You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
उर्दू प्रेस रिव्यू: भारतीय जनरल के बयान पर पाकिस्तानी मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत की घोषणा और फिर उसके रद्द किए जाने की ख़बर सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रही. इसके अलावा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का सऊदी दौरा भी ख़ूब चर्चा में रहा.
पाकिस्तान के नव-निर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ख़त लिखकर भारत-पाकिस्तान बातचीत दोबारा बहाल करने का आग्रह किया था.
भारत ने इमरान ख़ान के सुझाव को स्वीकार करते हुए घोषणा कर दी थी कि सितंबर के आख़िरी हफ़्ते में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के इतर भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्री भी मुलाक़ात करेंगे.
हालांकि भारतीय विदेश विभाग के प्रवक्ता रवीश कुमार ये साफ़ कर दिया था कि ये केवल मुलाक़ात होगी और इसे किसी भी हालत में भारत-पाकिस्तान के बीच समग्र वार्ता की शुरुआत नहीं कहा जा सकता
ग़ौरतलब है कि 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान से समग्र वार्ता की शुरुआत की थी जो कि 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमले के बाद से ही बंद है, क्योंकि उसके बाद से भारत ने समग्र वार्ता बहाल करने से इनकार कर दिया है.
समग्र वार्ता न सही, केवल विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात ही सही, लेकिन सिर्फ़ 24 घंटे के अंदर भारत ने प्रस्तावित बातचीत रद्द कर दी.
'भारत का घमंडी और नकारात्मक रुख़'
अख़बार जंग के मुताबिक़ पाकिस्तान ने भारत के इस रवैये पर अफ़सोस जताया है.
अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान ने काफ़ी सख़्त लहजे का इस्तेमाल करते हुए ट्वीट किया है.
उनका कहना था, ''भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता बहाल करने के मेरे आग्रह पर भारत का घमंडी और नकारात्मक रुख़ देखकर मुझे बहुत निराशा हुई. मैंने अपनी ज़िंदगी में कई छोटे लोगों को ऊंचे पदों पर बैठे हुए देखा है, जिनमें मामले के बड़े अर्थ को देख पाने की समझ नहीं होती.''
अख़बार जंग के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने भी बातचीत रद्द किए जाने पर अपनी आपत्ति जताई है.
क़ुरैशी का कहना था, ''भारत-पाकिस्तान समस्या के समाधान से पूरे क्षेत्र को लाभ होगा. पाकिस्तान ने अच्छी नीयत के साथ बातचीत की पेशकश की थी लेकिन भारत के पीछे हटने पर अफ़सोस हुआ.''
क़ुरैशी ने भारत पर हमला करते हुए कहा कि भारत ने राजनयिक तौर-तरीक़ों को भी रौंद डाला है जिसकी मिसाल नहीं मिलती.
जनरल के बयान पर हंगामा
भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के उस बयान का भी पाकिस्तान के सभी अख़बारों में ज़िक्र है जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान को दर्द महसूस कराने का समय आ गया है.
अख़बार जंग के अनुसार जनरल रावत ने दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भारतीय सेना की कार्रवाई में हमेशा ही सरप्राइज़ एलिमेंट होता है.
पाकिस्तान ने इसे भारत की गीदड़ भभकी क़रार दिया है.
अख़बार जंग के अनुसार पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर का कहना था, ''जंग उस वक़्त होती है जब कोई एक इसके लिए तैयार न हो. हम जंग के लिए हमेशा तैयार हैं. अगर ऐसा वक़्त आया या किसी ने सब्र का इम्तिहान लिया तो क़ौम को मायूस नहीं होने देंगे.''
पाकिस्तान में विपक्षी पार्टी के नेता और मुस्लिम लीग (नून) के अध्यक्ष शहबाज़ शरीफ़ ने भी जमकर भारत पर हमला बोला.
अख़बार जंग के अनुसार शहबाज़ शरीफ़ का कहना था, ''भारतीय फ़ौज अपने जंगी जुनून को लगाम दे. इस पूरे क्षेत्र को बेअमनी की भेंट न चढ़ाए.''
इमरान का सऊदी दौरा
इसके अलावा इमरान ख़ान का सऊदी अरब का दौरा भी सुर्ख़ियों में रहा.
अख़बार एक्सप्रेस ने सूचना एंव प्रसारण मंत्री फ़व्वाद चौधरी के हवाले से ख़बर दी है कि इमरान ख़ान की सऊदी यात्रा के दौरान इस बात पर निर्णय हुआ है कि सऊदी अरब सीपेक (चाइना-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर) में तीसरा सामरिक एंव आर्थिक पार्टनर होगा.
अख़बार के अनुसार मंत्री ने बताया कि इस बारे में चीन से बातचीत हो चुकी है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार इमरान के सऊदी दौरे के बाद सऊदी अरब ने पाकिस्तान में 10 करोड़ डॉलर निवेश करने की घोषणा की है.
पाकिस्तानी अख़बारों में ये ख़बर भी पूरे हफ़्ते छाई रही कि अमरीका पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य मदद दोबारा बहाल करने पर विचार कर रहा है.
अख़बार दुनिया के अनुसार ट्रम्प प्रशासन में ऐसे कई लोग हैं जो इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि इमरान ख़ान के सत्ता में आने के बाद अमरीका के लिए ये बेहतरीन मौक़ा है कि वो अपने मुश्किल लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण सहयोगी से संबंध दोबारा बहाल करे और उसे मिलने वाली आर्थिक मदद भी दोबारा शुरू की जाए.
ट्रम्प ने साल 2018 के शुरू में अमरीका की तरफ़ से पाकिस्तान को मिलने वाली सैन्य मदद पर रोक लगा दी थी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)