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एवरेस्ट पर 'ट्रैफ़िक जाम', अब तक 10 मौतें
दुनिया की सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट को फ़तह करने की होड़ लगाने वालों की भीड़ की वजह से इस वहां 'ट्रैफ़िक जाम' की स्थिति पैदा हो गई है.
पर्वतारोही निर्मला पुरजा की ली गई एक तस्वीर के बाद पूरी दुनिया का इस ओर ध्यान गया. इस सीज़न में एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले 10 पर्वतारोहियों की मौत हो चुकी है, जिनमें चार भारतीय हैं.
सबसे ताज़ा मामला एक ब्रितानी नागरिक का है, जिसकी शनिवार को वापसी के दौरान मौत हो गई. इससे पहले शुक्रवार को आयरलैंड के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. उसने तिब्बत की ओर से चढ़ाई की थी.
इस हफ़्ते मरने वालों में भारत के चार, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया और अमरीका के एक-एक व्यक्ति हैं.
इस साल नेपाल ने प्रति परमिट 11,000 डॉलर के हिसाब से 381 परमिट जारी किये हैं, जिसके लिए उसकी आलोचना हो रही है.
सेवन समिट ट्रैक्स के चेयरमैन मिंगमा शेरपा के अनुसार, "इतनी भीड़ अक्सर रहती है और क़तार की वजह से पर्वतारोहियों को 20 मिनट से डेढ़ घंटे का इंतज़ार करना पड़ता है."
आम तौर पर चढ़ाई के लिए पर्वतारोहियों को साफ़ मौसम का इंतज़ार करना पड़ता है, क्योंकि वहां बहुत ख़राब मौसम होता है जो उनकी चढ़ाई में रुकावट डालता है.
स्थानीय गाइड के अनुसार, पर्वतारोहण के मौसम में अक्सर ऐसी लंबी क़तारें लग जाती हैं.
कितना ख़तनाक
मिंगमा शेरपा ने बीबीसी को बताया, "जब एक हफ़्ते तक साफ़ मौसम होता है तो भीड़ नहीं होती है, लेकिन जब ये समय दो या तीन दिन का होता है तो भीड़ बढ़ जाती है."
साल 2012 में भी जर्मनी के पर्वतारोही राल्फ़ दुज्मोवित्स की खींची गई तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें पर्वतारोहियों की लंबी क़तार दिखती है.
राल्फ़ का कहना है कि क़तार लग जाना ख़तरनाक़ है, "इंतज़ार के दौरान ऑक्सीजन ख़त्म होने का ख़तरा होता है और वापसी में ऑक्सीजन न होने की स्थिति पैदा हो जाती है."
1992 में वो एवरेस्ट गए थे, "लौटते समय मेरी ऑक्सीजन ख़त्म हो गई थी, उस समय ऐसा लगा था जैसे कोई लकड़ी के हथौड़े से चोट कर रहा है."
वो बताते हैं कि वो सौभाग्यशाली थे कि किसी तरह वो सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच गए. राल्फ़ ने कहा, "जब हवा 15 किमी/घंटे की रफ़्तार से चल रही हो तो बिना ऑक्सीजन काम नहीं चल सकता...आपके शरीर का तापमान बहुत गिर जाता है."
तीन बार एवरेस्ट फ़तह करने वाली माया शेरपा का कहना है कि रास्ते में ऑक्सीजन सिलेंडर चोरी भी हो जाता है, "ये किसी को मार डालने से कम नहीं है."
एवरेस्ट पर क्यों जाम लग जाता है?
हाल के सालों में यहां भीड़ बढ़ रही है, क्योंकि पर्वतारोहण काफ़ी लोकप्रिय हो गया है.
साल 2016 में एवरेस्ट की चोटी छूने वाली एंड्री उर्सिना का कहना है कि नौसिखिए पर्वतारोहियो के चलते जाम लग जाता है.
उर्सिना के पति नोर्बू शेरपा माउंटेन गाइड हैं और एक पर्वतारोही से उनका विवाद हो गया क्योंकि 8,600 मीटर की ऊंचाई पर पूरी तरह पस्त हो चुके उस पर्वतारोही ने आगे जाने की ठान ली थी.
ऐसे में सहयोग कर रहे शेरपाओं की ज़िंदगी भी ख़तरे में पड़ जाती है.
नोर्बू शेरपा का कहना है कि नेपाल की तरफ़ से चढ़ाई काफ़ी भीड़ भाड़ वाली है जबकि तिब्बत की ओर से बहुत कम लोग जा पाते हैं क्योंकि चीनी सरकार बहुत कम पास जारी करती है.
क़तार लगने का सबसे बड़ा कारण नेपाल की ओर से चोटी से पहले का पतला रास्ता है, जहां केवल एक रस्सी है.
जाम तब और बढ़ जाता है वापसी लोगों की भी क़तार होती है. वो कहते हैं कि 'इसी एक रस्सी पर सभी लटके रहते हैं.' उनके अनुसार, चढ़ाई का सबसे ख़तरनाक हिस्सा वापसी है.
रॉल्स का कहना है, "उतरना काफ़ी ख़तरनाक़ होता है और मैंने पिछले सालों में कई दोस्तों को खोया है. अधिकांश हादसे इसी दौरान होते हैं क्योंकि लंबी चढ़ाई के बाद उनका ध्यान केंद्रित नहीं रह पाता."
पर्वतारोहण से पहले शारीरिक फ़िटनेस रखना एक और चुनौती है ताकि ऊंचाई पर मौसम के हिसाब से शरीर खुद को ढाल सके.
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