हिंदुस्तान की स्वच्छता वाली झाड़ू पाकिस्तान में कितनी चलेगी?

कराची

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    • Author, वुसअतुल्लाह ख़ान
    • पदनाम, पाकिस्तान से, बीबीसी हिंदी के लिए

आज मैं आपको पाकिस्तान के मुंबई यानी अपने कराची के बारे में कुछ बताना चाहता हूं. जब 73 वर्ष पहले विभाजन हुआ तब कराची की आबादी साढ़े तीन लाख थी आज लगभग ढाई करोड़ है.

तब यह शहर इंडिया का सबसे साफ नगर माना जाता था, आज पाकिस्तान का सबसे गंदा शहर है.

यहां रोज़ाना 15 हज़ार टन कचरा पैदा होता है. इसमें से आधा तो उठा लिया जाता है, आधा सड़कों और गलियों में ही घूमता रहता है.

50 वर्ष पहले तक कराची से गुज़रकर समुद्र में मिलने वाले 24-25 छोटे बड़े नालों में पानी इतना साफ था कि हम मछलियां पकड़ते थे.

आज इन नालों में कचरा जमा होकर इतना सख्त हो चुका है कि आप कई जगह पर इसमें एक तरफ से दूसरी तरफ तक पैदल जा सकते हैं.

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तीन पार्टियां, तीनों में अनबन

कराची पाकिस्तान का सबसे ज़्यादा यानी 50 प्रतिशत टैक्स जमा करके देने वाला शहर, मगर सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ शहर है.

वजह यह है कि केंद्र में एक और पार्टी की सरकार है. राज्य में एक और पार्टी और कराची की नगरपालिकाओं में किसी और पार्टी का राज. तीनों की ना बनती है ना छनती है.

केंद्र में बनी इमरान ख़ान की सरकार ने कल से स्वच्छ कराची अभियान शुरू किया है. दावा यह है कि अगले दो हफ़्ते में शहर के सभी बरसाती नालों को साफ कर दिया जाएगा.

मगर पीपल्स पार्टी वाली सिंध सरकार इस अभियान का स्वागत करने की बजाय इस अभियान को अपने ख़िलाफ़ केंद्र की एक और साजिश समझ रही है.

जिसका मक़सद पार्टी के महामहोदय आसिफ ज़रदारी को गिरफ़्तार करने के बाद अब कचरा साफ करने के बहाने राज्य सरकार की सफाई है.

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सारी दुनिया में शहर की सफाई नगरपालिकाओं की ज़िम्मेदारी समझी जाती है. मगर कराची का कचरा क्योंकि ऊपर से नीचे तक सभी साफ करना चाहते हैं, इसलिए कोई भी नहीं कर पा रहा.

रही बात हमारी यानी जनता की तो हम तो इतने आलसी हैं कि एक टर्किश कंपनी को लाहौर और एक चीनी कंपनी को कराची का कचरा उठाने का काम ठेके पर दिया गया.

काम इतना ज़्यादा था कि वो अपने पैसे छोड़कर भाग गए. इन बाहरी कंपनियों को यह बात समझ में ही नहीं आई कि जब हम रोज़ाना गली-गली कचरा जमा करने के बड़े-बड़े डिब्बे रख जाते हैं तो भी लोग डिब्बे में कचरा डालने की बजाय डिब्बे के आसपास क्यों डाल जाते हैं.

जितना बड़ा मसला कराची को कचरे से मुक़्त करना है उससे भी बड़ा मसला यह है कि नागरिकों को कौन समझाए कि भैया तुम्हारा घर सिर्फ 100 फ़ुट की चारदीवारी के अंदर ही नहीं बल्कि सामने की सड़क या गली भी तुम्हारे ही घर का हिस्सा है. इसलिए भी अपना दालान समझकर साफ रखा करो.

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मगर यह जागरुकता तभी पैदा हो सकती है जब शहर वालों को पूरा भरोसा हो कि सरकारी और राजनीतिक कर्मचारी झाड़ू सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए नहीं पकड़े हुए हैं बल्की यह झाड़ू फोटो खिंचवाने के बाद भी चलती रहेगी.

अरे याद आया, आपके यहां स्वच्छ भारत अभियान कैसा जा रहा है?

झाड़ू अभी चल रही है या अभियान पर ही फिर गई?

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