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ट्रंप और मैक्रों ने नए ईरान परमाणु समझौते के दिए संकेत
अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने अपने परमाणु कार्यक्रमों को फिर से शुरू किया तो उसे भारी दिक़्क़तों का सामना करना होगा.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुअल मैक्रों के साथ व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने ईरान समझौते को 'पागलपन' बताया.
अमरीका और फ्रांस के राष्ट्रपतियों ने संकेत दिए हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नया समझौता हो सकता है.
ट्रंप ने पहले भी इस परमाणु समझौते को सबसे ख़राब समझौतों में से एक बताया था. ओबामा कार्यकाल में हुए इस क़रार को ख़त्म करने के लिए ट्रंप ने 12 मई का दिन भी निर्धारित कर लिया है.
जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल भी शुक्रवार को अमरीका जाएंगी ताकि ट्रंप को ईरान समझौता तोड़ने से रोकने की कोशिश कर सकें.
ईरान को चुकानी पड़ेगी कीमत
एक रिपोर्टर के पूछने पर कि समझौता तोड़ने के बाद क्या ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू कर सकता है, इस पर ट्रंप ने जवाब दिया कि उनके लिए फिर से शुरू करना आसान नहीं होगा.
ट्रंप ने कहा, "वो दोबारा कुछ शुरू नहीं करेंगे. अगर ईरान करता है तो उसे बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, ऐसी मुश्किलें जो उन्होंने पहले कभी देखी नहीं होंगी."
ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने न्यूज़ एजेंसी एसोसिएटिड प्रेस से कहा कि अगर अमरीका क़दम पीछे हटाता है तो ईरान भी अपनी परमाणु करार तोड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि अमरीका उत्तर कोरिया के साथ होने वाली बातचीत को भी नुकसान पहुंचाएगा क्योंकि इससे साबित होगा कि वह अपने वादों पर टिकता नहीं.
दूसरी तरफ़, सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि अमरीका को परमाणु समझौते से हटने के बदले गंभीर परिणाम झेलने होंगे.
वहीं, ट्रंप ने मंगलवार को कहा, "अगर ईरान हमें धमकी देगा तो उसे भी वही कीमत चुकानी होगी जो दूसरे कुछ देशों को चुकानी पड़ी है"
फ्रांस की बीच-बचाव के लिए कोशिश
मैक्रों तीन दिवसीय दौरे पर अमरीका आए हैं. मंगलवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मैक्रों ने कहा कि उनकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ खुलकर बातचीत हुई है.
फ्रांस के राष्ट्रपति ने पत्रकारों से कहा कि उनका मानना है कि ईरान को लेकर चिंताओं को दूर करने के लिए एक नया समझौता बनाना संभव है.
उन्होंने कहा, "हम टिकाऊ स्थिरता चाहते हैं और हमें विश्वास है कि बातचीत से नए समझौते के लिए रास्ते खुलेंगे."
पहले हुए समझौते के तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को स्थगित करने पर राज़ी हुआ था. ये क़रार शांति के उद्देश्य से किया गया था जिसके बदले में ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी गई थी.
इस समझौते को ईरान, अमरीका के साथ-साथ यूरोप, रूस, चीन और जर्मनी ने साइन किया था. ट्रंप की इसको लेकर शिकायतें रही हैं. उनका कहना है कि यह समझौता ईरान को हिज़बुल्लाह जैसे चरमपंथी समूहों का समर्थन रोकने के लिए बाध्य नहीं करता है.
इस पर हस्ताक्षर करने वाले हर देश से अमरीकी राष्ट्रपति ने मांग की है कि वह ईरान के यूरेनियम संवर्धन पर स्थाई प्रतिबंध के समझौते पर भी सहमत हों. हालिया समझौते के अनुसार, यह प्रतिबंध केवल 2025 तक है.
ओवल कार्यालय में फ़ोटो लेने के दौरान ट्रंप मैक्रों के कंधे से 'डेंड्रफ़' हटाते भी दिखे. उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हमारे रिश्ते बेहद ख़ास हैं और मैं इस डेंड्रफ़ के छोटे टुकड़े को भी हटा दूंगा."
दोनों राजनेताओं के बीच ईरान समझौता ही केवल विवाद का विषय नहीं है बल्कि पेरिस जलवायु समझौता भी एक अहम मुद्दा है. इसके अलावा येरुशलम को इसराइल की राजधानी की मान्यता देना, स्टील और एल्यूमीनियम पर अमरीकी टैरिफ़ की योजना जैसे विषय भी हैं.
इससे पहले मंगलवार को दिन में मैक्रों और उनकी पत्नी का व्हाइट हाउस में सैन्य समारोह में स्वागत किया गया था.
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