जर्मनी में साइबर हमला: मर्केल समेत कई नेताओं की निजी जानकारियां लीक

जर्मनी

इमेज स्रोत, GETTY/REUTERS

जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल समेत सैकड़ों जर्मन नेताओं, पत्रकारों और अलग-अलग क्षेत्रों की ख़ास हस्तियों की निजी जानकारियां एक व्यापक साइबर हमले का शिकार हुई हैं.

साइबर अटैक का शिकार हुई हस्तियों की कॉन्टैक्ट लिस्ट, व्यक्तिगत बातचीत (चैट मैसेज़) और आर्थिक मामलों से जुड़ी जानकारियां ट्विटर पर जारी कर दी गईं. कई पत्रकारों की निजी जानकारियों को भी सार्वजनिक कर दिया गया है.

अब तक ये सामने नहीं आया है कि इस हमले के पीछे कौन है.

कितना गंभीर था हमला?

लीक हुई जानकारियों से कितना बड़ा नुक़सान हुआ है, इसका आकलन अभी नहीं हो सका है, लेकिन जर्मनी में न्यायिक मामलों की मंत्री कैटरीना बारले के मुताबिक़ ये एक बेहद गंभीर हमला था.

उन्होंने कहा, "इस हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों ने लोकतंत्र और संस्थाओं में हमारे विश्वास को डिगाने की कोशिश की है."

जर्मन सरकार की प्रवक्ता मार्टिना फिएट्ज़ ने कहा है कि चांसलर एंगेला मर्केल के ऑफ़िस से किसी भी तरह की संवेदनशील जानकारी इंटरनेट पर नहीं पहुंची है.

हालांकि, सरकार के सांसद, यूरो सांसद और सभी प्रांतों के सांसदों के साइबर अकाउंट प्रभावित हुए हैं.

जर्मनी

इमेज स्रोत, Getty Images

उन्होंने कहा है कि सरकार अब तक इस नतीजे पर नहीं पहुंची है कि क्या साइबर अटैक में हैकर्स ने डेटा चुराया. कुछ ख़बरों में ये भी सामने आया है कि जानकारी लीक करने वाले किसी एक व्यक्ति के पास अपने काम के चलते संवेदनशील जानकारी हो सकती है.

वहीं, बीबीसी से बात करते हुए एक साइबर विशेषज्ञ ने बताया कि इस बात के क़यास लगाए जा रहे हैं कि हैकर्स ने ईमेल सॉफ़्टवेयर में किसी ख़ामी की वजह से पासवर्ड हासिल कर लिए हों और ये संभव है कि इसका शिकार हुए लोगों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स में भी एक समान पासवर्ड इस्तेमाल किए हों.

जर्मनी में सूचनाओं की सुरक्षा से जुड़ा काम संभालने वाली संघीय संस्था बीएसआई ने कहा है कि उसकी जानकारी के मुताबिक़ सरकारी नेटवर्क प्रभावित नहीं हुए हैं.

संवेदनशील जानकारियां नहीं हुईं लीक

जर्मनी की राजधानी बर्लिन के रेडियो आरबीबी के पत्रकार माइकल गॉशेनबर्ग ने बताया है कि इस साइबर हमले में किसी तरह की संवेदनशील जानकारियां लीक नहीं हुई हैं लेकिन कुछ ऐसी निजी जानकारियां लीक की गई हैं जिनके परिणाम गंभीर हो सकते हैं.

जर्मनी के शहर हैम्बर्ग से चलाए जा रहे ट्विटर अकाउंट ने इन जानकारियों को लीक किया था. लेकिन अब इस अकाउंट को सस्पेंड कर दिया गया है.

लेकिन अगर ट्विटर पर आए डेटा की बात करें तो यह डेटा साल 2018 के अक्तूबर महीने से पहले का है और इन दस्तावेज़ों को पिछले महीने ही लीक कर दिया गया था.

एंगेला मर्केल

इमेज स्रोत, Getty Images

हालंकि, सरकारी अधिकारियों की इसकी जानकारी बीते गुरुवार को ही मिली.

हमले के पीछे कौन?

इस हमले के लिए फ़ौरी तौर पर जर्मनी के दक्षिणपंथी समूहों और रूस को ज़िम्मेदार माना जा रहा है.

जर्मनी के साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ स्वेन हर्पिग कहते हैं, "इस मामले में रूस को संदिग्ध माना गया था क्योंकि जर्मनी में 2019 में चार राज्यों के चुनावों के साथ-साथ, यूरोपीय संसद के चुनाव होने वाले हैं और साइबर हमले का तरीक़ा भी इस ओर इशारा करता है."

"हालांकि, इस हमले में किसी भी दक्षिणपंथी राजनेता का शिकार न होना और उनके आलोचकों का शिकार होना बताता है कि इसके पीछे आंतरिक दक्षिणपंथी ताक़तें हो सकती हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)