क्या चीनी लड़के देह व्यापार के लिए पाकिस्तानी लड़कियों से कर रहे शादी?

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- Author, सहर बलोच
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, लाहौर
संयुक्त राष्ट्र और ग़ैर-सरकारी संगठन ह्युमन राइट्स वॉच ने हाल में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिनमें पाकिस्तान से लड़कियों को चीन ले जाने की घटनाओं पर चिंता ज़ाहिर की गई थी.
इस रिपोर्ट के मुताबिक़, पाकिस्तान में सामने आए ये मामले एशिया के पांच और देशों से मिलते-जुलते हैं.
इसी हवाले से पाकिस्तान में मानवाधिकारों पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछले एक साल से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में चीनी लोग शादी के लिए आ रहे हैं और लड़कियों को शादी करके चीन ले जा रहे हैं जिसका मक़सद वैवाहिक संबंध क़ायम करना नहीं है बल्कि कथित तौर पर ये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देह व्यापार का एक अहम ज़रिया है.
इस सिलसिले में बीबीसी ने फ़ैसलाबाद में एक ऐसी लड़की से बात की जिसकी एक चीनी लड़के से शादी करा दी गई. उन्होंने हमें क्या बताया, जानिए उन्हीं की ज़ुबानी.
मैं फ़ैसलाबाद से हूं, मेरी उम्र 19 साल है. ये नवंबर 2018 की बात है. हम लोग अपनी कज़न की शादी में गए थे, कज़न की शादी भी एक चीनी लड़के से हुई थी और अब वह चीन में है. वहीं मुझे भी पसंद किया गया और रिश्तेदारों से मेरे घर वालों का नंबर लिया गया. कॉल करके वह लोग हमारे घर आए. मुझे तीन लड़के देखने आए थे.
मेरे घर वालों का पहला सवाल था कि क्या लड़का ईसाई है? तो हमें बताया गया कि वह ईसाई है, कोई फ़्रॉड नहीं है. लेकिन हमें इतना वक़्त नहीं दिया गया. हमारे घर आने के अगले दिन ही मुझे मेडिकल टेस्ट के लिए लाहौर भेजा गया. मेडिकल टेस्ट करवाने के दो दिन बाद उन्होंने कहा कि हमें शादी करनी है. घर वालों ने कहा कि हम इतनी जल्दी शादी नहीं करना चाहते.
मगर चीनी लड़के के साथ जो पाकिस्तानी प्रतिनिधि था उसने कहा कि जो होगा वह इसी महीने होगा क्योंकि अगले महीने चीनी लोगों को वापस चले जाना है और फिर ये वापस नहीं आएंगे. तो अगर (शादी) करनी है तो अभी करनी है. उन्होंने हमें कहा कि हम आपका सारा ख़र्चा उठाएंगे.
मेरे घर वालों ने कहा कि हमें नहीं चाहिए. तो उन्होंने कहा कि नहीं जैसे पाकिस्तान में होता है कि लड़के वाले लड़की को शादी का ख़र्चा देते हैं, लड़की के कपड़े बनवाने के लिए, वैसे ही होगा. मेरे घरवालों ने अपने रिश्तेदारों का अनुभव देखते हुए शादी के लिए हां कर दी और मेरी शादी कर दी गई.
जब तक मेरे सफ़र के काग़ज़ात बन रहे थे तब तक उन्होंने मुझे सात लड़कों और लड़कियों के साथ एक घर में रखा था.

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उन्होंने लाहौर के डिवाइन रोड पर एक घर ले रखा था. कुल तीन घर थे, दो एक ही गली में थे और एक दो गलियां छोड़ के था. वहां पर सब चीनी ही चीनी थे. आख़िरी शादी मेरी हुई थी बाक़ी सात लड़कियों की मुझसे पहले शादी हो चुकी थी. सब ईसाई लड़कियां थीं.
मैं अपने शौहर से गूगल ट्रांसलेटर के ज़रिए बात करती थी. कभी अनुवाद सही हो जाता था कभी नहीं होता था. एक शिक्षक भी रखा हुआ था. हम सब लड़कियों की सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक (चीनी भाषा सीखने की) क्लास होती थी.
चीनी लोगों के साथ जो पाकिस्तानी नुमाइंदा आया था वह बहुत तेज़ था. (उसको लड़कियों की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी) उसकी भाषा लड़कियों के साथ अच्छी नहीं थी. वह गाली-गलौच करता था. अगर किसी लड़की ने कहा कि मुझे घर वापस जाना तो वह बहुत गंदे-गंदे आरोप लगाता था, ब्लैकमेल करता था.
जिस लड़के से मेरी शादी हुई थी मैं उससे सिर्फ़ तीन बार मिली थी. पहली बार जब वह मुझे देखने आया था, दूसरी बार मेहंदी में देखा और फिर निकाह के रोज़ मुलाक़ात हुई. लड़के की उम्र 21 बरस थी और शादी के बाद मुझे पता चला कि वह हाथ से विकलांग है और ईसाई भी नहीं है.
जब मैंने नुमाइंदे को बताया तो वह मुझे ब्लैकमेल करने लग गया. कहने लगा कि मैंने जो (शादी) हॉल पर पैसे लगाए हैं, मैं वह लूंगा. तुम लोगों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट करूंगा, तुम लोगों ने चीनी लोगों को धोखा दिया है. फिर उसने मेरा मोबाइल फ़ोन ले लिया. हम सब लड़कियों के मोबाइल फ़ोन चेक होते थे.
वहां रहते हुए मेरी अपनी बाक़ी दोस्तों से भी बात होती थी जो चीन गईं थीं. एक ने मुझे बताया कि यहां खाने के लिए सादा चावल देते हैं और एक कमरे में बंद रखते हैं. शाम को शौहर अपने दोस्तों को घर लाता है. सिर्फ़ इतना उन्होंने बताया था. मुझे समझ आ चुका था कि उसके साथ वहां क्या हो रहा है. वह बहुत रो रही थी.
मेरे काग़ज़ात बन चुके थे तब तक सिर्फ़ वीजा आना बाक़ी रह गया था.
वह मुझे घर नहीं जाने देते थे. मैंने कहा कि मेरे मामा की तबीयत ठीक नहीं है. तो कहने लगा कि तुम्हारे मामा को यहां बुला लेंगे, यहीं इलाज करवा लेंगे, तुम्हें कहीं नहीं जाना. बड़ी मुश्किल से घर वालों के साथ संपर्क हुआ. मेरे घर वाले मुझे लेने आए और फिर मैं वापस नहीं गई. मेरे घर वालों ने कहा कि अब तुम्हारा जो दिल चाहता है तुम वह करो. मैंने सोचा है कि मैं पार्लर का काम जानती हूं तो मैं वह कर लूंगी.
मुझे अब डर नहीं लगता, बस ये है कि दूसरी लड़कियां बच जाएं. जिन को (इस बारे में) नहीं पता वह शादी न करें.

चीनियों की शादियों की हक़ीक़त क्या है?
लाहौर के डिवाइन रोड और ईडन गार्डन इलाक़े में एक क़तार में घर बने हैं जिनमें चीन के लोग रहते हैं, जो यहां विभिन्न कंपनियों में काम के सिलसिले में आए हुए हैं. उनमें से चंद चीनी ऐसे भी हैं जो पाकिस्तान की चीन की ओर से नरम वीज़ा नीति के कारण यहां आराम से रह रहे हैं. ये क्या काम करते हैं, बहुत से लोग नहीं जानते.
मानवाधिकार पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के मुताबिक़ पिछले एक साल से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में चीन के लोग शादी के लिए आ रहे हैं और लड़कियों से शादी करके उन्हें चीन ले जा रहे हैं. लाहौर के सामाजिक कार्यकर्ता सलीम इक़बाल का कहना है कि ये शादियों नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस्मफ़रोशी का एक अहम ज़रिया है.
वह कहते हैं, "मैंने अब तक पुलिस, एफ़आईए और अन्य सुरक्षा संगठनों को सूचित किया है. एक साल बाद जाकर जब मुसलमान लड़कियों के साथ घटनाएं पेश आनी शुरू हुईं तब जाकर उन मामलों में कार्रवाइयां की गईं."
सलीम ने बताया कि पहले चंद महीनों तक गुजरांवाला और नवाही इलाक़ों में पत्रिकाओं और बैनर के ज़रिए चीनी लड़कों के बारे में सूचना जारी की गई.
"कुछ मामलों में तो परिजनों को समझ आ गया और उन्होंने अपनी बेटियों को वापस बुला लिया. लेकिन बहुत से और केसों में, ग़रीब लोगों को तीन से चार लाख देकर उनकी बेटियों की शादी की गई."
सलीम के मुताबिक़, एक साल के अर्से में लाहौर, गुजरांवाला, फ़ैसलाबाद और मुल्तान से 700 शादियां करावई जा चुकी हैं. जिनमें अधिकतर संख्या ईसाई लड़कियों की है.
ये बात मीडिया में जब सामने आई तब पंजाब से संबंध रखने वाली एक मुसलमान लड़की का केस सामने आया. जिस पर एक धार्मिक संगठन ने काफ़ी हल्ला किया.

'एजेंसियों को इस बारे में मालूम है'
इरफ़ान मुस्तफ़ा पेशे से शिक्षक हैं और पिछले चार महीने से पंजाब के विभिन्न इलाक़ों में क़रीब 10 शादियां करा चुके हैं. बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने बताया, "हमने हर एक शादी बहुत देखभाल कर करवाई है. और ये शादियां अदालतों के ज़रिए हुई हैं. जिनमें लड़की और लड़के को पेश किया जाता है."
इरफ़ान ने चीनी लड़कों से शादी करवाने के बाद चीन में लड़कियों से देह व्यापार की ख़बरों का खंडन करते हुए कहा कि 'ये मीडिया की फैलाई हुई बातें हैं और सच्चाई यह नहीं है.'
उनका कहना है कि ऐसा हर शादी में होता है. वह कहते हैं, "कई बार शादी करने के बाद विचार नहीं मिलते जिसकी वजह से मियां-बीवी में विवाद पैदा हो जाता है. इससे ये इनकार नहीं किया जा सकता कि शादी ज़बरदस्ती की गई है."
साथ ही उन्होंने पूछा कि 'क्या ऐसा हो सकता है कि एक मुल्क से दूसरे मुल्क लड़कियों को तस्करी करके ले जाया जा रहा हो और संबंधित एजेंसियों को ख़बर तक न हो? एजेंसियां जानती हैं कि क्या हो रहा है.'
'लड़का सीपीईसी में काम करता है'
लेकिन हाल ही में लाहौर के विभिन्न इलाक़ों नादिराबाद, बट चौक, डिवाइन रोड से आठ लड़कियों ने थानों में शिकायत दर्ज करवाई थी. इन शिकायतों में से एक शिकायत फ़राह ज़फ़र के नाम से दर्ज है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी मां और शादी करवाने वाले संगठन के एक शख़्स ने पैसों के बदले में उनकी ज़बरदस्ती शादी करवाई थी.
इन शिकायतों में लाहौर के कचहरी के इलाक़े से दर्ज एक रिपोर्ट में एक लड़की ने अपने चीनी पति पर हिंसा का आरोप लगाते हुए, कोर्ट में तलाक़ की अपील की है.
कुछ लड़कियों ने दर्ज शिकायत में लिखा कि उनसे कहा गया कि लड़का 'सीपीईसी (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) में कर्मचारी है' लेकिन चीन जाने के बाद पता चला कि ऐसा नहीं है. ज़्यादातर मामलों में एक बार जब लड़की पाकिस्तान से चीन रवाना हो जाए तो फिर उससे संबंध रखना नामुमकिन हो जाता है.
एक पुलिस अधिकारी ने अपनी पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया है कि उन तमाम मामलों में एक जैसा तरीक़ा इस्तेमाल किया गया है. जिसमें एक महिला, तीन पुरुष किसी ख़ानदान के पास जाते हैं और शादी के ख़र्चे से लेकर चीन जाने तक के सारे इंतज़ाम ख़ुद करवाते हैं.
"कुछ घटनाओं में कहा जा रहा है कि शादियां कामयाब हुई हैं लेकिन ये वह शादियां भी हो सकती हैं जिनमें लड़कियों को सामने आने का मौक़ा नहीं मिला."

पाक-चीन दोस्ती और बड़ी कीमत
पाकिस्तान और चीन की दोस्ती को सीपीईसी से जुड़े हितों के नज़रिये से देखा जाता है. इसीलिए हाल ही में होने वाली घटनाएं और उनके नतीजे में दर्ज होने वाली एफ़आईआर नज़रअंदाज़ हो रही हैं.
इस बारे में बात करते हुए पंजाब असेंबली के सदस्य और मानवाधिकार एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एजाज़ आलम ऑगस्टेन ने बीबीसी को बताया कि 'दो महीने पहले एक चीनी शख़्स को इस्लामाबाद एयरपोर्ट से गिरफ़्तार किया गया क्योंकि उस पर पाकिस्तानी लड़की को ज़बरदस्ती ले जाने का आरोप था.'
उन्होंने बताया कि पंजाब में पादरी और गिरजाघर शादियां करवा रहे हैं.
"इसी वजह से हमने लाइसेंसिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसके नतीजे में गिरजाघर यानी चर्च को भी लाइसेंस लेना होगा और वहां पर दुआ करवाने वाले पादरी को भी. ये नहीं होगा कि जो दुआ करवा रहा है वही निकाह भी पढ़वाएगा. ये करने की एक बड़ी वजह ज़बरदस्ती की शादियों को रोकना है."
इस वक़्त चीन में लैंगिक असंतुलन है. यहां पुरुषों की संख्या महिलाओं से कहीं ज़्यादा है, जिसकी एक बड़ी वजह वहां पर 1979 से 2015 तक रही एक बच्चा पॉलिसी भी है.
शोधकर्ताओं के मुताबिक़. चीन में इस पॉलिसी के बाद ज़्यादातर परिवार लड़कों को तरजीह देते हैं. जिसके नतीजे में ये असंतुलन बढ़ा है और हालात ये हैं कि चीनी पुरुष दूसरे देशों की ओर जा रहे हैं. इससे कई ऐसे गिरोह भी सक्रिय हो गए हैं जो इस पूरे घटनाक्रम से लाभ उठाते हुए महिलों को चीन में तस्करी करा रहे हैं.
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