You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
वुसअत का ब्लॉग: इमरान ख़ान के 100 दिनों में पांच वादों का क्या हुआ
- Author, वुसअतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार
कप्तान इमरान ख़ान को प्रधानमंत्री पद की शपथ लिए आज 101 दिन हो गए. शपथ लेने से पहले उन्होंने पहले सौ दिनों में नए पाकिस्तान के लिए पांच चीजों का वादा किया था.
सरकार के काम करने का अंदाज़ बदल देंगे, सो बदल दिया. पहले नौकरशाह ख़ुद से भी कुछ काम कर लेते थे लेकिन इस वक़्त उन्हें नहीं मालूम कि कब कौन हुक़्म देगा और किसका आदेश उन्हें पहले बजा लाना है.
इसलिए सरकार हर दूसरे-तीसरे दिन यह कहने को मजबूर है कि नौकरशाह आदेश का पालन नहीं कर रहे.
दूसरा वादा था कि फ़ेडरेशन को मजबूत करेंगे. इसका क्या मतलब है 100 दिन बाद भी पल्ले नहीं पड़ सका.
तीसरा वादा था कि अर्थव्यवस्था का पहिया तेज करेंगे.
फिलहाल तो सऊदी अरब, चीन, यूएई और आईएमएफ से लगभग 18 बिलियन डॉलर जमा किए जा रहे हैं ताकि 95 बिलियन डॉलर के विदेशी कर्ज़ों का सूद चुकाया जा सके.
बाक़ी पैसे बाहर से काला धन देश में लाने का सपना साकार करके पूरे किए जाएंगे. पिछले वर्ष पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 5.5 प्रतिशत बढ़ी थी. इस बार आंकड़ा 4.5 प्रतिशत बढ़ोतरी का है.
चौथा वादा था कि पहले 100 दिन में पानी बचाव योजना शुरू होगी. इस बार गेहूँ के लिए पिछले साल के मुकाबले में आधा पानी मिलने की भविष्यवाणी है. बारिशें हो गईं तो बचत हो जाएगी.
पांचवा वादा था कि सामाजिक सेवा के तरीक़े मे इंक़लाबी तब्दीली लाई जाएगी. इसका क्या मतलब है ये हमें समझ में नहीं आया. वैसे ख़ान साहब ने गरीबों के लिए 50 लाख घरों के नक़्शे बनाने का काम तो शुरू कर दिया है जिससे एक करोड़ नौकरियां देने का वादा भी पूरा हो जाएगा, ऐसा बताते हैं.
छठा वादा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा. कितना मजबूत किया जाएगा ये हम नहीं जानते.
'रौनक मेला लगा हुआ है'
इन 100 दिनों में संसद सिवाय बजट की मंज़ूरी के कोई नया क़ानून नहीं बना सकी मगर हंगामा रोज़ होता है.
मंत्री विपक्ष को चोरों और डाकुओं का टोला कहते हैं और विपक्ष ये जवाबी वार करती है कि ख़ान साहब और उनके मंत्रिमंडल को अब तक पता नहीं चला कि वो विपक्ष में नहीं शासन में हैं और और शासन में भाषण से ज़्यादा काम करने की ज़रूरत होती है.
पर कुछ भी कहें रौनक मेला लगा हुआ है. हर कोई अपना काम भूलकर दूसरे का काम उतराने के चक्कर में है. अगले 100 दिन भी क्या यही रिएलिटी शो चलेगा कोई नहीं जानता.
एक महान कवि जॉन एलिया के बकौल: बेदिली क्या यूं ही दिन गुज़र जाएंगे, सिर्फ़ ज़िंदा रहे हम तो मर जाएंगे.
ये भी पढ़ें:
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)