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श्रीलंका: डरे हुए हैं पाकिस्तान से आए अहमदिया मुसलमान
- Author, मुरलीधरन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में पिछले सप्ताह ईस्टर रविवार को अलग-अलग चर्चों और होटलों को निशाना बनाया गया था. इन धमाकों में कम से कम 250 लोगों की मौत हो गई थी.
अब तक की जांच के आधार पर सभी हमलावर मुस्लिम बताए जा रहे हैं.
इसके बाद से ही नेगोम्बो के सेंट सेबेस्टियन चर्च के पास रहने वाले सैकड़ों पाकिस्तानी अहमदिया मुसलमान पास के मस्जिदों में शरण ले रहे हैं.
नेगोम्बो के सेंट सेबेस्टियन चर्च में हुए बम धमाके में कई लोग मारे गए थे.
अब इन अहमदिया मुसलमानों को डर सता रहा है कि स्थानीय लोग धर्म की वजह से उनपर हमला कर सकते हैं.
अब तक 200 से अधिक अहमदिया मुसलमानों ने फज़ुला मस्जिद में शरण ली है. यह मस्जिद श्रीलंका में मौजूद पांच अहमदिया मस्जिदों में से एक है. अन्य चार कोलंबो, पेसालाई, पुथलम और पोलानारुवा में स्थित हैं.
इनमें से ज़्यादातर लोगों ने जो घर किराये पर लिए थे वो कैथोलिक ईसाइयों के थे. लेकिन अब निशाना बनाया जाने के डर से ये लोग मस्जिद में पनाह ले रहे हैं.
21 तारीख़ को हुए सीरियल धमाकों के बाद 24 अप्रैल से इस इलाके में तनाव होना शुरू हो गया.
इलाके में रहने वाले युवा हबिस रब्बा शोएब कहते हैं, "जब बम धमाके हुए उसके बाद से स्थानीय लोगों ने हमारे बारे में बहुत नफ़रत दिखाई है. मेरा घर चर्च से बस कुछ ही दूर पर है. इन धमाकों के बाद मेरे मकान मालिक बहुत डरे हुए थे. उन्होंने मुझे घर छोड़ने के लिए कहा. मैं 13 हज़ार रुपये किराया दे रहा था. हम में से कई लोगों ने छह महीने तो कईयों ने तो एक साल का एडवांस किराया दे रखा था. हम क्या कर सकते हैं अगर हमें छोड़ने के लिए कहेंगे?"
संयुक्त राष्ट्र की मदद से इस इलाके में 800 से अधिक अहमदिया मुसलमान रहते हैं. नेगोम्बो के इस इलाके को अहमदिया मुसलमानों के यूरोप और अमरीका जाने के ट्रांजिट के रूप में देखा जाता है.
पाकिस्तान से आने के बाद यहीं से वे यूरोपीय देशों और अमरीका में शरण की मांग करते हैं. और इलाके में कुछ वर्ष बिताने के बाद ये यूरोपीय देशों में बतौर शरणार्थी चले जाते हैं.
गौरतलब है कि पाकिस्तान में भी अहमदिया लोगों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है, उन्हें मुसलमान नहीं माना जाता.
नेगोम्बो में रहने वाले लाहौर निवासी आमिर परेशान हैं. आमिर ने बताया, "रात के वक्त श्रीलंकाई लोगों ने हमें डराया धमकाया. उन्होंने कहा कि आप पाकिस्तानी हैं, यहां से चले जाएं. उस वक्त हम बहुत परेशान हुए."
आमिर नेगोम्बो इलाके में 2015 से रह रहे हैं. उनके मकान मालिक ईसाई हैं और उन्हें इस बात का डर था कि लोग आमिर और उनके परिवार पर हमला कर सकते हैं, इसिलिए आमिर ने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ उनका घर छोड़ कर मस्जिद में रहने का फ़ैसला किया.
वो कहते हैं, "आज मैंने अमरीकी दूतावास में इंटरव्यू दिया है. लेकिन बम धमाकों की वजह से इसे स्वीकार नहीं किया गया. मुझे नहीं पता अगली बार इंटरव्यू कब होगा."
क्या इस इलाके में रहने वाले अन्य मुसलमानों को भी अहमदिया मुसलमानों की तरह ख़तरों का डर है?
फ़ैजुल मस्जिद के इब्राहिम रहमतुल्ला कहते हैं, "हमें कई लोग जानते हैं क्योंकि हम यहां रहते हैं. लेकिन ये लोग विदेश से आए हैं. डर का यही कारण है."
फ़ैजुल मस्जिद छोटी है इसलिए मस्जिद के कर्मचारी इन्हें पेसोले मस्जिद में भेज रहे हैं जो ज़्यादा सुरक्षित जगह है. अब इसकी सुरक्षा सेना और पुलिस कर रही है.
कभी-कभी इस मस्जिद में एक बार में 65 लोग बस में सवार होकर शरण लेने पहुंच रहे हैं. कुल मिलाकर वर्तमान हालात यह है कि अहमदिया मुसलमान अपने सभी सामानों को पीछे छोड़ कर एक अनिश्चित भविष्य की अपनी यात्रा पर निकल चुके हैं.
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