मैं हिट लिस्ट में सबसे ऊपर, गठबंधन की सरकार नहीं बनाऊंगाः इमरान ख़ान

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पाकिस्तान में 25 जुलाई को आम चुनाव होने जा रहे हैं और राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है.
पाकिस्तान में अगली सरकार किसकी होगी, इसे लेकर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं. अनुमान के मुताबिक वहां कड़ा मुक़ाबला पीएमएलएन, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और तहरीक-ए-इंसाफ़ के बीच होगा.
हालांकि पीएमएलएन यानी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ जेल में हैं और उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी का नेतृत्व उनके भाई शाहबाज़ शरीफ़ कर रहे हैं. वहीं पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीसी) का नेतृत्व बेनज़ीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो ज़रदारी और तहरीक-ए-इंसाफ़ की कमान पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान के हाथों में है.
बीबीसी उर्दू संवाददाता उस्मान ज़ाहिद को दिए एक ख़ास इंटरव्यू में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के नेता इमरान ख़ान चुनाव से जुड़े कई पहलुओं को सामने रखते हैं.
पढ़ें, उन्होंने क्या क्या कहा?
नवाज़ शरीफ़ के पाकिस्तान आते ही दहशतगर्दी शुरू हो गई. जैसे ही नवाज़ यहां पहुंचे मुझे भी टारगेट किया गया. मुझे हर जगह बताया जाता है कि आप अपना ध्यान रखें. मैं हिट लिस्ट में सबसे ऊपर हूं और मुझे टारगेट किया जा रहा है.

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ज़ाहिर है ये चुनाव प्रचार को ख़राब करने का एक मकसद है. प्रचार न करने का नुक़सान केवल तहरीक-ए-इंसाफ़ को होगा. बाकी पार्टी तो चुनाव प्रचार ही नहीं कर रहीं, वो सिर्फ़ चारदीवारी में ही जलसे कर रही हैं.
तहरीक-ए-इंसाफ़ अकेली पार्टी है जो जनता के बीच पहुंच रही है. मुझे लगता है ये कैम्पेन रोकने की एक साजिश थी.
पीटीआई का प्रचार और चुनावी विश्वसनीयता
पिछले चुनाव में भी मुझे मारने की धमकियां मिली थीं. 2013 के चुनाव से पहले जब मैं गिरा था तब मुझे कमांडो मिले हुए थे क्योंकि मारने की धमकियां मिली हुई थी. (इमरान खान मई 2013 के दौरान लाहौर में एक चुनावी सभा को संबोधित करने के लिए मंच पर चढ़ने के दौरान लिफ्ट से गिर गए थे)
धमकियां तब भी मिल रही थीं और अभी भी मिल रही हैं. लेकिन इससे चुनाव की विश्वसनीयता पर क्या फ़र्क पड़ेगा.

चुनाव में अब कुछ ही दिन ही रह गए हैं. अब चुनाव जहां पहुंच चुका है, चाहे मुझे जो भी धमकियां मिली रही हों, चुनाव तो लड़ना ही है.
चुनाव में जो मुख्यधारा की पार्टी है वो इसलिए अभी डरी हुई है क्योंकि उन्हें पता है तहरीक-ए-इंसाफ़ आगे बढ़ रही है, हमारे जलसों में लोग आ रहे हैं और हमारा ग्राफ़ ऊपर जा रहा है.
पब्लिक ओपिनियन हमारे पक्ष में जा रहा है जबकि दूसरी तरफ़ मुख्यधारा की पार्टियों के जलसों (जुलूस) में लोग आ ही नहीं रहे. वो लोग (दूसरी पार्टी के लोग) बाहर ही नहीं निकल सकते क्योंकि उनकी कैम्पेन को लीड करने वाला कोई नहीं है. इसलिए उन्होंने मैच हारने से पहले ही शोर मचाना शुरू कर दिया है कि चुनाव ठीक नहीं हो रहा है.

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हुकूमत बनाने के लिए किस पार्टी का साथ ले सकते हैं...
पाकिस्तान की ख़राब अर्थव्यवस्था और देश के मुश्किल वक्त में यदि त्रिशंकु संसद आई यानी किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो ये पाकिस्तान की बड़ी बदकिस्मती होगी.
त्रिशंकु संसद हमेशा कमज़ोर होती है और पाकिस्तान को एक ताक़तवर हुकूमत की ज़रूरत है जो बड़े फ़ैसले कर सके.
देश में सरकार न मुस्लिम लीग के साथ बनेगी और न ही पीपीपी से क्योंकि इन दोनों पार्टियों के नेता पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं. अगर ऐसी नौबत आई कि सरकार गठबंधन से ही बनेगी तो हम ना मुस्लिम लीग के साथ जाएंगे, ना ही पीपुल्स पार्टी के साथ. हम विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे.
इनके साथ इस्लाह (सुधार) नहीं हो सकती, सरकार बना कर इदारों (संस्थाओं) को मज़बूत नहीं किया जा सकता. ना तो हम भ्रष्टाचार रोकने के लिए कुछ कर पाएंगे और ना ही फेडेरल ब्यूरो ऑफ़ रेवेन्यू को दुरुस्त किया जा सकेगा.
इन्होंने इन्हीं संस्थाओं को तबाह किया है, चोरी करने के लिए. इसलिए कोशिश तो यही है कि इनके बिना ही सरकार बन सके, अगर नहीं बनती तो विपक्ष में बैठेंगे.
पिछली आदर्शवादी बातें इस बार कहां तक मुमकिन हैं...
2013 के बाद मैंने असेंबली में खड़े हो कर कहा था कि चार चुनाव क्षेत्रों में मतों की दोबारा गिनती की जाए ताकि 2018 का चुनाव ठीक से लड़ा जा सके. लेकिन तब ये सब मेरे ख़िलाफ़ खड़े हो गए. क्योंकि सबने मिलकर धांधली की थी.

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आख़िर में मुझे अकेले सड़कों पर जा कर बैठना पड़ा. मैंने 126 दिन का धरना दिया क्योंकि ये छानबीन के लिए तैयार नहीं हो रहे थे.
अब वही जमात (चुनाव में धांधली को लेकर) शोर मचा रही हैं जबकि अभी चुनाव हुए भी नहीं हैं.
मैं इनसे पूछना चाहता हूं कि जब मैं कह रहा था कि जांच करके कोई ऐसा क़ानून पास करते हैं, जो ग़लतियां पहले हुई हैं अब नहीं होनी चाहिए लेकिन तब उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया.
अब उनको डर लगा हुआ है कि वो चुनाव हारने जा रहे हैं. उन्हें ये भी डर हैं कि इस बार अंपायर इनके अपने नहीं है. पिछली बार इन्होंने अपने अंपायरों से मैच खेला था.
कार्यवाहक सरकार इनकी थी, इलेक्शन कमीशन इनके साथ था, चीफ़ जस्टिस इनके साथ थे, आरओ (रिटर्निंग ऑफ़िसर) इनके साथ थे. इन सबने मिलकर इलेक्शन में धांधली की थी.
प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे पहला काम...
सबसे पहला काम होगा अर्थव्यवस्था में सुधार करना और पाकिस्तानी रुपये की स्थिति को बेहतर करने की कोशिश करना, जिसकी वजह से रुपया गिर रहा है. इसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है और आवाम को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है.
रुपया जब इतनी तेज़ी से गिरेगा तो पेट्रोल, बिजली, गैस सब पर महंगाई का असर होगा यानी आयात महंगा हो जाएगा. जब सब महंगा हो जाएगा तो आम इंसान तो पिसेगा ही. इसलिए सबसे पहले आते ही हमें मंहगाई और अर्थव्यवस्था की ख़राब स्थिति को सुधारना ही होगा.
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