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एक लड़की की दास्तां, जो टकरा गई आईएस किडनैपर से
- Author, विक्टोरिया बिज़ट और लाइस डूसे
- पदनाम, बीबीसी न्यूज
कोई भी व्यक्ति एक बार क़ैद से छूटने के बाद दोबारा ऐसा न होने की दुआ मांगता है. लेकिन, अगवा करने वाले से एक बार फिर सामना हो जाए तो फिर से वो दहशत और घबराहट ज़हन में दौड़ जाती है.
ऐसा ही हुआ एक याज़िदी लड़की के साथ जो लंबे समय तक चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट की गुलामी में रहीं.
अश्वाक़ जब 14 साल की थीं तो उत्तरी इराक़ में आईएस लड़ाकों ने हमला बोल दिया था. उन्होंने हजारों महिलाओं को सेक्स स्लेव बनाया, जिसमें अश्वाक़ भी थीं.
आईएस लड़ाकों ने अश्वाक़ को 100 डॉलर में अबू हुमाम नाम के शख़्स को बेच दिया.
हुमाम के यहां अश्वाक़ रोज यौन हिंसा और प्रताड़ना से गुजरतीं. तीन महीने वो इसी खौफ़नाक और दर्द भरे माहौल में रहीं और फिर एक दिन किसी तरह बचकर भाग गईं.
इसके बाद अश्वाक़ अपनी मां और एक भाई के साथ जर्मनी आ गईं. उन्होंने सोच लिया कि अब वो पीछे मुड़कर नहीं देखेंगी और नई ज़िंदगी की शुरुआत करेंगी.
वह एक नई शुरुआत कर ही रही थीं कि कुछ महीने पहले उनका उसी दहशत से सामना हो गया. अश्वाक़ एक सुपरमार्केट के बाहर एक गली में थीं कि तभी उन्होंने कहीं से अपना नाम सुना.
जब किडनैपर से टकराईं
अश्वाक़ बताती हैं, ''स्कूल जाते हुए अचानक एक कार मेरे पास आकर रुकी. वो आगे की सीट पर बैठा था. उसने मुझसे जर्मन भाषा में बात की और पूछा: क्या तुम अश्वाक़ हो? मैं बुरी तरह डर गई और कांपने लगी. पर मैंने कहा कि "नहीं, आप कौन हैं?"
"उस आदमी ने कहा कि मैं जानता हूं कि तुम अश्वाक़ हूं और मैं अबू हुमाम हूं. फिर अबू हुमाम उनसे अरबी भाषा में बात करने लगा और कहा कि झूठ मत बोलो. उसने कहा कि मैं जानता हूं कि तुम कहां और किसके साथ रहती हो. वह जर्मनी में मेरे बारे में सबकुछ जानता था."
वह कहती हैं, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे जर्मनी में ऐसा कुछ देखना पड़ेगा. मैं उस मारपीट और दर्द को भूलने के लिए अपना परिवार और देश छोड़कर जर्मनी आ गई थी. मैं उस शख़्स से कभी मिलना नहीं चाहती थी."
फिर लौटीं इराक़
जर्मनी के फेडरल प्रोसिक्यूटर कहते हैं कि अश्वाक़ ने घटना के पांच दिन बाद इसके बारे में पुलिस को बताया.
अश्वाक़ कहती हैं कि उन्होंने पुलिस को उस दिन की घटना और इराक़ के खौफ़नाक दिनों के बारे में भी सबकुछ बता दिया. उन्होंने पुलिस को सुपरमार्केट की सीसीटीवी देखने के लिए भी कहा लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
तब अश्वाक़ ने पूरा महीना इंतजार किया लेकिन इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.
इसके बाद अश्वाक़ फिर से उत्तरी इराक़ लौट गईं. उन्हें अबू हुमाम के मिलने का डर तो था ही लेकिन अपनी चार बहनों से मिलने की उम्मीद भी थी. उनकी बहनों को भी आईएस लड़ाकों ने बंदी बना लिया था.
अश्वाक़ कहती हैं, "अगर आप इससे नहीं गुज़रे हैं तो आप नहीं जान पाएंगे कि ये कैसा होता है. दिल में एक धक्क से होती है और आप कुछ समझ नहीं पाते. जब एक लड़की के साथ आईएस ने रेप किया हो और फिर वही शख़्स सामने आ जाए तो आप सोच भी नहीं सकते कि कैसा लगता है."
और भी हैं मामले
जर्मन की शीर्ष अदालत की प्रवक्ता फ्रॉक खूलर ने कहा कि पुलिस ने ई-फिट इमेज के ज़रिए और अश्वाक़ की बयान के आधार पर अबू हुमाम को ढूंढ़ने की पूरी कोशिश की है लेकिन अभी तक उसका पता नहीं चला है.
पुलिस ने जून में अश्वाक़ से फिर से संपर्क करने की कोशिश की थी लेकिन तब तक वो इराक़ चली गई थीं.
हालांकि, जर्मनी के एक्टिविस्ट कहते हैं कि यह एक अकेला मामला नहीं है.
याज़िदी अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था हावर डॉट हेल्प की संस्थापक और एक्टिविस्ट डूज़ेन टेकल कहती हैं कि उन्होंने ऐसे कई मामले सुने हैं जिनमें याज़िदी शरणार्थी लड़कियों ने जर्मनी में आईएस लड़ाकों को पहचाना है.
अश्वाक़ भी कहती हैं कि उन्होंने भी आईएस के कैद से भागकर आई अन्य याज़िदी लड़कियों से भी ऐसी बातें सुनी हैं.
हालांकि, सभी मामले पुलिस के पास नहीं पहुंचे हैं.
"मैं कभी जर्मनी नहीं जाऊंगी"
कुर्दिस्तान वापस जाकर याज़िदी कैम्प में रह रहीं अश्वाक़ अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं लेकिन वो और उनका परिवार देश छोड़ना चाहते हैं.
अश्वाक़ के पिता कहते हैं, ''हमें आईएस के लोगों से बहुत डर लगता है.''
लेकिन, जर्मनी में हुई घटना ने अश्वाक़ पर इतना गहरा असर डाला है कि वो कहती हैं, "अगर पूरी दुनिया ख़त्म भी हो जाएगी तो भी वो जर्मनी नहीं जाएंगी."
कई अन्य यज़िदियों की तरह अब अश्वाक़ का परिवार भी ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए आवेदन कर रहा है. ये आईएस लड़कों द्वारा अगवा की गई लड़कियों के लिए चलाए गए एक विशेष कार्यक्रम के तहत है.
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