दुनिया के इस अमीर देश में लोग क्यों हो रहे हैं बेघर?

अमरीका, बेघर, मंहगाई, संकट

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अमरीका में लोगों का बेघर होना एक बड़ा संकट बनता जा रहा है. हर उम्र के लोग सड़कों पर रहने को मजबूर हैं. ज़मीन को अपना बिस्तर बना चुके ये लोग एक बड़ी बरसाती में अपना सामान लिए घूमते हैं.

अमरीका के विभिन्न शहरों में रह रहे ये लोग देश की समृद्धि से पीड़ित हैं. तेजी से बढ़ रहे इस संकट पर प्रशासन काबू पाने की कोशिश में जुटा हुआ है लेकिन जानकारों का मानना है कि ये स्थिति अभी और बदतर होगी.

बीबीसी पत्रकार ह्यूगो बाचेगा ने इस बढ़ते संकट को क़रीब से समझने के लिए अमरीका के पश्चिमोत्तर शहर पोर्टलैंड का दौरा किया. वो कहते हैं, '' गुलाबों, ख़ूबसूरत मौसम और समृद्ध संस्कृति वाला ये शहर नई सोच का केंद्र भी माना जाता है. सिलिकन वैली की तर्ज पर ही इसे सिलिकन फॉरेस्ट कहा जाता है. इस बड़े बदलाव से पहले इस शहर की टेक कंपनियों और बेहतर नौकरियों ने लोगों को लुभाया था. लेकिन उम्मीद मुताबिक चीज़े पाने का सौभाग्य यहां कई लोगों को नहीं मिला.''

मंहगा है रहना

पोर्टलैंड में जो हुआ है वही कहानी अन्य अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स और सेन फ़्रांसिस्को की है. इन शहरों में घरों की मांग तेजी से बढ़ी लेकिन उसके मुकाबले जगहों के उपलब्ध ना होने के कारण यहां घरों की कीमतें आसमान छू रही हैं. हुआ ये कि जो आर्थिक रूप से कमज़ोर लोग थे उनसे घर भी छिन गया. अब ये लोग इन शहरों में रहने में समर्थ नहीं हैं.

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इमेज कैप्शन, न्यूयॉर्क में एक अनुमान के मुताबिक 75,000 लोग बेघर हैं.

कई लोगों को उनके घर-परिवार के लोगों, दोस्तों ने, सरकारी योजनाओं या किसी संस्था ने इस संकट से बचाया लेकिन जो इससे महरूम रह गए वो अब सड़कों पर जिंदगी बीता रहे हैं.

पोर्टलैंड के मेयर टेड व्हिलर कहते हैं, '' ये सही है कि अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत हुई है. लेकिन असमानता तेज़ी से बढ़ी है. इससे पता चलता है कि अर्थव्यवस्था का लाभ कुछ हाथों तक ही सीमित है. ''

वे आगे कहते हैं, '' पूरे अमरीका में हमारे यहां सबसे ज़्यादा असामनता है. जिसका असर लोगों पर पड़ा है.'' कई जानकार अमरीका की इस स्थिति को '' अ टाइम बम'' भी मानते हैं.

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अमरीका के पश्चिमी तटीय शहरों में बेघरों की संख्या बढ़ी है. ये ऐसे शहर हैं जहां उच्च स्तरीय पढ़ाई करके नौजवान नौकरी की तलाश में आते हैं. कितने लोग सड़कों पर रहने को मजबूर हैं इनका कोई सटीक आंकड़ा नहीं है लेकिन एक अनुमान के मुताबिक़ 553,742 लोग साल 2017 में अमरीका में बेघर रहे. आवास और शहरी विकास विभाग के मुताबिक ये नंबर पिछले सात सालों में पहली बार बढ़े हैं. लेकिन ये संख्या अभी भी अमरीका के साल 2010 के आंकड़ों से लगभग 13 फ़ीसदी कम है.

लॉस एंजिल्स की बात करें तो वहां साल दर साल संख्या में इज़ाफ़ा हो रहा है. इस शहर में 50 हज़ार से ज़्यादा लोग बेघर हैं. वहीं न्यूयॉर्क में ये संख़्या 75 हज़ार है.

मूलभूत ज़रूरतों के लिए संघर्ष

37 वर्षीय जोसेफ़ जॉर्डन एक ट्रांसजेंडर हैं और हेज़लनट ग्रोव नाम के एक बेघरों के कैंप में रहते हैं. इस कैंप के साल 2015 में बनाया गया था. ये वही साल था जब पोर्टलैंड में बेघरों का संकट बड़ा हुआ और यहां राज्य में इमरजेंसी लगाई गई. वो बीबीसी से कहते हैं, ''ये बेहद भयानक है, मैं हर रोज़ ऐसे लोगों से मिलता हूं जो जिंदगी में बहुत कुछ देख चुके हैं. बेघरों की संख्या यहां बढ़ती ही जा रही है.''

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इमेज कैप्शन, कैंप में रहने वाले जोसेफ़ जॉर्डन

''सड़कों पर रहने का मतलब है आपको हर तरह की स्थिति से निपटना होता है. आप चूहों के बीच सोते हैं. आप मूलभूत चीजों के लिए संघर्ष करते हैं. आप पानी मिलने पर खुश हो जाते हैं. आप जरूरत पर शौचालय जा सकें ये भी बड़ी बात है.''

पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के मुताबिक यहां कम तनख्वाह वाली नौकरियों में कटौती का कारण तकनीक हो सकती है.

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पोर्टलैंड सहित अन्य अमरीकी शहरों में बेघरों का ये संकट बेहद विकराल रूप लेकर सामने आया है. इन शहरों में रहने वाले लोग पेशाब की बदबू, सार्वजनिक स्थानों पर शौच और लावारिस सामानों से परेशान हैं. ये एक ऐसी स्थिति है जो धीरे-धीरे पनपते हुए यहां तक पहुंची है.

क्या कहती है यूएन की रिपोर्ट?

हालिया दशकों में सस्ते घरों और मानसिक स्वास्थ्य की स्कीमों में सरकार से मिलने वाली छूट में की कई कटौती ने भी लोगों को बेघर बनाया है.

संयुक्त राष्ट्र के ग़रीबी और मानवाधिकार ईकाई के लिए काम करने वाले फ़िलिप एल्सटन ने अमरीका के विभिन्न शहरों में पिछले साल दिसंबर में सफ़र किया और एक रिपोर्ट बनाई. उन्होंने बताया, ''बहुत जल्द लोगों अमरीकी लोगों का सपना उनकी आंखों का धोखा बनकर रह जाएगा.''

''वर्तमान सरकार सब्सिडियों में कटौती कर रही है. खासकर घरों की बात करें तो सरकार छूट कम कर रही हैं. ऐसे में ये स्थिति और बुरी होने वाली है.''

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कई अन्य अमीर और मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों को भी आने वाले दिनों में बेघरों की समस्या से जूझना पड़ सकता है. अगर सरकारी योजनाएं कठोर होंगी तो कमज़ोर लोगों पर इसका असर पड़ेगा. बढ़ती मंहगाई और बेरोज़गारी इसके बड़े कारण हैं.

हेज़लनट कैंप में रहने वाले जोसेफ़ चाहते हैं कि लोगों को टायलेट पेपर, शैंपू, कूड़े के बस्तों के लिए दान देना चाहिए ताकि इन बेघरों की मदद की जा सके.

वो कहते हैं, '' आप दुनिया के सबसे अमीर देश में रहते हैं लेकिन आप बेघर हैं ये सही नहीं है.''

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