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ट्रेड वॉर में चीन का ज़ख़्म हुआ हरा, अमरीका अड़ा
- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस साल दो मार्च को एक ट्वीट किया था. उन्होंने इस ट्वीट में कहा था कि अमरीका आसानी से ट्रेड वॉर जीत सकता है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के ख़िलाफ़ जो ट्रेड वॉर शुरू किया था उसका दायरा चीन से आगे निकल चुका है. इसकी आग में अमरीका के सहयोगी देश भी तप रहे हैं. ज़ाहिर भारत भी इसकी चपेट में आ गया है.
इसके बावजूद इस जंग को मुख्य रूप से चीन और अमरीका के बीच देखा जा रहा है. अमरीका की चीन के ख़िलाफ़ शुरू हुई कारोबारी जंग पांचवें महीने में पहुंच चुकी है.
अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि इस जंग को कौन इन्जॉय कर रहा है और कौन दर्द झेल रहा है. चीन और अमरीका की इस जंग में उस तथ्य को लेकर दुनिया भर के अर्थशास्त्री सहमत हैं कि दोनों देशों के कारोबारी संबंध में अमरीका नुक़सान में है.
ट्रेड वॉर में हारता चीन
ऐसे में अगर ट्रंप सोचते हैं कि इस कारोबारी जंग में जीत अमरीका की होगी तो इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए.
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में पेकिंग यूनिवर्सिटी में ग्वांगचु स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के फाइनेंस के प्रोफ़ेसर माइकल पेटिस का कहना है कि ट्रेड वॉर में उसी देश की हार होती है जो फ़ायदे का व्यापार करता है.
यहां अमरीका नुक़सान में है इसलिए ट्रंप जीत की बात कह रहे हैं.
चीन की अर्थव्यवस्था की निर्भरता अमरीका पर कम हो रही है, लेकिन अब भी अमरीका की अर्थव्यवस्था चीन पर जितना निर्भर है उसकी तुलना में चीन अमरीका पर बहुत ज़्यादा आश्रित है. चीन की अर्थव्यवस्था अमरीका पर एक अनुमान के मुताबिक़ उसकी जीडीपी के तीन फ़ीसदी निर्भर है.
अर्थशास्त्र का यह बुनियादी नियम है कि आयात और निर्यात के बीच संतुलन राष्ट्रीय बचत और निवेश में संतुलन से अलग है. मतलब इस्पात पर अतिरिक्त शुल्क से आयात में कमी आएगी, लेकिन बचत-निवेश संतुलन को दुरुस्त नहीं किया जा सकता है. दूसरी तरह के आयात बढ़ेंगे और इससे कुल व्यापार संतुलन में कोई बदलाव नहीं होगा.
अमरीका पर निर्भर चीनी अर्थव्यवस्था
शंघाई में स्टैंडर्ड चार्टर्ड के अर्थशास्त्री वेई ली ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा है कि इस ट्रेड वॉर में चीन की जीडीपी का 1.3 फ़ीसदी से 3.2 फ़ीसदी हिस्सा दांव पर लगा है.
बाद में उन्होंने कहा कि यह उस स्थिति में संभव है जब अमरीका चीनी आयात को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर देगा. वहीं उन्होंने इस जंग में अमरीकी नुक़सान का अनुमान उसकी जीडीपी का 0.2 फ़ीसदी से 0.9 फ़ीसदी का लगाया है.
मसला केवल अनुमानों का नहीं है. अब तो चीन अमरीकी से ट्रेड वॉर के दर्द को भी महसूस करने लगा है. कई विश्लेषकों का कहना है इस जंग का असर चीन के घरेलू मार्केट में भी दिख रहा है. घरेलू बाज़ार में मांगों में कमी आई है और इसका सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
हालांकि चीन का निर्यात इस साल मई तक 13 फ़ीसदी बढ़ा है, क्योंकि पिछले साल यह आठ फ़ीसदी ही था. 13 फ़ीसदी की दर कब तक बनी रहेगी यह कहना मुश्किल है.
चीनी मुद्रा चारों खाने चित
चीनी मुद्रा रेनमिनबी अमरीकी मुद्रा डॉलर की तुलना में पिछले छह महीने में सबसे नीचले स्तर पर आ गई है. दूसरी तरफ़ केवल जून महीने में चीनी शेयर बाज़ार शंघाई कम्पोजिट में 10 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है और इसी दौरान चीनी मुद्रा रेनमिनबी में 3.3 फ़ीसदी की गिरावट आई.
अमरीका ने 34 अरब डॉलर का शुल्क चीनी उत्पादों पर 6 जुलाई को लगाने की घोषणा की है. अमरीका के इस आयात शुल्क का असर वहां बनने वाले टेलिकॉम उपकरणों पर ज़बर्दस्त पड़ने वाला है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक़ अमरीकी वाणिज्य मंत्रालय के नए नियमों के कारण चीनी टेलिकॉम मेकर ज़ेडटीई का कारोबार लगभग थम सा गया है. अमरीका का कहना है कि चीन उनकी तकनीक चुराता है और अब वो ऐसा नहीं होने देगा.
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार सोमवार को जारी डेटा में चीन से अमरीका निर्यात होने वाली वस्तुओं में 5.4 फ़ीसदी की गिरावट आई है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि पिछले साल दोनों देशों के व्यापार में चीन को 375 अरब डॉलर का फ़ायदा हुआ था.
चीन की अर्थव्यवस्था में आने वाले समय में और गिरावट दर्ज की जा सकती है.
पूरी दुनिया चपेट में
मसला केवल चीन और अमरीका का नहीं है बल्कि ट्रंप का रुख़ यूरोप के देशों के साथ भी वैसा ही है. ट्रंप ने यूरोप की ऑटो इंडस्ट्री पर 20 फ़ीसदी टैक्स लगाने की चेतावनी दी है और इसके जवाब में यूरोप ने कई अमरीकी सामानों पर आयात शुल्क बढ़ाने की घोषणा कर दी.
निक्केई एशियन रिव्यू का कहना है कि इस ट्रेड वॉर में क्रिया और प्रतिक्रिया का सिलसिला अभी नहीं थमेगा. दुनिया भर की कंपनिया अनिश्चित व्यापार नीति से जूझ रही हैं. शुक्रवार को सिंगापुर की कई कंपनियों के शेयर भी औंधे मुंह गिरे.
फिलीपींस के शेयर बाज़ार पीएसईआई में फ़रवरी की तुलना में 18 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. ट्रंप ने चीन से न केवल स्टील और एल्यूमीनियम के आयात पर भारी शुल्क लगाया है बल्कि चीन से वॉशिंग मशीन और सोलर पैनल के आयत भी लगभग बंद हो गए हैं.
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