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जस्टिन ट्रूडो की 'काले चेहरे' वाली तस्वीरें कहीं उनकी छवि पर दाग़ ना छोड़ जाएं
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की कुछ पुरानी तस्वीरें और वीडियो चर्चा में हैं. ट्रूडो की इन तस्वीरों पर चर्चा से ज़्यादा विवाद है. ये तस्वीरें अलग-अलग जगह की हैं, जिनमें वो चेहरे पर काला रंग लगाए हुए नज़र आ रहे हैं.
चेहरे पर काला रंग लगी हुई इन काफी पुरानी तस्वीरों के लिए ट्रूडो ने माफ़ी मांगी है.
चेहरे पर काले रंग का मेकअप लगाने पर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि उन्हें इसके लिए ख़ेद है. एक टीवी चैनल को दिए अपने साक्षात्कार में ट्रूडो ने ख़ेद जताते हुए कहा कि उन्हें यह जानना चाहिए था कि नस्लवादी इतिहास के कारण काले रंग का मेकअप लगाना अस्वीकार्य था. उन्होंने कहा कि उन्होंने लोगों का दिल दुखाया इसके लिए वो माफ़ी मांगते हैं.
अगले महीने होने वाले आम चुनाव से पहले इन तस्वीरों और वीडियो के सामने आने के बाद ट्रूडो को दबाव का सामना करना पड़ रहा है.
ये तस्वीरें इसलिए चर्चा में ज़्यादा हैं क्योंकि कनाडा में अक्टूबर में चुनाव होने वाले हैं.
कनाडा के प्रधानमंत्री के लिए ये तस्वीरें इसलिए भी अशोभनीय हैं क्योंकि वो ख़ुद को सामाजिक न्याय, समावेशिता और विविधता का हीरो बताते आए हैं.
जब साल 2015 में उनकी सरकार ने शपथ ली थी तो उनकी कैबिनेट में शपथ लेनी वाली क़रीब आधी संख्या महिलाओं की थी, तीन सिख थे और दो वहां के मूल निवासी थे.
इन नई तस्वीरों में है क्या?
गुरुवार की रात ट्रूडो का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वो सफ़ेद टी-शर्ट और एक जींस में थे. उनका चेहरा और उनके हाथ-पैर काले रंग में पुते हुए हैं.
ये फ़ुटेज साल 1990 का है. जिसमें वो हंस-हंसकर अपने हाथों को हवा में लहरा-लहराकर चेहरे बनाते हुए नज़र आ रहे हैं. ट्रूडो उस समय अनुमानत: बीस साल के रहे होंगे.
ब्लैकफ़ेस जोकि बीते दिनों बहुत प्रचलन में था. ख़ासतौर पर मनोरंजन उद्योग में.
तीन मामले जिसमें ट्रूडो काले चेहरे के साथ नज़र आ रहे हैं
- पहली तस्वीर साल 2011 की है जब वो क़रीब 29 साल के रहे होंगे और वो वैंकुवर के एक स्कूल में पढ़ाते थे.
- दूसरी तस्वीर एक टैलेंट शो के दौरान के एक परफ़ॉर्मेंस की है.
- तीसरा एक वीडियो हो जो साल 1990 के दौरान का है.
ट्रूडो की प्रतिक्रिया
गुरुवार से पहले भी ट्रूडो की तस्वीरें सामने आई थीं जिसके बाद उन्होंने माफ़ी मांगी थी.
लेकिन विनिपेग में दूसरी बार उन्होंने सबके सामने इन तस्वीरों और वीडियो को अपनी भूल बताते हुए माफ़ी मांगी.
वहीं ट्रूडो ने अपने एक बयान में कहा,"मैंने जो कुछ किया उससे उन लोगों को चोट पहुंची है जिन्हें उनकी पहचान की वजह से असहिष्णुता और भेदभाव का सामना नहीं कराया जाना चाहिए था. यह एक ऐसी चीज़ है जिसका मुझे बेहद अफ़सोस है. किसी भी संदर्भ या परिस्थितियों में अपने चेहरे को काले रंग से रंगना अस्वीकार्य है. क्योंकि 'ब्लैकफ़ेस' के पीछे एक नस्लवादी इतिहास रहा है. मुझे यह तभी समझना चाहिए था और मुझे कभी ऐसा नहीं करना चाहिए था."
कनाडा में क्या है लोगों की प्रतिक्रिया ?
कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सज्जन ने सीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि ट्रूडो ने जो कुछ भी किया वो निश्चित तौर पर ग़लत था लेकिन उनकी नीतियां विविधता को प्रसारित करने वाली हैं.
लिबरल पार्टी सांसद ओमर अलघाबरा ने सीबीसी से बातचीत में कहा कि ट्रूडो की इन तस्वीरों को देखकर उन्हें झटका लगा.
वहीं विपक्ष के नेता अंड्रयू शीर ने उन्हें बर्ख़ास्त किये जाने की मांग की है क्योंकि उनकी माफ़ी सच्ची नहीं है.
उन्होंने कहा, "जब उनसे ख़ास तौर पर पूछा गया था कि क्या ऐसे दूसरे उदाहरण भी हैं तो उन्होंने कहा था कि ये केवल एक घटना थी और अब हम जानते हैं कि ऐसी एक नहीं तीन-तीन तस्वीरें हैं."
न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह पहले ही इन तस्वीरों को परेसानी करने वाली और अपमानजनक बता चुके हैं.
हालांकि लोगों में इन तस्वीरों को लेकर मिली-जुली राय है.
कुछ लोगों का जहां कहना है कि उन्हें इन बातों से फ़र्क नहीं पड़ता है वहीं कुछ लोगों ने इसे बेहद अपमानजनक बताया है.