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मोदी-पुतिन के बीच हुए समझौते के केंद्र में रुस का व्लादिवोस्तक क्यों है
रूस की दो दिवसीय दौर पर व्लादिवोस्तक पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच कई समझौते हुए.
ज़्वेद्दा जहाज-निर्माण परिसर में एक जहाज पर हुई बैठक के बाद दोनों नेताओं ने एक साझा प्रेस वार्ता की जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि रूस के साथ कई समझौते हुए हैं.
मोदी ने क्या क्या कहा:
- 2001 में जब यह समिट पहली बार रूस में हुआ था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में मैं बतौर गुजरात का मुख्यमंत्री भारतीय प्रतिनिधिमंडल में यहां आया था. तब से अब तक दोनों देशों के बीच सहयोग और दोस्ती सफ़र तेज़ी से आगे बढ़ा है. मैं और राष्ट्रपति पुतिन इस रिश्ते को सहयोग की नई ऊंचाइयों तक ले गए हैं.
- दोनों देशों के बीच दर्जनों व्यापारिक समझौते हुए. रक्षा जैसे क्षेत्र में रूसी उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स भारत में दोनों देशों के संयुक्त उपक्रम द्वारा बनाने के लिए आज हुआ समझौता उद्योग को बढ़ावा देगा.
- भारत और रूस के बीच रक्षा, कृषि, पर्यटन, व्यापार के साथ अंतरिक्ष कार्यक्रम में भी सहयोग लगातार आगे बढ़ रहा है.
- रूस के सहयोग से भारत में न्यूक्लियर प्लांट विकसित करने पर भागीदारी बढ़ रही है.
- ईस्टर्न इकोनॉमी फोरम के साथ भारत को नज़दीक से जोड़ने की जितनी भी प्रशंसा की जाए वो कम है. कोयला, हीरा, खनन, कृषि, रेयर अर्थ, टिम्बर, पल्प ऐंड पेपर और पर्यटन में नई संभावनाएं उजागर हुई हैं. इन दोनों क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए चेन्नई और व्लादिवस्तोक के बीच मेरिटाइम रूट का प्रस्ताव भी किया गया है.
- दोनों देशों के बीच एक दूसरे के हाइड्रो कार्बन क्षेत्र में निवेश है. इसमें सहयोग के लिए पांच साल का रोडमैप और फार ईस्ट और आर्कटिक में हाइड्रो कार्बन व एलएनजी की खोज पर सहमति हुई है.
- मोदी ने इस दौरान अफ़ग़ानिस्तान पर कहा कि दोनों देश किसी देश के आंतरिक मसले में बाहरी दखल के ख़िलाफ़ हैं और भारत ऐसा अफ़ग़ानिस्तान देखना चाहता है जो स्वतंत्र, सुरक्षित, शांत और लोकतांत्रिक हो.
- स्पेस में सहयोगः गगनयान के लिए भारतीय अंतरिक्ष यात्री रूस में ट्रेनिंग करेंगे.
- अगले साल भारत और रूस के बीच बाघों के संरक्षण पर उच्च स्तरीय फोरम का आयोजन करने पर सहमति बनी है.
व्लादिवोस्तक: रूस का वो शहर जहां मोदी पहुंचे हैं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा का केंद्र इस बार रूस का शहर व्लादिवोस्तक है.
व्लादिवोस्तक एक बंदरगाह शहर है, जो प्राइमरी क्षेत्र और सुदूर पूर्व के संघीय ज़िले का प्रशासनिक, सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र है. ये रूस के दक्षिण-पूर्वी इलाके में गोल्डन हॉर्न खाड़ी के पास स्थित है.
यह सुदूर पूर्व का सबसे बड़ा शैक्षणिक और वैज्ञानिक केंद्र हैं. इस शहर में फार ईस्टर्न फेडरल यूनिवर्सिटी और रूसी विज्ञान अकादमी की शाखा है.
ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम की वेबसाइट के अनुसार रूस की राजधानी मास्को से 9,258 किलोमीटर दूर स्थित इस शहर की आबादी 2018 में 6 लाख से ज़्यादा थी.
समय के साथ साथ बदलता रहा व्लादिवोस्तक
साइबेरियाई रेलवे के अंतिम स्टेशन व्लादिवोस्तक पहुंचने में ट्रेन से सात दिन लगते हैं. हालांकि इस शहर का इतिहास 159 साल पुराना है.
जून 1860 में, रूस और चीन के बीच आइगुन की संधि के बाद जापान सागर की गोल्डर्न हॉर्न खाड़ी के द्वीप पर रूसी सेना तैनात की गई और इसे व्लादिवोस्तक का नाम दिया गया.
मई 1890 में लगभग साढ़े सात हज़ार की आबादी वाले व्लादिवोस्तक को शहर का दर्जा मिला.
1899 में यहां ईस्टर्न इंस्टिट्यूट खोला गया. 20वीं शताब्दी के आते-आते ये छोटा शहर रूस और समूचे सुदूर पूर्व इलाके के लिए एक महत्वपूर्ण बंदरगाह और नौसैनिक अड्डा बन गया.
सोवियत संघ में व्लादिवोस्तक शहर सुदूर पूर्व का सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और औद्योगिक केंद्र बन गया.
ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम की वेबसाइट के अनुसार इस दौरान शहर में मशीनरी निर्माण, जहाज बनाने और मरम्मत, निर्माण सामग्री के उत्पादन, मछली पकड़ने के उपकरण, भोजन, उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण और लकड़ी के काम करने वाले उद्योग भी फले-फूले.
व्लादिवोस्तक से निर्यात किए जाने वाले उत्पादों में पेट्रोलियम, कोयला और अनाज हैं. वहीं यहां कपड़े, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल मुख्य रूप से आयात किए जाते हैं.
इस बंदरगाह शहर के एक बड़े हिस्से में मछली पकड़ने और पूरे देश में मछलियां पहुंचाने का काम किया जाता है.
शहर में तीन थिएटर, दो संग्रहालय और एक आर्ट गैलरी भी है. व्लादिवोस्तक आधुनिक जीवन के साथ अतीत की विशेषताओं को भी अपने में समेटता है.
यहां विभिन्न स्थापत्य शैलियां पश्चिम और पूर्व दोनों संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करती हैं. इस शहर में 30 से अधिक संग्रहालय भी हैं.
सिंतबर 2012 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 20 देशों से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों की एपीईसी बिजनेस समिट यहां के रस्की द्वीप पर आयोजित हुई थी.
इसी वर्ष अप्रैल में पुतिन ने इसी शहर पर उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन से भी मुलाक़ात की थी.
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