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कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र बैठक: भारत-पाक का कितना नफ़ा- नुक़सान?
- Author, राकेश सूद
- पदनाम, पूर्व राजनयिक, बीबीसी हिंदी के लिए
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर भारत प्रशासित कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर आपत्ति जताई है.
इस मुद्दे पर सुरक्षा परिषद एक तरह से बंद कमरे में शुक्रवार अनौपचारिक बैठक करने जा रहा है. यह बैठक ऐसी होती है जिसका ना ही कोई रिकॉर्ड रखा जाएगा और न ही उसमें दिए गए किसी बयान को रिकॉर्ड किया जाएगा.
यह ऐसी बैठक होगी जिसमें न ही पाकिस्तान की कोई नुमाइंदगी होगी और न ही भारत की ओर से कोई नुमाइंदा शामिल होगा.
भारत को कैसे पता चलेगा
पर सबसे अहम सवाल ये है कि बंद कमरे में होने वाली बैठक में क्या कहा जाएगा इसके बारे में भारत को कैसे पता चलेगा? तो भारत इसके लिए अपने मित्र देशों पर निर्भर है.
भारत ने जम्मू-कश्मीर से जब से अनुच्छेद 370 हटाया है तब से कई मित्र देशों ने इसे भारत का अंदरूनी मसला बताया है. तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हो रही बैठक के लिए भारत भी इन्हीं देशों पर निर्भर है.
इस बैठक में शामिल भारत के मित्र देश उसे बाहर आकर इस बैठक के बारे में बताएंगे.
चीन ने बैठक आयोजित कराई?
हम सब ही जानते हैं कि पाकिस्तान और चीन के बीच बेहद पुराने और घनिष्ठ रिश्ते हैं. चीन ने पाकिस्तान की रक्षा, परमाणु और मिसाइल क्षेत्र में मदद की है. अब चीन पाकिस्तान में निवेश करके आर्थिक रूप से उसकी मदद कर रहा है.
इस तरह से समझा जा सकता है कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के लिए कश्मीर मुद्दे पर बैठक बुलाने में मदद की होगी. इसी तरह अभी पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी चीन गए थे तो उन्होंने इस बैठक के लिए मदद भी मांगी होगी.
इसके अलावा भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी एक सप्ताह पहले चीन की यात्रा पर थे. मैं दावे से नहीं कह सकता लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग अक्तूबर में भारत आ सकते हैं.
तो मेरा मानना है कि चीन ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर को बताया होगा कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में क्या करने जा रहा है ताकि भारत को पहले से विश्वास में ले ले.
चीन की इस समय भारत के साथ जो कूटनीति चल रही है वह उसे ख़तरे में नहीं डालना चाहता है. साथ ही वह पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते ख़तरे में नहीं डालना चाहता है. वह दोनों ही देशों के साथ अपने रिश्ते अच्छे रखना चाहता है.
बैठक को लेकर भारत क्यों है संतुष्ट?
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना भारत का अंदरूनी मामला है. अगर उस पर किसी को कोई दिक्कत हो तो इसको सुप्रीम कोर्ट सुनेगा. अनुच्छेद 370 और धारा 35-ए को हटाने के लिए संसद से क़ानून को पास करवाया गया है. इसका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कोई लेना देना नहीं है.
पाकिस्तान का मुद्दा यह है कि वह दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन हो रहा है. पाकिस्तान ने कई तर्कों के आधार पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है जिनमें एक वैध तर्क संचार साधनों का ठप्प होना है इसके अलावा उसके पास कोई तर्क नहीं है.
नब्बे के दशक में कश्मीर में चरमपंथ बढ़ने के बाद से पाकिस्तान ने इस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करना चाहा है. उसने कई दफ़ा कहा है कि यह द्विपक्षीय नहीं बल्कि बहुपक्षीय मुद्दा है.
इस बैठक के बाद कुछ नया नहीं होने वाला है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र इस मुद्दे को नहीं छेड़ना चाह रहा था क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की अपनी कोई भूमिका नहीं है. संयुक्त राष्ट्र अपने निर्णय ख़ुद नहीं लेता है बल्कि यह निर्णय उसके सदस्य देश लेते हैं.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद या आमसभा की बात करें तो सभी निर्णय सदस्य देशों की आम सहमति से होते है. संयुक्त राष्ट्र कोई स्वतंत्र संस्था नहीं है बल्कि यह अंतर सरकारी संस्था है.
संयुक्त राष्ट्र आमसभा जल्द ही होने वाली है. इसमें पाकिस्तान का कोई भी नुमाइंदा हो वह कश्मीर का मुद्दा ज़रूर उठाएगा लेकिन ऐसा भी है तब तक कश्मीर में हालात सामान्य हो जाएं.
लेकिन पाकिस्तान आमसभा में क्या कहेगा इसका अभी से अनुमान लगाना जल्दबाज़ी होगी.
(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)
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