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पाकिस्तान में जिस पर अन्याय के आरोप, वो अब न्याय के पुरोधाः वुसअत का ब्लॉग
- Author, वुसअतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, इस्लामाबाद से, बीबीसी हिंदी के लिए
इंग्लैंड जीता या न्यूज़ीलैंड हारा, हमें इससे क्या? इस पर हमें कुछ नहीं कहना. बस एक ज़िंदा कहानी सुन लीजिए.
पर कहानी में हमारे लिए तो कुछ ख़ास नहीं, हो सकता है आपके लिए हो.
सिंध का एक ज़िला है घोटकी, वहां अभी भी सामंतवाद का राज है.
कोई भी छोटा-बड़ा राजनीतिक गुट हो, यहां के सरदारों और जागीरदारों के आशीर्वाद या समर्थन के बिना इस इलाक़े में एक क़दम नहीं चल सकता.
घोटकी में बीसियों छोटे, मगर दो बड़े क़बीले हैं- माहर और लोंध. उनके आपसी झगड़े भी बहुत हैं.
लेकिन सरदार प्रजा की क़िस्मत के फ़ैसले जैसे पहले करते थे, आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी करते हैं.
इनमें से बहुत से सरदारज़ादे अच्छे-अच्छे स्कूलों और यूनिवर्सिटियों से पढ़े हुए हैं, लेकिन जब अपने इलाक़े में होते हैं तो सदियों पुराने नियमों का ही पालन करते हैं.
इन्हीं में से एक युवा सरदार इफ़्तिख़ार लुंद भी हैं. वो अंग्रेज़ों के बनाए लॉरेंस कॉलेज और फिर खैरपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट भी हैं.
इमरान ख़ान की तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के प्रांतीय उपाध्यक्ष भी रहे. पिछले चुनाव में विधान सभा के उम्मीदवार भी थे. अंग्रेज़ी भी अच्छी ख़ासी बोल लेते हैं.
तीन महीने पहले घोटकी के थाने में एक ड्राइवर अल्लाह रखियो की तरफ़ से ये पर्चा कटवाया गया, कि मुझे इफ़्तिख़ार लुंद साहब और उनके मैनेजर ने अग़वा करवाया, क्योंकि मुझे उनके मैनेजर को कुछ पैसे वापस करने थे.
"अपहरण के बाद मुझे बंगले पर ले जाकर मारा पीटा गया और मेरे पिछवाड़े में लोहे का सरिया घुसा दिया गया."
सिंधी टीवी चैनल्स और सोशल मीडिया पर इस ड्राइवर की वीडियो वायरल हो गई, जिसमें उन्हें अस्पताल के स्ट्रेचर पर ओंधे मुंह लेटे देखा जा सकता है.
दो दिन ट्विटर पर हैशटैग जस्टिस फॉर अल्लाह रखियो भी गर्म रहा. उनके सीने में आठ टांके लगे.
घोटकी के सेशन जज ने इफ़्तिख़ार लुंद और उनके मुलाज़िमों की गिरफ्तारी का हुक्म दिया, लेकिन पुलिस ने अबतक आदेश का पालन नहीं किया.
इफ़्तिख़ार लुंद का बयान है कि मुझे इस वाक्ये में ऐसे ही घसीटा गया है. अगर मेरे मैनेजर का अल्लाह रखियो से कोई झगड़ा या मारपीट हुई हो तो मुझे इसका कुछ नहीं पता.
लेकिन इफ़्तिख़ार लुंद के इस बयान के बावजूद उनके ख़िलाफ़ पर्चा अब भी थाने के रिकॉर्ड में है.
आप सोच रहे होंगे कि इस कहानी में ख़ास क्या है, मैं भी यही सोच रहा हूं. लेकिन आगे क्या हुआ ये भी सुन लीजिए.
अब से पांच दिन पहले मानवाधिकारों की केंद्रीय मंत्री डॉ शिरीन मज़ारी के दफ्तर से एक हुक्म जारी हुआ कि इफ़्तिख़ार लुंद को सिंध प्रांत के लिए मानवाधिकारों का फोकल पर्सन नियुक्त किया गया है.
यानी वो प्रांत में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर नज़र रखेंगे और उपाय भी ढूंढेंगे.
इसके बाद मानवाधिकारों से संबंधित संसद में सिनेट की स्टैंडिंग कमेटी ने इस नियुक्ति की कड़ी निंदा की.
लेकिन मंत्रालय का कहना है कि जबतक इफ़्तिख़ार लुंद पर ड्राइवर अल्लाह रखियो से मानवीय सलूक का इल्ज़ाम साबित नहीं हो जाता, वो निर्दोष ही हैं.
सिर्फ़ किसी आरोप के आधार पर उन्हें मानवाधिकारों का फोकल पर्सन ना बनाना, इफ़्तिख़ार लुंद के साथ राजनीतिक अन्याय होगा.
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