक्षिण एशिया के संदर्भ में अधिक से अधिक ढाई जुमले आएं और फिर उनकी तक़रीर का रुख़ खाड़ी की टेंशन और ईरान की तरफ़ हो जाए.
असल मसला
मगर मुझे सबसे ज़्यादा दिलचस्पी इसमें है कि पर्यावरण के संकट से जूझ रही दुनिया के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की जो शिखर बैठक न्यूयॉर्क में हो रही है, उसमें भारत और पाकिस्तान अपने-अपने देशों को प्रदूषण से बचाने और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अहम बात या सुझाव आगे लाते हैं या नहीं.
इंडिया और पाकिस्तान को अगले 10-20 वर्ष में दुश्मनी निभानी है तो इसके लिए ज़रूरी है कि वे पर्यावरण के मामले में एक-दूसरे की मदद करें. वरना जब दुनिया की आंखों में ही पानी नहीं बचेगा तो कश्मीर भी नहीं रहेगा.
मालूम नहीं, मोदी और इमरान ख़ान ने टाइटैनिक मूवी देखी है या नहीं.
इसके आख़िरी सीन में ऑर्केस्ट्रा म्यूज़िक बजा रहा है और टाइटैनिक डूब रहा है. और फिर, टाइटैनिक के साथ संगीत मंडली भी डूब जाती है.
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