ख़ाशोज्जी हत्याकांड के बावजूद ट्रंप सऊदी अरब के साथ क्यों खड़े हैं?

ट्रंप और सलमान

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ऐसे वक़्त में जब सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के मामले में पूरी दुनिया सऊदी अरब की तरफ़ तिरछी निगाह से देख रही है, तब अमरीका का सऊदी प्रेम जस का तस बना हुआ है.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों का एक बयान जारी कर बचाव किया है. ट्रंप ने कहा, ''सऊदी अरब अमरीका का भरोसेमंद सहयोगी है और अमरीका में अच्छे ख़ासे निवेश के लिए सहमत है.''

राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक़, ''हो सकता है कि सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के बारे प्रिंस सलमान को सब पता हो. या शायद ना भी पता हो. लेकिन किसी भी मामले में अमरीका सलमान के साथ है.''

पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की 2 अक्टूबर को इस्ताम्बुल स्थित सऊदी दूतावास में हत्या कर दी गई थी.

ख़ाशोज्जी की हत्या का आरोप सऊदी अरब पर है. सऊदी अरब इस हत्या के बारे में प्रिंस सलमान को कुछ भी पता होने के आरोपों को ख़ारिज करता रहा है.

अमरीकी मीडिया के मुताबिक़, सीआईए ये मानता है कि ख़ाशोज्जी की हत्या के बारे में प्रिंस सलमान को जानकारी थी.

पत्रकार ख़ाशोज्जी अपने लेखों में सऊदी अरब की आलोचना करते रहते थे.

ट्रंप

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ट्रंप के बयान की ख़ास बातें

इससे पहले बीते हफ़्ते में ट्रंप ने फ़ॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वो ख़ाशोज्जी के भयानक टेप को नहीं सुनेंगे.

ट्रंप ने कहा था, ''ख़ाशोज्जी के टेप सुने बिना ही मुझे इस बारे में सब कुछ पता है. ये बहुत हिंसक, क्रूर और भयानक था.''

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी कहा, ''दुनिया एक ख़राब जगह है. ख़ासकर मध्य पूर्व का क्षेत्र, जहां अमरीका का हित है. ये राष्ट्रपति ट्रंप के साथ-साथ विदेश मंत्रालय का भी फ़र्ज़ कि अमरीका के हित को बढ़ाने वाली नीतियां तय करे, इसलिए राष्ट्रपति ने कहा कि अमरीका सऊदी अरब से संबंध बनाए रखेगा.''

ट्रंप ने अपने बयान में ईरान के ख़िलाफ़ अमरीकी लड़ाई में सऊदी अरब को अहम सहयोगी माना.

ट्रंप के बयान के मुताबिक़, ''सऊदी अरब कट्टरपंथी इस्लामी चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई में अरबों रुपये खर्च करता है. वहीं ईरान मध्य-पूर्व में अमरीकियों और निर्दोष लोगों को मारता रहा है.

  • अगर अमरीका सऊदी अरब के साथ हुए समझौतों को रद्द करता है तो इसका फ़ायदा चीन और रूस को होगा.
  • इसराइल और मध्य-पूर्व में अपने सहयोगियों के हित के लिए अमरीका सऊदी अरब के साथ बना रहेगा.

अगले हफ़्ते अर्जेंटीना में होने वाले जी-20 सम्मेलन में ट्रंप और प्रिंस सलमान की मुलाक़ात हो सकती है.

सलमान ट्रंप

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सऊदी का साथ क्यों नहीं छोड़ रहे हैं ट्रंप?

अपने बयान में गिनाई वजहों के बावजूद एक देश के तौर पर अमरीका का यूं खुलकर सऊदी के साथ आना कई सवाल पैदा करता है.

इनमें सबसे अहम ये कि जब दुनिया सऊदी अरब को ख़ाशोज्जी की हत्या का ज़िम्मेदार मानकर शक भरी निगाह से देख रही है, तब ट्रंप प्रिंस सलमान का साथ क्यों नहीं छोड़ रहे हैं?

इसकी एक अहम वजह अमरीका के आर्थिक हित हैं. सऊदी अरब अमरीका में अच्छा ख़ासा निवेश करता है.

बीबीसी के एंथनी जर्चर के मुताबिक़, ''ट्रंप एक अलग किस्म के प्राणी हैं. विदेश नीतियों को लेकर उनका रुख़ भी अलग ही तरह का रहा है. ख़ाशोज्जी हत्या पर उनका बयान कई मायनों में अहम है. ट्रंप जल्दी से मुद्दे को ईरान की तरफ मोड़ना चाहते हैं.

इसका अंदाज़ा आप ट्रंप के 'संभव-असंभव' की आड़ में उन रिपोर्ट्स को ख़ारिज करने की बात से लगा सकते हैं, जिनमें ख़ाशोज्जी हत्याकांड के लिए प्रिंस सलमान को ज़िम्मेदार बताया गया था.

ट्रंप इसी के साथ 450 बिलियन डॉलर के निवेश और सऊदी को हथियारों की बिक्री का हवाला भी देते हैं. हालांकि ये कागज़ों में किए समझौतों से कुछ ज़्यादा ही रकम है.

अमरीकी राष्ट्रपति ख़ाशोज्जी हत्या मामले में अमरीका फ़र्स्ट की नीति अपना रहे हैं.''

हालांकि बीबीसी संवाददाता जोनाथन मार्कस इसकी मुश्किलों के बारे में बात करते हैं.

जोनाथन कहते हैं, ''इस क्षेत्र में अमरीका की नीतियां दो लोगों को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती है. पहले हैं सऊदी अरब के प्रिंस सलमान. दूसरे इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू. ऐसे में दोनों देशों के बीच अमरीका का स्वतंत्र मध्यस्थ की भूमिका निभाना मुश्किल रहेगा.''

सलमान

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ट्रंप-सलमान के 'प्यार' की वजहें

बीबीसी के एंथनी जर्चर अमरीका और सऊदी अरब की दोस्ती की वजहों और ट्रंप के बयान को विस्तार से कुछ यूं समझाते हैं.

'अमरीका फर्स्ट,' 'दुनिया एक ख़तरनाक जगह है'

ट्रंप अपने बयान की शुरुआत इस लाइन से करते हैं.

ट्रंप अच्छे से जानते हैं कि अपनी बात कैसे शुरू करनी है. अपनी इन दो लाइनों से ट्रंप ये साफ़ करते हैं कि विदेश नीति को लेकर उनका क्या रुख़ है.

वो ये संकेत देना चाहते हैं कि उन्हें दुनिया की विचारधारा से क़तई फ़र्क़ नहीं पड़ता है. ट्रंप के लिए अहम हैं तो अमरीकी नागरिक.

'चरमपंथ को बढ़ावा देने वाला ईरान'

ट्रंप ख़ाशोज्जी पर बात करते हुए ईरान का ज़िक्र छेड़कर ये कहते हैं कि वो अमरीका और इसराइल का ख़ात्मा चाहता है. ट्रंप ईरान की भूमिका पर सवाल खड़े करते हैं.

एक इंसान ख़ाशोज्जी की हत्या बनाम हज़ारों लोगों की हत्याएं.

ट्रंप संख्या के बल को जानते और समझते हैं. वो अपने बयान से ये संदेश देना चाहते हैं कि हज़ारों लोगों की मौत ज़्यादा अहम है ताकि ख़ाशोज्जी हत्या की तुलना अमरीकियों की हत्या से की जा सके.

इसी क्रम में वो ध्यान सऊदी से हटाकर ईरान की ओर लाने की कोशिश करते हैं.

ट्रंप

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सऊदी निवेश

ट्रंप अपने बयान में अतीत में हुए 450 बिलियन डॉलर के निवेश का ज़िक्र करते हैं. लेकिन ट्रंप इस निवेश के ब्यौरे नहीं देते हैं.

इसमें मई 2017 में ट्रंप के सऊदी अरब दौरे के बाद कितना निवेश हुआ, इसकी भी कोई जानकारी नहीं दी जाती है.

ये सही है कि सऊदी अरब 110 बिलियन डॉलर के सैन्य निवेश के लिए तैयार हुआ था.

हालांकि इसमें अतीत में ख़रीद को लेकर किए 14.5 बिलियन डॉलर के निवेश के वादे भी शामिल थे.

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