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'सीरिया से इस्लामिक स्टेट का नामोनिशान ख़त्म'
सीरिया में अमरीका के समर्थन से लड़ रहे कुर्द बलों ने इस्लामिक स्टेट के अंतिम गढ़ को फ़तह करने का दावा किया है.
सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ ने इस्लामिक स्टेट का आख़िरी गढ़ कहे जाने वाले बाग़ूज़ क़स्बे पर अपना पीला झंडा फ़हरा दिया है. बताया जाता है कि दुनिया भर से आए जेहादी लड़ाकों का ये अंतिम गढ़ था.
एसडीएफ़ का कहना है कि सीरिया में पांच साल पहले घोषित ख़िलाफ़त को अंततः नष्ट कर दिया गया है.
हालांकि सीरिया के इस चरमपंथी समूह से पूरी तरह आज़ाद होने के बाद भी वैश्विक स्तर पर इसका ख़तरा अभी भी बना हुआ है. नाइजीरिया, अफ़ग़ानिस्तान और फ़िलिपीन्स समेत कई अन्य देशों औऱ मध्यपूर्व में इसकी मौजूदगी अभी भी है.
बाग़ूज़ में जीत का ऐलान करते हुए एसडीएफ़ के प्रवक्ता अदनान आफ़रीन ने कहा, "आज सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ अधिकारिक तौर पर इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ सभी लड़ाइयों के ख़त्म होने और जीत का ऐलान करती है. भौगोलिक रूप से अब उत्तर पूर्वी सीरिया में दाएश (इस्लामिक स्टेट) का नामोनिशान नहीं बचा है."
इस लड़ाई में अपनी वायु शक्ति से मदद करने वाले अमरीका ने ऐसा ही दावा शुक्रवार को किया था. अमरीकी राष्ट्रपति ने एक तस्वीर जारी कर 21 मार्च को कहा था कि इस्लामिक स्टेट को सीरिया से खड़ेदने में बड़ी कामयाबी मिली है.
बीते साल ट्रंप ने बीते साल इस्लामिक स्टेट को हराने का दावा किया था और अमरीकी सेना की वापसी की बात की थी. हालांकि इसके बाद व्हाइट हाऊस ने कहा कि इलाके में को अपनी सेना की एक टुकड़ी को ही बनाए रखेगा.
कुर्द बलों के नेतृत्व में एसडीएफ़ ने मार्च की शुरुआत में पूर्वी सीरिया के बाग़ूज़ को इस्लामिक स्टेट के चुंगल से छुड़ाने की मुहिम शुरु की थी. लेकिन सेना की गति तब धीमी हो गई जब इस बात का पता चला कि आम लोग इस इलाके में फंसे हुए हैं.
यहां से हज़ारों की संख्या में महलाओंऔर बच्चों ने पलायन कर एसडीएफ़ के राहत शिविरों में पनाह ली है. इनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.
हज़ारों लड़ाके फ़रार
आम नागरिकों के अलावा इस्लामिक स्टेट के कई लड़ाके भी बाग़ूज़ छोड़ कर भाग गए जबकि जो बचे उन्होंने सेना से लड़ाई की. इस लड़ाई के दौरान कई आत्मघाती हमले भी हुए.
एक वक्त में इस्लामिक स्टेट ने सीरिया और इराक़ के 88 हज़ार किलोमीटर वर्ग पर अपना अधिकार बना लिया था.
अपनी ताक़त के शिखर पर इस्लामिक स्टेट के नियंत्रण में सीरिया और इराक़ का ब्रिटेन जितना बड़ा इलाक़ा था जहां उसने एक करोड़ से अधिक लोगों पर बंदूक की नोक पर अपना धार्मिक शासन चला रखा था. इस्लामिक स्टेट के हज़ारों लड़ाकें अभी भी फरार हैं.
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