You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
लापीस लाजुली ट्रेड कॉरिडोरः अफ़ग़ानिस्तान को अब पाकिस्तान की 'धमकी' नहीं सहनी पड़ेगी
- Author, सैयद फ़ारूक़ वैज़ी और तारिक़ अता
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
अफ़ग़ान उत्पादों की पहली खेप नए बनाए गए लापीस लाजुली ट्रेड कॉरिडोर के ज़रिए तुर्की के इस्तांबुल शहर 31 दिसंबर को पहुंच गई.
175 टन के इस खेप में तरबूज़ के बीज, कपास, किशमिश और तिल थे. इसे अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने 13 दिसंबर को कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद रवाना किया था.
लापीस लाजुली एक अंतरराष्ट्रीय ट्रेड कॉरिडोर है, जो अफ़ग़ानिस्तान को तुर्कमेनिस्तान, अज़रबैजान, जॉर्जिया होते हुए तुर्की से जोड़ता है.
यह सड़क, रेल और समुद्री मार्गों के ज़रिए इन पांच देशों के लिए यूरोप के रास्ते खोलता है. यह कैस्पियन सागर और काला सागर से भी जुड़ा है.
लापीस लाजुली ट्रेड कॉरिडोर को एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में देखा जा रहा है, जो अफ़ग़ानिस्तान के लिए कई मायनों में फ़ायदेमंद साबित होगा.
अफ़ग़ानिस्तान के उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि यह कॉरिडोर सुरक्षित और सस्ता है, जो पाकिस्तान और इसके कराची बंदरगाह से गुज़रने वाले मार्ग से भी छोटा है.
लापीस लाजुली कॉरिडोर पर सभी देशों की सहमति तीन सालों की वार्ता के बाद 2017 में बनी थी. इसका नाम क़ीमती पत्थर लापीस लाजुली के नाम पर पड़ा है, जिसे अफ़ग़ानिस्तान से यूरोप भेजा जाता था.
- यह भी पढ़ें | चाबहार पर भारत-ईरान दोस्ती से क्यों घबरा रहा पाकिस्तान
अफ़ग़ानिस्तान को फ़ायदा कैसे
अफ़ग़ानिस्तान चारों तरफ़ से देशों से घिरा है. इसका कोई भी हिस्सा समुद्र से जुड़ा नहीं है. ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था के विकास के लिए वैकल्पिक मार्ग की ज़रूरत पहले से महसूस की जा रही थी.
इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पाकिस्तान पर आश्रित रहना पड़ता था. यहां के व्यापारियों और उद्योगों को दोनों देशों के बीच बदलते रिश्ते का ख़ामियाज़ा भी भुगतना पड़ता था.
सुरक्षा कारणों से कई बार सीमा बंद कर दी जाती थी, ऐसे में लापीस लाजुली अफ़ग़ानिस्तान के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरा है.
साल 2014 में अशरफ़ ग़नी देश के राष्ट्रपति बने. इसके बाद उन्होंने इस दिशा में कई अहम फ़ैसले लिए. अन्य देशों के साथ मिलकर उन्होंने सीधा व्यापारिक गलियारा बनाने का समझौता किया.
- यह भी पढ़ें | तालिबान के पास आख़िर कहां से आता है पैसा?
'पड़ोसी अक्सर धमाकाया करते थे'
साल 2016 में अफ़ग़ानिस्तान ने भारत और ईरान के साथ मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय यातायात मार्ग स्थापित करने का फ़ैसला किया और इसे चाबहार परियोजना का नाम दिया.
इसके ज़रिए भारत सीधे अफ़ग़ानिस्तान और ईरान तक पहुंच सकता है. उसे पाकिस्तान के सहारे की ज़रूरत नहीं रहेगी.
पिछले एक साल में एक नए वायु मार्ग का भी विकास किया गया है, जो अफ़ग़ानिस्तान को भारत, तुर्की, कज़ाख़स्तान, यूएई, सऊदी अरब, रूस, चीन और नीदरलैंड्स से जोड़ता है.
लापीस लाजुली का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने कहा था, "हमारे पड़ोसी हमें अक्सर धमकाया करते थे कि अगर वो ट्रेड रूट को बंद कर देंगे तो हम भूखे मर जाएंगे. अब अफ़ग़ानिस्तान के पास व्यापार के कई रास्ते मौजूद हैं."
अफ़ग़ानिस्तान चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट एंड वन रोड में भी शामिल होना चाहता है.
प्रतिक्रिया
अफ़ग़ानिस्तान के लोग लापीस लाजुली ट्रेड कॉरिडोर की शुरुआत से ख़ुश हैं. उन्हें उम्मीद है कि यह उनकी तरक्की के नए रास्ते खोलेगा.
देश के सरकारी टीवी पर एक चर्चा के दौरान आर्थिक मामलों के जानकार डॉक्टर रंजबर कहते हैं, "पहले हमारे पूरब और पश्चिम के पड़ोसी (पाकिस्तान और ईरान) हमारे लिए परेशानी खड़ी करते थे. हमें उनकी बेकार तर्क वाली मांगों को मानने के लिए मजबूर होना पड़ता था ताकि हमें पानी मिल सके. अच्छी बात यह है कि लापीस लाजुली से जुड़े देशों के साथ रानजीतिक रिश्ते ख़राब नहीं है."
इसी चर्चा में शामिल एक अन्य विशेषज्ञ अहमद ज़िया भी इस कॉरिडोर की शुरुआत का स्वागत करते हैं और कहते हैं कि यह अफ़ग़ानिस्तान के व्यापार को मज़बूत और अन्य देशों से साथ उनके आर्थिक रिश्ते को बेहतर करेगा.
यहां तक कि तालिबान से अलग हुए एक दल की अगुवाई कर रहे मुल्लाह मोहम्मद रसूल ने भी इस कॉरिडोर की शुरुआत की प्रशंसा की है.
उनके जारी बयान को अफ़ग़ान इस्लामिक प्रेस न्यूज एजेंसी ने अपनी एक ख़बर में शामिल किया है. समूह का कहना है, "अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रीय हितों के अलावा देश के लोगों और ख़ासकर ग़रीब लोगों के हित में लिए गए इस फ़ैसले का हम स्वागत करते हैं."
अफ़ग़ानिस्तान के समाचार पत्र अरमान-ए मेल्ली का कहना है कि यह कॉरिडोर अमरीकी सेना के आवागमन में भी मददगार साबित होगा.
हालांकि एक निजी अख़बार मंदेगर का कहना है कि यह कॉरिडोर बहुत फ़ायदे बाला साबित नहीं होगा और राष्ट्रपति ग़नी ने इसे "चुनावी पैंतरेबाज़ी" के लिए
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)