नेपाल: तूफ़ान में सात पर्वतारोहियों की मौत

गुर्जा पर्वत

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इमेज कैप्शन, दुनिया के चौदह सबसे ऊंचे पर्वतों में से आठ नेपाल में हैं.

पश्चिमी नेपाल में पर्वतरोहियों के एक दल के कैंप के बर्फ़ीले तूफ़ान की चपेट में आने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है.

पुलिस के मुताबिक पांच दक्षिण कोरियाई पर्वतारोही और चार नेपाली गाइड हिमालय के गुर्जा पर्वत पर बने कैंप में थे.

बचाव के लिए पहुंचे हेलीकॉप्टर के चालक दल ने कैंप में सात शव देखे हैं. लेकिन ख़राब मौसम की वजह से बचाव दल कैंप में रुक नहीं पाया.

दो पर्वतारोहियों का अभी पता नहीं चला है. उनके भी मारे जाने की आशंका ज़ाहिर की गई है.

पुलिस प्रवक्ता शैलेश थापा ने बीबीसी को बताया कि बचाव अभियान अभी चल रहा है.

उन्होंने कहा, "ये हादसा बर्फ़ीले तूफ़ान की वजह से हुआ है. हेलीकॉप्टर ने वहां लैंड करने की कोशिश की, लेकिन ख़राब मौसम की वजह से वो उतर नहीं पाया."

स्थानीय मीडिया की ख़बरों के मुताबिक दक्षिण कोरिया के चर्चित पर्वतारोही किम चांग हो भी मारे गए लोगों में शामिल हैं.

चांग हो ने दुनिया की चौदह सबसे ऊंची चोटियों को बिना बाहरी ऑक्सीजन लिए सबसे तेज़ी से फ़तह किया है.

किम चांग हो

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इमेज कैप्शन, किम चांग हो ने अपने पर्वतारोही अभियानों के लिए कई सम्मान पाए हैं

एक स्थानीय अधिकारी लीलाधर अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि बेस कैंप पूरी तरह नष्ट हो गया है.

उन्होंने कहा कि अगर मौसम सही रहा तो रविवार को एक और बचाव दल को मौके पर भेजा जाएगा.

पर्वतारोहियों के इस दल ने सात अक्तूबर को अपना अभियान शुरू किया था. इस अभियान के आयोजकों ने संपर्क टूट जाने के बाद अधिकारियों को सूचित किया.

पर्वतारोही बेस कैंप में मौसम सही होने का इंतज़ार कर रहे थे. शुक्रवार को उनका कैंप तूफ़ान की चपेट में आ गया.

उनका बेसकैंप 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित था और यहां से नज़दीकी गांव कम से कम एक दिन की चढ़ाई की दूरी पर है.

पर्वतारोहियों का ये दल गुर्जा पर्वत को फ़तह करने के अभियान पर था. 7193 मीटर ऊंचे इस पर्वत पर बेहद कम पर्वतारोही ही जा पाएं हैं.

ये हिमस्खलन प्रभावित धौलागिरी पर्वत के पास ही है. धौलागिरी दुनिया का सातवां सबसे ऊंचा पर्वत है.

हिमालय से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक साल 1996 के बाद से किसी ने भी गुर्जा पर्वत को फ़तह नहीं किया है.

सिर्फ़ 30 लोग ही इसके शिखर तक पहुंच पाएं हैं. दुनिया के सबसे ऊंचे एवरेस्ट पर्वत को अब तक आठ हज़ार से अधिक लोग फ़तह कर चुके हैं.

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