अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान का हमला, 14 की मौत

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अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक पुलिस स्टेशन के बाहर हुए ज़ोरदार बम धमाके में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और करीब 150 लोग घायल हैं.
धमाके के बाद आसमान में काले धुंए का गुबार उठता देखा गया और आस-पास की इमारतें मलबे में तब्दील हो गईं. घायल लोगों में ज़्यादातर आम नागरिक हैं.
हमले की ज़िम्मेदारी तालिबान ने ली है.
ये हमला ऐसे वक्त में हुआ है, जब तालिबान और अमरीका के बीच शांति वार्ता चल रही है. इस वार्ता का मकसद करीब 18 साल से जारी संघर्ष को ख़त्म करना है. दोनों ही पक्षों का कहना है कि बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई है.
अफ़ग़ानिस्तान के गृह मंत्रालय ने बताया कि हमले में एक कार बम का इस्तेमाल किया गया, लेकिन तालिबान का कहना है कि उन्होंने एक ट्रक बम से विस्फोट किया था. जो कि ज़्यादा खतरनाक था.
तालिबान ने ये भी दावा किया है कि उन्होंने "भर्ती" केंद्र को निशाना बनाया, जिसमें पुलिसकर्मी और सैनिक बड़ी संख्या में मारे गए.
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता नसरत रहीमी ने कहा कि विस्फोटक से भरी गाड़ी को पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद चेक प्वाइंट पर रोकने की कोशिश की गई थी. लेकिन जिस वक्त तलाशी ली जा रही थी, ठीक उसी वक्त धमाका हो गया.
एक चश्मदीद ने बीबीसी को बताया, "मैं इलाके से गुज़र रहा था, तभी मैंने ज़ोरदार आवाज़ सुनी और मेरी कार हिलने लगी. इसके बाद मैंने देखा कि पास की दुकानों के शीशे टूट गए हैं."

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तालिबान और अमरीका के बीच बातचीत के दौर में पूरे देश में हमले बढ़े हैं.
सिर्फ़ पिछले महीने ही करीब 15 सौ लोग या तो मारे गए या घायल हुए. मंगलवार को भी काबुल में एक बम धमाका हुआ था. जिसमें काउंटर-नारकोटिक्स निदेशालय के कर्मचारियों को ले जा रहे एक वाहन को निशाना बनाया गया. इस हमले में पांच लोगों की मौत हो गई थी और सात घायल हुए थे.
तालिबान ने देश में 28 सितंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनावों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है. और कहा है कि वो चुनावी रैलियों पर भी हमला करेंगे.
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अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ गनी के एक प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बुधवार को कहा, "तालिबान के लगातार होते हमलों से ये समझ आता है कि वो शांति कायम करने को लेकर बिल्कुल प्रतिबद्ध नहीं हैं. कोई भी तालिबानी हमला शांति वार्ता को नुकसान पहुंचाएगा."
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