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फ्रीडम ट्रैशकैन: सॉसपेन
हम सभी खाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम सभी पकाते भी हैं. अन्य घरेलू कार्यों की तुलना में खाना पकाने में सबसे ज़्यादा समय लगता है और ये काम ज़्यादातर दफ़ा महिलाओं के हिस्से आता है.
संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देशों में महिलाएं, पुरुषों के मुकाबले खाना पकाने में करीब डेढ़ घंटा ज़्यादा व्यतीत करती हैं.
इस सर्वे में एक और बात सामने आई है कि ज़्यादा विकसित देशों में महिला और पुरुषों के खाना बनाने में व्यतीत समय का अंतर करीब एक घंटे है.
रसोई घर में सबसे ज्यादा समय भारतीय महिलाएं देती हैं. 2015 के एक सर्वे के मुताबिक हर हफ्ता करीब 13 घंटा वो खाना बनाने में खर्च करती हैं.
हालांकि प्रोफेशनल दुनिया में आंकड़े उलट हैं. ब्रिटेन में खाना बनाने वाले शेफ़ के महज़ 17 फीसदी पदों पर ही महिलाएं हैं.
कुछ लोग इसके लिए किचन में प्रोफेशनल माहौल को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराते हैं और दूसरों का कहना है कि महिलाएं इस पेशे की समय सारणी को लेकर सहूलियत महसूस नहीं करतीं.
एक सोशियोलॉजिकल स्टडी के मुताबिक पुरुष और महिला शेफ़ की मीडिया में नुमाइंदगी भी इस समस्या का हिस्सा है.
लेखकों का मानना है कि पुरुषों को इंटलेक्चुअल-टेक्निकल काम के लिए ज़्यादा श्रेय दिया जाता है, जबकि महिलाओं के तकनीकी हुनर का ज़िक्र कभी-कभार होता है.
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