इटली में नए पीएम और बग़दाद में विस्फोट, पढ़िए सुबह की पांच बड़ी ख़बरें

बगदाद बम ब्लास्ट में 4 की मौत, 15 घायल

इराक की राजधानी बगदाद में एक आत्मघाती हमले में चार लोगों की मौत और 15 घायल हुए हैं. सेना के प्रवक्ता ने रॉयटर्स से इस बात की पुष्टि की है.

इस हमले को उत्तर पश्चिम बग़दाद के शुला ज़िले में गुरुवार को अंजाम दिया गया. इस जिले में ज़्यादातर आबादी शियाओं की है.

किसी भी समूह ने अभी तक हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, हालांकि इसके पीछे इस्लामिक स्टेट का हाथ बताया जा रहा है.

यूक्रेन से बातचीत कराने के लिए ट्रंप के वकील ने लिए पैसे?

बीबीसी को पता चला है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के निजी वकील माइकल कोहेन को पिछले साल जून में यूक्रेन के नेता पेट्रो पोरोशेंको के साथ बैठक तय कराने के लिए गुप्त रूप से चार लाख अमरीकी डॉलर दिए गए थे.

यह बैठक व्हाइट हाउस में हुई थी. हालांकि कोहेन ने ऐसी किसी रक़म को स्वीकार करन से इनकार किया है.

इस बारे में भी अभी साफ़ नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप को इस कथित भुगतान के बारे में कुछ पता था या नहीं.

राष्ट्रपति पोरेशंको के कार्यालय ने इस दावों को झूठ और दोनों देशों के बीच रिश्ते को बदनाम करने का अभियान बताया है.

नाइजीरिया के कैंप में महिलाओं के साथ बलात्कार के आरोप

बोको हराम की वजह से विस्थापित हुए लोगों के लिए बनाए गए कैंप में एमनेस्टी इंटरनेशल ने बलात्कार की बात कही है.

मानवाधिकार संगठन ने ये आरोप नाइजीरियाई सेना पर लगाए हैं. एक नई रिपोर्ट नौ महिलाओं के साथ बलात्कार का ब्योरा है.

हालांकि सेना के प्रवक्ता ने रिपोर्ट की आलोचना की है और कहा है कि बलात्कार के आरोप निराधार थे.

तेल के दाम करने के लिए सरकार ओएनजीसी पर निर्भर

वित्तीय घाटे के लक्ष्यों को खिसकता देख वित्त मंत्रालय पेट्रोल और डीजल से एक्साइज ड्यूटी कम करने से हिचकिचा रहा है, लेकिन तेल के दाम कम करने के लिए सियासी दवाब बना हुआ है.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक सरकार दाम कम करने का एक तरीका ओएनजीसी को बोझ साझा करने को बोल सकता है. ओएनजीसी भारत में कच्चे तेल का आयात करता है और भारतीय रिफायनरी को बेचता है. सरकार ओएनजीसी से कच्चे तेल की क़ीमत कर करने को कह सकती है.

इटली में लॉ प्रोफेसर बनेंगे प्रधानमंत्री

देश में हुए चुनावों के तीन महीने बाद इटली में सरकार बनने जा रही है.

सरकार बनाने के लिए सत्ता के खिलाफ आंदोलन और घोर दक्षिणपंथी संगठन के बीच गठबंधन हुआ है. इस गठबंधन ने यूरोप के देशों में घबराहट पैदा कर दी है.

प्रधानमंत्री पद के लिए दोनों दलों के किसी नेता का चुनाव नहीं किया गया है. दोनों दलों ने बेहद कम लोकप्रिय लॉ प्रोफ़ेसर ग्यूसेप कॉन्टे को चुना है.