बोको हराम की क़ैद से लौट आई स्कूली लड़कियां

नाइजीरिया की सरकार ने बताया है कि दापची कस्बे से किडनैप की गई ज़्यादातर लड़कियां घर वापस लौट आई हैं.

नाइजीरिया के सूचना मंत्रालय का कहना है कि बुधवार सुबह अगवा की गई 110 लड़कियों में से 76 सरकारी कोशिशों के बाद लौट आई हैं.

सरकार ने कहा है कि उस इलाके में सैनिक कार्रवाई रोक दी गई है ताकि जानोमाल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

हालांकि सरकारी बयान में ये नहीं बताया गया है कि कितनी लड़कियों की मौत हो चुकी है.

सूचना मंत्री अल्हाजी लाई मोहम्मद ने अपने बयान में कहा कि लड़कियों को 'सरकार के कुछ दोस्तों की मदद से बिना शर्त' छुड़वाया गया है.

उन्होंने कहा, "सरकार समझती है कि हिंसा से कुछ हल नहीं होगा क्योंकि इससे लड़कियों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी, इसलिए हिंसा से अलग विकल्पों को हमने सहारा लिया."

उन्होंने कहा कि वापस लौटी लड़कियों की संख्या ज़्यादा भी हो सकती है.

बोको हराम ने वापस छोड़ा

एक महीना पहले ही स्कूल से उनका अपहरण किया गया था.

एक लड़की के अभिभावक कुंदिली बुकर ने बीबीसी को बताया कि चरमपंथी सुबह ही एक वाहन में सभी लड़कियों के लेकर आए और उन्हें छोड़ कर चले गए.

ऐसा कहा जा रहा है कि ये चरमपंथी बोको हराम संगठन के हैं.

उन्होंने बताया कि इसके बाद चरमपंथी वहां से तुरंत चले गए. लड़कियां बहुत थकी हुई लग रही थीं. लेकिन फिर भी उनमें से कुछ दौड़ कर अपने घर वालों के पास चली गईं.

एक और अभिभावक मनुगा लवल ने कहा कि एक बार किसी तरह वे फ़ोन पर अपनी बेटी से बात कर पाए थे जब वह चरमपंथियों के कब्ज़े में थीं.

इन लड़कियों को दापची कस्बे पर हमले के दौरान 19 फ़रवरी को स्कूल से किडनैप कर लिया गया था.

अपहरण की घटना

शुरुआत में ये दावा किया गया कि सभी लड़कियां भागने में कामयाब हो गई थीं और किसी का अपहरण नहीं किया गया.

लेकिन एक हफ़्ते बाद अधिकारियों ने माना कि उन्हें चरमपंथी उठा ले गए हैं.

नाइजीरिया के राष्ट्रपति मुहम्मद बुहारी ने इस अपहरण की घटना को राष्ट्रीय शर्मिंदगी कहा और लड़कियों के परिवार वालों से माफ़ी भी मांगी.

12 मार्च को उन्होंने इस बात के संकेत दिए थे कि सरकार लड़कियों की रिहाई के लिए सैन्य मदद की बजाय चरमपंथियों से बातचीत कर रही है.

इस घटना को अप्रैल 2014 को नज़दीकी चिबोक कस्बे की लड़कियों के अपहरण से भी जोड़ कर देखा गया जिन्हें स्कूल से ही उठा लिया गया था.

उनमें से कुछ लड़कियां चरमपंथियों के कब्ज़े में ही रहीं.

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