कौन है दक्षिण कोरिया छोड़ उत्तर कोरिया भागने वाला शख़्स

चो इन-गुक

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एक अनोखे और दुर्लभ मामले में एक शख़्स दक्षिण कोरिया छोड़कर उत्तर कोरिया चला गया है.

ख़ास बात यह है कि 1980 के दशक के आख़िरी में इस शख़्स के दक्षिण कोरियाई माता-पिता भी उत्तर कोरिया जाकर बस गए थे.

उत्तर कोरिया जाने वाले शख़्स का नाम चो इन-गुक है जो दक्षिण कोरिया के पूर्व विदेश मंत्री के बेटे हैं.

उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के मुताबिक चो इन-गुक अब उत्तर में ही रहेंगे और कोरिया के एकीकरण से जुड़े मामलों पर काम करेंगे.

आमतौर पर उत्तर कोरिया के लोग भागकर दक्षिण कोरिया आते हैं मगर दक्षिण से उत्तर कोरिया जाने का यह मामला दुर्लभ है.

किम जोंग उन

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इमेज कैप्शन, अमूमन लोग किम जोंग-उन के देश से भागकर दक्षिण कोरिया आते हैं

बिना इजाज़त गए उत्तर कोरिया

उत्तर और दक्षिण कोरिया तकनीकी रूप से अब भी युद्धरत हैं. ऐसे में दक्षिण कोरियाई नागरिकों को उत्तर कोरिया जाने के लिए सरकार से इजाज़त लेनी पड़ती है.

दक्षिण कोरिया के एकीरण मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि चो इन-गुक ने उत्तर कोरिया की यात्रा की इजाज़त नहीं ली थी.

देश की राजधानी सोल में मौजूद 'एनके न्यूज़' के ऑलिवर हॉथम ने बीबीसी को बताया, "अभी तक यह यह पता नहीं चल पाया है कि चो इन-गुक कैसे देश छोड़कर उत्तर कोरिया पहुंचे. लेकिन किसी दक्षिण कोरियाई को अगर उत्तर कोरियाई सत्ता का आशीर्वाद प्राप्त हो तो चीन की यात्रा करते हुए ऐसा करना मुश्किल नहीं है."

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर चो ने सरकार से इजाज़त न लेकर क़ानून तोड़ा है तो भविष्य में दक्षिण कोरिया लौटने पर उन्हें गिरफ़्तार किया ज सकता है.

कोरिया

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इमेज कैप्शन, उत्तर और दक्षिण कोरिया दोनों ही एकीकरण की बात करते हैं

कौन हैं चो इन-गुक?

चो 73 साल के दक्षिण कोरियाई नागरिक हैं मगर उनके निजी और राजनीतिक विचारों के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है. उनकी पत्नी और बेटी हैं दक्षिण कोरिया में ही रहती हैं.

हालांकि, चो के माता-पिता वे हाई प्रोफ़ाइल दक्षिण कोरियाई नागरिक थे जो कोरियाई युद्ध के बाद अपना देश छोड़कर उत्तर कोरिया चले गए थे.

उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने चो इन-गुक के प्योंगयांग पहुंचने की ख़बर रिपोर्ट की है जिसमें उत्तर कोरियाई अधिकारियों द्वारा उनका स्वागत करते हुए दिखाया गया है.

उत्तर कोरिया की प्रोपगैंडा वेबसाइट 'Uriminzokkiri'में उनके हवाले से लिखा गया है, "जिस देश के प्रति मैं आभार महसूस करता हूं, वहां रहना मेरे लिए अपने माता-पिता की आख़िरी इच्छा का सम्मान करने जैसा है."

"इसीलिए मैंने देर से ही सही, हमेशा के लिए उत्तर कोरिया में रहने का फ़ैसला किया है."

दक्षिण कोरियाई मीडिया के मुताबिक़ चो के लिए दक्षिण कोरिया में जीवन आसान नहीं रहा और उन्हें "देशद्रोही के बेटे" के लांछन का सामना करना पड़ा.

बताया जा रहा है कि उन्हें कई बार नौकरियां बदलनी पड़ीं और उत्तर कोरिया से उनकी मां की ओर से आने वाले पैसे पर जीवन बिताना पड़ा. उनकी मां की 2016 में मौत हो गई थी.

हाल के सालों में चो कई बार उत्तर कोरिया गए थे और अपनी मां के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा लिया था.

कोरिया

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कौन थे उनके माता-पिता

चो इन-गुक के पिता चो तोक-सिन 1960 के दशक में दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री रहे थे. 1970 में वह अमरीका के प्रवास पर रहे और दक्षिण कोरिया में सैन्य नेता पार्क चुंग-ही की सरकार की कट्टर आलोचना करते रहे.

एक दशक बाद, 1986 में उस वक्त वह सुर्खियों में आए जब वह अपनी पत्नी रयू मी-योंग के साथ उत्तर कोरिया चले गए. वे अपने पांच व्यस्क बच्चों को दक्षिण कोरिया में छोड़ गए थे.

नए देश में पति-पत्नी दोनों विशिष्ट राजनीतिक वर्ग में शामिल हो गए. चो तोक-सिन की 1989 में मौत हो गई और रयू मी-योंग ने अपने पति की जगह एक धार्मिक पंथ का नेतृत्व संभाव लिया. वह अन्य पदों पर भी रहीं.

इस परिवार के उत्तर कोरिया के नेतृत्व से पुराना नाता रहा है. जापानी राज के ख़िलाफ़ संघर्ष के दौरान चो इन-गुक के नाना उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल-सुंग के सलाहकार थे.

उत्तर कोरियाई सैनिक
इमेज कैप्शन, कई लोग, यहां तक कि सैनिक भी उत्तर कोरिया से भागकर दक्षिण कोरिया आने की कोशिश करते हैं

ऐसे मामले कितने होते हैं

कोरियाई प्रायद्वीप में देश बदलने के मामले अक्सर उत्तर से दक्षिण की ओर ही देखने को मिलते हैं. तानाशाही शासन से निकलकर लोग लोकतांत्रिक और संपन्न दक्षिण कोरिया में आकर बसते हैं. लेकिन इस तरह से देश छोड़कर भागना बहुत ख़तरनाक है.

दक्षिण कोरिया का कहना है कि 1953 में कोरियाई युद्ध के अंत के बाद से अब तक 30 हज़ार से अधिक उत्तर कोरियाई नागरिक ग़ैर-कानूनी ढंग से सीमा पार करके आए हैं.

दक्षिण कोरियाई आंकड़ों के मुताबिक़ हाल के सालों में ऐसा करने वालों की संख्या कम हुई है. 2011 में जहां 2,706 लोग उत्तर से दक्षिण कोरिया आए ते वहीं 2017 में यह संख्या 1,127 थी.

अधिकतर लोग चीन होते हुए देश छोड़ते हैं क्योंकि उत्तर कोरिया की सबसे ज़्यादा सीमा चीन के साथ लगती है. ऐसे में अन्य जगहों के मुक़ाबले यहां से होते हुए भागना आसान है क्योंकि दक्षिण कोरिया के साथ लगती सीमा पर बने असैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ) में कड़ी सुरक्षा है.

असैन्यीकृत ज़ोन दुनिया का सबसे ज़्यादा सैन्यीकृत इलाक़ा है

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चीन देश छोड़कर भागे इन लोगों को शरणार्थी के बजाय अवैध प्रवासी मानता है और अक्सर जबरन वापस उत्तर कोरिया भेज देता है.

दक्षिण कोरिया छोड़कर उत्तर कोरिया जा बसने के मामले बहुत ही दुर्लभ हैं और इममें भी अधिकतर वे लोग होते हैं जो पहले उत्तर कोरिया से दक्षिण कोरिया आते हैं और फिर से उत्तर कोरिया चले जाते हैं.

इस तरह से देश बदलने के मामले में 90 के दशक के बीच में उत्तर कोरिया में बड़े भीषण अकाल के दौरान अधिक देखे गए जिनमें हज़ारों लोग मारे गए थे.

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