You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
नेपाल और बांग्लादेश के बीच 'हाथी की तरह' बैठा है भारत
- Author, विष्णु पोखरेल
- पदनाम, बीबीसी नेपाली संवाददाता, काठमांडू
क्या नेपाल अपने यहाँ पैदा की गई बिजली सीधे बांग्लादेश को बेच सकता है?
दोनों देशों के अधिकारी काठमांडू में इस मुद्दे पर पिछले दो दिन से चर्चा कर रहे हैं.
नेपाली अधिकारियों को उम्मीद है कि अगले कुछ साल में नेपाल अपनी ज़रूरत से ज़्यादा बिजली उत्पादन करेगा.
इस अतिरिक्त बिजली को नेपाल सीधे बांग्लादेश को बेचना चाहता है.
लेकिन बिजली के तार बांग्लादेश तक भारत होते हुए ही पहुँचाये जा सकते हैं.
नेपाल की पूर्वी सीमा और बांग्लादेश की उत्तर-पश्चिमी सीमा के बीच 27 किलोमीटर का भारतीय क्षेत्र है.
बीच में भारत
नेपाल इसी रास्ते बांग्लादेश को बिजली भेज सकता है लेकिन इसके लिए भारत का सहयोग बहुत ज़रूरी है.
नेपाल के कई जानकारों ने कहा है कि जब तक भारत इसकी अनुमति नहीं देता तब तक न नेपाल कुछ कर सकता है और न ही बांग्लादेश.
नेपाल के पूर्व जलस्रोत सचिव द्वारिकानाथ ढुँगेल का कहना है, "नेपाल और बांग्लादेश कितनी भी बातें करें लेकिन जब तक बीच में हाथी की तरह बैठा भारत सहयोग नहीं करता, इस बातचीत का कोई मतलब नहीं है."
नेपाल की प्राइवेट बिजली कंपनियों के संगठन और सरकार का कहना है कि दो साल के अंदर वो एक से दो हज़ार मेगावॉट तक अतिरिक्त बिजली उत्पादन करने में सक्षम होंगे.
जबकि फ़िलहाल नेपाल का कुल बिजली उत्पादन 1300 मेगावॉट है.
- यह भी पढ़ें | क्या नेपाल के पास है घरेलू हिंसा का समाधान?
नेपाल की बिजली
ढुँगेल उदाहरण देते हैं कि सार्क और बिमस्टेक की बैठकों में भी ऊर्जा सहयोग का ज़िक्र हुआ था लेकिन इसके बाद बात आगे नहीं बढ़ी.
उनका कहना है कि भारत ने अब तक अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं किया है इसलिए बांग्लादेश से ऊर्जा व्यापार की राह में अड़चनें बाक़ी हैं.
नेपाल की सरकारी बिजली कंपनी विद्युत प्राधिकरण के पूर्व कार्यकारी निर्देशक संतबहादुर पुन भी इस तरह की पहल को सफल होने मे भारत की निर्णायक भूमिका देखते हैं.
संतबहादुर पुन कहते हैं, "पहली बात तो ये है कि हमने कभी बांग्लादेश को ऊर्जा निर्यात करने के लिए भारत से खुलकर बात नहीं की है. लेकिन अगर आप भारत की ऊर्जा नीतियोँ को देखते हैं तो वो ढिलाई बरतने वाले नहीं हैं. और फिर नेपाल में लोग बिना सोचे केवल बिजली बेचने कि बात करते रहते हैं."
बांग्लादेश से करार
संतबहादुर पुन का कहना है कि नेपाल को सबसे पहले ये तय करना होगा कि वो कितनी बिजली का उत्पादन कर सकता है और उसमें से कितना बेच सकता है.
बिजली कंपनियों के संगठन 'स्वतंत्र उत्पादक संस्था, नेपाल' के अध्यक्ष शैलेंद्र गुरागाईं एक उदाहरण देते हुए भारत की सहयोगी भूमिका पर शंका जताते हैं.
उन्होंने कहा, "बांग्लादेश ने भारतीय कंपनी जीएमआर से बिजली ख़रीदने का शुरुआती समझौता किया है. लेकिन उसको भारत होते हुए बांग्लादेश तक बिजली भेजने की अनुमति अब तक नहीं मिली है."
जीएमआर नेपाल मे 900 मेगावॉट की 'माथिल्लो कर्णाली परियोजना' के लिए फ़ंड जुटाने में लगी है. ये उसी परियोजना की 500 मेगावॉट बिजली बांग्लादेश को बेचना चाहती है.
- यह भी पढ़ें | वो पाकिस्तानी एक्टर जो नेपाल में 'पंडित' बन गया
नेपाल की उम्मीद
कुछ महीने पहले भी नेपाल और बांग्लादेश के बीच बिजली के क्षेत्र में योजना पर सहमति हुई थी.
काठमांडू में हुई बातचीत में हिस्सा ले रहे नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय के प्रवक्ता दिनेश कुमार घिमिरे का कहना है कि इस बैठक में भारत से साथ काम करने के तरीक़ों पर भी चर्चा होगी.
घिमिरे का कहना है, "हमें भरोसा है कि भारत सहयोग करेगा. उसने क्षेत्रीय मंचों से भी ऐसा वचन दिया है. इसीके आधार पर हम अभी बांग्लादेश से बातचीत कर रहे हैं और अगर ज़रूरत पड़ी तो भारत को विश्वास में लेकर तीनों देश बात करेंगे."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)