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क्या भारत में धर्म भी डिजिटल युग में प्रवेश कर चुका है?
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई से लौट कर
दक्षिण मुंबई के भीड़-भाड़ वाले ज़ावेरी बाज़ार के बीच शहर के सबसे पुराने धार्मिक स्थानों में से एक मुम्बा देवी मंदिर भक्तों से हमेशा भरा रहता है.
सुबह हो या शाम, मुम्बा देवी के दर्शन करने सैकड़ों श्रद्धालु यहां आते हैं. दिन में कई बार आरती होती है, जिसमे जवान, बूढ़े, मर्द और औरत, सभी शामिल होते हैं.
वे वहां भरपूर आध्यात्मिक संतुष्टि प्राप्त करने जाते हैं. सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, श्रद्धालु माहौल का भी लुत्फ़ उठाते हैं.
और अगर आप चाहें तो इस मंदिर में होने वाली पूजा और आरती के दर्शन घर बैठे अपने मोबाइल फ़ोन के स्क्रीन पर भी कर सकते हैं और वो भी लाइव.
मुम्बा देवी मंदिर के प्रबंधक हेमंत यादव कहते हैं, "देखिए आज दुनिया इतनी तेज़ी से भाग रही है कि लोगों को हर चीज़ झटपट चाहिए. तो ऐप के द्वारा लोगों को अगर माता जी का दर्शन चाहिए तो वो भी उन्हें मिलना चाहिए."
अगर आप धार्मिक हैं तो मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर जाए बग़ैर अपने मोबाइल, डेस्कटॉप या फिर टीवी के स्क्रीन पर धार्मिक चीज़ें देख सकते हैं, रिकॉर्डेड भी और सीधा प्रसारण भी.
अपने मोबाइल फोन के स्क्रीन पर आप भगवत गीता का पाठ देख सकते हैं. गुरु ग्रंथ साहिब, बाइबिल और क़ुरान के पाठ भी देख और सुन सकते हैं.
देश में पूजा, विदेश में दर्शन
भारत का समाज धार्मिक माना जाता है, जहाँ सभी मज़हब के हज़ारों धार्मिक स्थल हैं. मंदिरों और मस्जिदों में भीड़ होना आम बात है. लेकिन ये समाज बदल रहा है. इसके धार्मिक रीति-रिवाज में भी बदलाव हो रहे हैं.
कुछ मंदिरों में लाइव पूजा प्रसारण का समय इस तरह से तय किया जाता है कि अमरीका और यूरोप में रहने वाले हिन्दू उन्हें अपने मोबाइल पर लाइव देख सकें. शेमारू एंटरटेनमेंट कंपनी के सीईओ हिरेन गडा कहते हैं कि नए मोबाइल ऐप लोगों को धर्म से जोड़ने या वापस लाने का काम भी कर रहा है.
स्मार्टफ़ोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म इस रुझान के ज़िम्मेदार हैं. भारत में मोबाइल फ़ोन उपभोक्ताओं की संख्या करीब 100 करोड़ है, जिनमे 35 करोड़ लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं. मोबाइल पर फ़िल्म और सीरियल देखने का चलन भी बढ़ा है.
मुंबई के युवा अमय प्रभु पूजा-पाठ में विश्वास रखते हैं लेकिन दिन भर दफ़्तर में बिताने के कारण और सुबह जल्दी उठ कर मंदिर न जाने की वजह से इसे रोज नहीं कर पाते हैं. मोबाइल की दुनिया में अब उनकी यह कठिनाई दूर हो गई है.
दर्जनों ऐप
उन्होंने कुछ समय पहले शेमारू एंटरटेनमेंट कंपनी का ऐप "हरी ॐ" अपने मोबाइल फ़ोन पर डाउनलोड किया और फिर पूजा-पाठ देखना शुरू कर दिया.
वो कहते हैं, "ऑफ़िस की वजह से मंदिर नहीं जा सकता लेकिन सुबह चार बजे की जो आरती होती अपने फ़ोन पर देख लेता हूं. मैं इससे जुड़ाव महसूस करता हूं. ऐसा लगता है कि मैं सच में वहां हूं. लाइव दर्शन देख कर बहुत अच्छा लगता है."
भारत में लाखों लोग "हरी ॐ" ऐप की तरह दर्जनों धार्मिक और आध्यात्मिक ऐप के ज़रिए अपने मोबाइल फ़ोन पर लाइव आरती देखते हैं. ऐप का प्रचलन सिर्फ़ हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरे धर्म के लोग भी इस तरह के ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं.
शेमारू ने कुछ सप्ताह पहले रमज़ान में मुस्लिम समुदाय के लिए इबादत नामी ऐप लांच किया था. ये ऐप एंड्रायड मोबाइल के लिए बनाया गया था. युवती फैक़ाह शेख ने रमज़ान में इसका भरपूर फ़ायदा उठाया.
उन्होंने कहा, "मैंने यूट्यूब और इंस्टग्राम पर इस ऐप के लॉन्च का वीडियो देखा था. इसकी काफ़ी चर्चा हुई थी. तो मैंने भी ये ऐप अपने फ़ोन पर डाउनलोड कर लिया. यह बहुत आकर्षक है. मैं इसमें मक्का से लाइव प्रसारण देख पाती हूं. रमज़ान के दौरान मैंने इस ऐप पर काफ़ी वीडियो देखे."
एक अनुमान के मुताबिक देश में एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर 100 से अधिक ऐप लॉन्च हो चुके हैं. 'हरी ॐ' और 'इबादत' के अलावा हाउस ऑफ़ गॉड, माई मंदिर और मंगलदीप भक्तों में लोकप्रिय है.
नया अनुभव
मोबाइल ऐप का बाजार नया है. लेकिन मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर और अजमेर की दरगाह जैसे लोकप्रिय धार्मिक स्थलों से ऑनलाइन पूजा और हवन सेवा पहले से मौजूद है. स्काइप के ज़रिए मंदिर के पुजारी और भक्तों के बीच धार्मिक संस्कार का आदान-प्रदान भी होता है.
धार्मिक मोबाइल ऐप की शुरुआत हाल में हुई है लेकिन इसके बढ़ रहे यूजर को देखते हुए बड़ी-बड़ी कंपनियां इसे बनाने में लगी है.
शेमारू फिल्म और मनोरंजक कंटेंट बनाने वाली एक पुरानी कंपनी है लेकिन इसने कुछ सालों में धार्मिक कंटेंट भी बनाना शुरू किया है. ये कंटेंट वो अपने ऐप पर लाकर भक्तों तक पहुंचा रही है. मोबाइल ऐप के ज़रिए मंदिर, मस्जिद और दरगाह का दर्शन लोगों के लिए एक नया अनुभव है.
धार्मिक सामानों का बाज़ार
इस उद्योग के जानकारों के अनुसार भारत में धार्मिक और आध्यात्मिक वस्तुओं का बाज़ार करीब 40 अरब डॉलर का है. ई-कॉमर्स इस व्यापर का एक बड़ा हिस्सा है.
मोबाइल ऐप लॉन्च के पीछे पैसा कमाना भी एक वजह रहती है. हिरेन गडा कहते हैं, "हमारा बिज़नेस मॉडल ये है कि ऐप पर कंटेंट फ्री है. इसमें अन्य सेवाएं भी हैं. जैसे मन्नत सेवा, पूजा सेवा, प्रसाद या दान सेवा. इन सब के लिए लोगों को पैसे देने होते हैं."
अजमेर शरीफ दरगाह से लेकर मुम्बा देवी मंदिर के अधिकारियों को ऐप पर सीधा प्रसारण के लिए तैयार करना कितना कठिन था?
हिरेन गडा कहते हैं कि उन्हें कोई अधिक मुश्किल नहीं हुई क्योंकि धार्मिक स्थलों के अधिकारियों के पास भी तो मोबाइल फ़ोन होता है. मुम्बा देवी मंदिर के प्रबंधक हेमंत यादव कहते हैं कि उन्होंने ऐप पर प्रसारण का प्रस्ताव तुरंत स्वीकार कर लिया था.
क्या धर्म स्थलों पर जाकर पूजा करना और ऐप पर दर्शन करना एक ही तरह का अनुभव देता है?
हेमंत यादव कहते हैं, "नहीं, मंदिर में आकर दर्शन करना और ऐप पर दर्शन करने में ज़मीन और आसमान का फ़र्क़ है."
मुम्बा देवी में आईं सुषमा बादगत कहती हैं कि मंदिर में आना एक अलग तरीके का अनुभव प्रदान करता है. वो कहती हैं, "देखिए आप कितना भी ऐप पर दर्शन कर लें, जब आप माता के सामने खड़े होते हैं तो शरीर में कंपन जैसा महसूस होता है."
हिरेन गडा भी ये तर्क मानते हैं लेकिन उनका कहना है कि आज की भागती दौड़ती ज़िंदगी में मंदिर या दरगाह सभी के लिए जाना मुश्किल है. हज करने के लिए सबके पास पैसे नहीं होते, कम से कम धार्मिक ऐप के ज़रिए इन मंदिरों और धार्मिक स्थलों के लिए श्रद्धा को ज़िंदा तो रख सकते हैं.
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