92 साल के महातिर मोहम्मद बने मलेशिया के प्रधानमंत्री

महातिर मोहम्मद मलेशिया के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं. उन्होंने देश में हुए आम चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल कर 15 सालों बाद सत्ता में वापसी की है.

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कुआलालम्पुर में इस्ताना नेगारा महल के बाहर समर्थकों ने झंडा लहरा कर जश्न मनाया.

दो दशकों से अधिक राज करने वाले महातिर 92 साल के हैं और शपथ ग्रहण करने के साथ ही वो दुनिया के सबसे बुजुर्ग निर्वाचित नेता बन गए हैं.

महातिर के विपक्षी गठबंधन ने चुनाव में 115 सीटों पर जीत हासिल करते हुए सरकार बनाने के लिए आवश्यक 112 सीटों की बहुमत जुटा लिया.

92 साल के महातिर ने बारिसन नेशनल (बीएन) गठबंधन को चुनावों में करारी शिकस्त दी. पार्टी पिछले 60 सालों से सत्ता में बनी हुई थी.

जीत के बाद पत्रकारों से मुख़ातिब महातिर ने कहा कि "हमें किसी तरह का बदला नहीं चाहिए, हम तो क़ानून का शासन लाना चाहते हैं.''

उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि शपथ ग्रहण समारोह आने वाले गुरुवार को आयोजित किया जाए.

शपथ ग्रहण समारोह के चलते गुरुवार और शुक्रवार को देश में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई.

जीत का जश्न

इससे पहले परिणामों की घोषणा होने के साथ ही पार्टी के समर्थक सड़कों पर उतर आए और जश्न मनाने लगे. बीएन और इसकी प्रमुख पार्टी, संयुक्त मलेशिया राष्ट्रीय संगठन (यूएमएनओ) 1957 में ब्रिटेन से आज़ादी मिलने के बाद से ही सत्ता पर काबिज़ थी. लेकिन बीते कुछ सालों में उसकी लोकप्रियता में भारी कमी देखने को मिली और संभवत: उसी का परिणाम है कि इस बार आम चुनावों में पार्टी को महज़ 79 सीटें ही मिलीं.

2013 में हुए चुनावों में भी विपक्ष ने लोकप्रियता बटोरते हुए काफ़ी वोट जोड़े थे, लेकिन ये सरकार बनाने के लिए पर्याप्त नहीं थे.

इस बार महातिर ने मौजूदा प्रधानमंत्री नजीब रज़ाक के ख़िलाफ़ जमकर अभियान चलाया था और उसी का नतीजा है कि पार्टी को इतनी बड़ी जीत हासिल हुई है.

महातिर खुद भी एक समय में बीएन का अहम हिस्सा रह चुके हैं और नजीब के राजनीतिक गुरु भी रहे.

लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी से ख़ुद को ये कहते हुए अलग कर लिया था कि 'जो पार्टी भ्रष्टाचार को समर्थन दे उसके साथ रहना अपमानजनक है.'

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