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फ्रीडम ट्रैशकैन: झाड़ू-पोंछा
घर की साफ़-सफ़ाई और दूसरे घरेलू कामों को पारंपरिक तौर महिलाओं का काम समझा जाता रहा है.
हालांकि कई समाजों ने इस सोच को चुनौती दी है लेकिन फिर भी वहां घर को साफ़-सुथरा रखने का सामाजिक दबाव महिलाओं पर होता है.
वो इसे पार्ट टाइम या फुल टाइम जॉब की तरह करती हैं.
ब्रिटेन में साल 2016 में किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई थी कि महिलाएं पुरुषों के मुक़ाबले औसतन करीब 60 फीसदी उन कामों को ज़्यादा करती हैं, जिनके लिए उन्हें पैसे नहीं मिलते. इन कामों में घरेलू कामकाज भी शामिल थे.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, दुनिया के विकसित देशों में महिलाएं पुरुषों के मुक़ाबले 30 मिनट ज़्यादा और विकासशील देशों में 50 मिनट ज़्यादा वैतनिक और अवैतनिक काम करती हैं.
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इसका मतलब यह हुआ कि प्रतिदिन आठ घंटे की नींद के बाद महिलाओं के पास पुरुषों के मुक़ाबले लगभग 19 दिन कम उपलब्ध होते हैं.
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