पोस्टकार्ड पर बनी पेंटिंग में देखिए पहला विश्व युद्ध

पहला विश्व युद्ध ख़त्म होने की तारीख़ को सौ साल पूरे हो गए हैं.

इस मौक़े पर दुनिया के 70 बड़े नेता पेरिस में एक समारोह में शामिल हुए. इनमें अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल थे.

दुनिया भर में इस मौक़े पर कई समारोह हो रहे हैं. ब्रिटेन में हुए समारोह में विश्व युद्ध लड़ चुके कई जवान भी शामिल हुए.

1914 से 1918 तक चले पहले विश्व युद्ध में क़रीब 97 लाख सैनिकों और एक करोड़ आम नागरिकों की मौत हो गई थी.

युद्ध के पश्चिमी मोर्चे से एक जर्मन सैनिक ने हाथ से पेंट किए गए कुछ पोस्टकार्ड भेजे थे. इन पोस्टकार्ड्स से पहले विश्व युद्ध के बारे में उनके नज़रिये और अनुभवों का पता मिलता है. आप भी देखिए ये पेंटिंग्स....

ओटो शूबर्ट (1892-1970) 22 साल के थे जब उन्हें युद्ध में लड़ने भेज दिया गया था. वे कला के छात्र थे. युद्ध के दौरान उन्होंने कई पोस्टकार्ड्स पर युद्ध से जुड़ी पेंटिंग बनाईं और उन्हें अपनी प्रेमिका इरमा को भेजते रहे.

ईप्रस और वर्डन के युद्ध के दौरान ओटो ने सेना की ओर से जारी किए गए दर्जनों पोस्टकार्ड पर युद्ध का यथार्थ और उसके डरावने रूप को उकेरा.

युद्ध ख़त्म होने के बाद शूबर्ट एक ग्राफ़िक आर्टिस्ट और बुक इलस्ट्रेटर के तौर पर स्थापित हुए.

फ़ील्ड पोस्टकार्ड (बेतारीख़/पोस्टमार्क 27 नवंबर 1915)

"मेरी प्यारी इरमा! बीती रात तुम्हारी चिट्ठी मिली. रोकाउ में इस वक़्त कितना सुंदर नज़ारा होगा. मैं वहां होता तो कितना अच्छा लगता. चलो अगली सर्दियों से उम्मीद बांधते हैं. क्या कहती हो? तुम्हारे मां-पिता को मेरा अभिवादन. मेरे पास फ़ील्ड पोस्टकार्ड कम बचे हैं. तुम चाहो तो कभी कभी मुझे वैसे पोस्टकार्ड भेज सकती हो, जैसे पिछली बार भेजे थे. उन पर पेंटिंग करना बहुत आसान है. उम्मीद है कि तुम अच्छी होगी? फिर लिखूंगा."

15 दिसंबर 1915, फ़्रांस का एक छोटा सा गांव

"प्यारी इरमा! हज़ारों अभिवादन. तुम्हारा ओटो. बस मुझे ख़ूब लिखती रहो. तुम्हारी तरफ़ से लंबे समय से कोई चिट्ठी नहीं मिली. कल फ़ील्ड पोस्टकार्ड मिल गए. मैंने तुम्हारे भाई को भी एक पोस्टकार्ड भेजा है. मैं सच में ज़िंदग़ी से तंग आ गया हूं!!"

23 दिसंबर 1915, दिन का सबसे सुंदर घंटा

"प्यारी इरमा, हज़ारों अभिवादन, ओटो. चिट्ठी पहुंच गई है. अच्छी सिगारें और बाकी सब. एक चिट्ठी. लेकिन अख़बार में शांति की झलक दूर-दूर तक नहीं मिलती?!"

16 जनवरी 1916

"मेरी प्यारी इरमा! आज सुबह तुम्हारी चिट्ठी मिली, अख़बार और पैकेज. मैं बहुत ख़ुश हो गया. अब मैं बहुत अच्छे से भोजन करूंगा. और ऐसा करते हुआ मैं सोचूंगा कि कितना ख़ूबसूरत होता अगर हम घर पर एक साथ भोजन कर सकते. तुम्हारा हज़ार बार अभिवादन. तुम्हारा ओटो."

25 फरवरी 1916

"प्यारी इरमा! जितना जल्दी हो सकेगा, मैं तुम्हारी चिट्ठियों का जवाब दूंगा. मैं अभी पूरी तरह ठीक महसूस नहीं कर रहा. पर उम्मीद है कि ये अस्थायी होगा. तुम्हारा ओटो."

1 अप्रैल 1916, फ़्रेंच सैनिकों की क़ैद में

"प्यारी इरमा, गर्म पश्चिम से ढेरों अभिवादन. तुम्हारा ओटो. घर पर भी अभिवादन. टहलने जाने के लिए सबसे ख़ूबसूरत मौसम."

सभी तस्वीरें पोस्टकार्ड्स फ्रॉम द ट्रेंचेस: अ जर्मन सोल्जर्स टेस्टिमनी ऑफ द ग्रेट वॉर से ली गई हैं, जिसे आइरीन ग्वेंथर ने लिखा है. यह किताब ब्लूम्सबरी विज़ुअल आर्ट्स से छपी है.

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