जापान-अमरीका-भारत यानी जय: पीएम मोदी

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जी 20 सम्मेलन के पहले दिन अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए.
प्रदर्शनकारी कह रहे थे कि जी-20 सम्मेलन में आए नेता इस दुनिया की पूरी अर्थव्यवस्था को अपने हाथ में रखने चाहते हैं. कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों ने इस सम्मेलन को दौलत की ताक़त का प्रदर्शन बताया.
जी-20, दुनिया के 19 सबसे अधिक औद्योगीकृत देशों का समूह है जिसमें यूरोपीय संघ भी शामिल है. वैश्विक अर्थव्यवस्था का 85 प्रतिशत हिस्सा, जी 20 समूह देशों के पास है. विश्व की दो तिहाई आबादी जी-20 के सदस्य देशों में रहती है.
सम्मेलन की मेज़बानी कर रहे अर्जेंटीना के राष्ट्रपति मोरसियो मैक्री ने सदस्य देशों के बीच संवाद और सहमति पर ज़ोर दिया लेकिन समूह के सदस्यों में गहरे मतभेद जल्द ही सामने आ गए.
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि जो हुआ, हम उससे ख़ुश नहीं हैं और उम्मीद करते हैं कि मामले को जल्द सुलझा लिया जाएगा.
राष्ट्रपति ट्रंप ज़िक्र कर रहे थे उस घटना का जिसमें रूस ने यूक्रेन के तीन जहाज़ों को चालक दल के सदस्यों समेत पकड़ लिया था. इसी वजह से ट्रंप ने सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिलने से मना कर दिया.
जोशीले पुतिन

वहीं रूस के राष्ट्रपति इस सम्मेलन में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस, मोहम्मद बिन सलमान से जोशीले अंदाज़ में मिलते हुए नज़र आए. दोनों नेताओं ने मुलाक़ात के दौरान बड़ी गर्मजोशी दिखाई.
तुर्की की राजधानी इस्तांबुल के सऊदी दूतावास में पिछले महीने पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के बाद ये पहला मौका है जब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस, मोहम्मद बिन सलमान किसी बड़े और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच पर नज़र आए हैं.
सम्मेलन में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने एक बयान भी जारी किया है जिसमें संरक्षणवाद के ख़िलाफ़ चेतावनी दी गई है. बयान में कहा गया है कि विश्व व्यापार संगठन को मज़बूत किया जाना चाहिए.
हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन संवाददाताओं का मानना है कि ओलाचना का निशाना राष्ट्रपति ट्रंप की ओर था.
'जापान-अमरीका-भारत यानी जय'

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सम्मेलन से इतर, भारत, जापान और अमरीका के बीच पहली त्रिपक्षीय वार्ता भी हुई. वार्ता के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जापान, भारत और अमरीका मिलकर जय (जेएआई) हो जाते हैं जो एक अच्छी बात है.
दो दिन के इस सम्मेलन के पहले दिन सदस्य देशों के बीच जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मुद्दे पर अलग-अलग स्वर सुनाई दिए.
संवाददाताओं के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि ये सम्मेलन किसी ठोस नतीजे पर पहुंचे बिना भी सम्पन्न हो सकता है और बहस का दायरा चीन-अमरीका ट्रेड वॉर, पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या और रूस-यूक्रेन के बीच तनाव तक सीमित रह सकता है.
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