यूक्रेन संकट: क़ैदियों की अदला-बदली हुई

यूक्रेन और देश के पूर्व में मौजूद अलगाववादी विद्रोहियों ने सैकड़ों कैदियों का आदान-प्रदान किया है. साल 2014 में संघर्ष शुरू होने के बाद से इस तरह की सबसे बड़ी घटना है.

विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाके में करीब 230 लोगों को भेजा गया. इसके बदले दोनियेत्स्क और लुहांस्क इलाकों में रूस समर्थक विद्रोहियों के कब्ज़े से 74 कैदियों को छोड़ा गया है.

बीते 15 महीनों में होने वाली ये इस तरह की पहली अदला-बदली थी.

साल 2015 में मिंस्क शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे जिसमें कैदियों की रिहाई और आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मुद्दा था.

लेकिन इस मामले पर बात कुछ आगे नहीं बढ़ी और जानकारों का था कि क़ैदियों का आदान-प्रदान व्यापक प्रगति का इशारा नहीं है. इसके बाद दोनों पक्षों ने क़ैदियों को अपने पास रखा था.

क़ैदियों की संख्या शुरुआती घोषणा के मुकाबले कम थी, विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाकों से कई क़ैदियों ने दूसरी तरफ लौटने से इनकार कर दिया.

यूक्रेन में रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति के प्रवक्तामिलादिन बोगेटिक ने कहा, "कुछ लोगों को पहले ही छोड़ दिया गया है और यूक्रेन के अधिकरियों ने उन पर लगाए आरोप भी वापस ले लिए हैं. ये लोग सरकार के नियंत्रण वाले इलाके में रहना पसंद करते हैं."

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार यूक्रेन के दो नागरिकों ने (एक महिला और एक पुरुष) विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाके में रहना चुना.

क़ैदियों की अदला-बदली के लिए बीते कई महीनों से बातचीत चल रही थी. इस बातचीत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेन्को के साथ रूसी रूढ़िवादी चर्च के प्रमुख ने भी हिस्सा लिया.

क़ैदियों के आने जाने के लिए दोनियेत्स्क होर्लीवका शहर के निकट मेयोरस्क नाके पर कैदियों को ले जाने वाली बसें और अन्य वाहन एकत्र हुए थे.

63 साल के इतिहासकार इगोर कोज़्लोवस्की को दोनियेत्स्क में विद्रोहियों ने हथियार रखने के आरोप में पकड़ा था.

इगोर ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "मैं दो साल के लिए कैद में था ... अभी भी दोनियेत्स्क में बहुत से कैदी हैं."

ब्रिटेन सरकार ने कैदियों के आदान-प्रदान को "स्वागत योग्य कदम" बताया है और कहा है कि "दोनों पक्षों ने प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए कदम उठाए हैं."

पूर्वी यूक्रेन में संघर्ष 2014 की अप्रैल में शुरू हुआ था जब रूस ने यूक्रेन के क्रीमिया प्रायद्वीप पर कब्ज़ा कर लिया था.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस संघर्ष के कारण दोनियेत्स्क और लुहानस्क इलाके में दस हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं.

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