उत्तर कोरिया अमरीका से जंग करने को तैयार?

उत्तर कोरिया ने अमरीकी रक्षा विभाग के उस रिपोर्ट को क्रिमिनल क़रार दिया है, जिसमें उत्तर कोरिया पर ज़्यादा बल प्रदर्शन की बात कही जा रही है.

उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने अमरीकी राष्ट्रपति की सामरिक नीति की आलोचना की है.

डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि वाशिंगटन उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने को तैयार है.

वैसे आपको भरोसा हो ना हो, लेकिन ये हक़ीक़त है कि साल 2017 उत्तर कोरिया के लिए कामयाबी से भरा साल साबित हुआ है.

कई विश्लेषकों का दावा है कि उत्तर कोरिया ने परमाणु बम विकसित कर लिया है, ये दावा सही ना हो तो भी उत्तर कोरिया पर जिस तरह की अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां लगी हुई हैं, उसके बावजूद इस देश ने जिस रफ़्तार से अत्याधुनिक हथियारों को विकसित किया है, वो चौंकाने वाला है.

यह भी दिलचस्प है कि उत्तर कोरिया केवल एक उद्देश्य के लिए हथियारों का जख़ीरा एकत्रित कर रहा है- उत्तर कोरिया की मौजूदा शासक को उखाड़ फेंकने के लिए संभावित अमरीकी दख़ल.

2017 में उत्तर कोरिया ने सामरिक लिहाज से चार अहम पड़ावों को हासिल किया है. क्या है ये चार अहम पड़ाव.

1. हमले के लिए तैयार मिसाइल

उत्तर कोरिया ने अपने जवाबी हमले की क्षमता को बेहतर किया है. ऐसा हो पाया है कि सॉलिड फ्यूल मिसाइल के ज़रिए. इस साल उत्तर कोरिया ने ऐसी तकनीक वाले कई परीक्षण किए हैं. कई विश्लेषकों की नज़र में ये शानदार कामयाबी है.

यूएस सेंटर फ़ॉर नॉनप्रोलिफ़िरेशन जेम्स मार्टिन की वरिष्ठ रिसर्चर मेलिस्सा हेनहेम ने बीबीसी न्यूज़ को बताया, "सॉलिड फ़्यूल से सीधा मतलब है कि उत्तर कोरिया अब ज़्यादा तेज़ी से मिसाइलें दाग़ सकता है."

दरअसल सॉलिड फ़्यूल मिसाइल की ख़ासियत ये होती है कि इसे लिक्विड फ़्यूल की तरह लोड नहीं करना पड़ता है, यानी हर वक्त हमले करने के लिए तैयार होता है और दुश्मन को इसकी पहचान करने का वक्त भी नहीं मिलता.

उत्तर कोरिया ने ये टेस्ट 2016 में भी किया था. लेकिन फरवरी और मई, 2017 में इसका परीक्षण बेहतर तरीके से किया गया और उसमें नए रॉकेट जोड़े गए.

उत्तर कोरिया ने इसके बाद बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण करने का दावा किया. इन परीक्षणों के बाद किम जोंग उन ने भरोसा जताया कि ये मिसाइल युद्ध के लिए तैयार हैं. समाचार एजेंसी द डिप्लोमेट के मुताबिक उत्तर कोरियाई नेता ने बड़ी संख्या में इन मिसाइलों को तैयार करने का आदेश दिया है.

2. परमाणु ताक़त बनने की ओर

उत्तर कोरिया ने पूरी दुनिया को परमाणु बम के ख़तरे से डरा दिया है. तीन सितंबर, 2017 को उत्तर कोरिया ने अपना छठा आण्विक परीक्षण किया और दावा किया है कि ये हाइड्रोजन बम है.

उत्तर कोरियाई विदेश मंत्री राय योंग हो ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में बताया, "उत्तर कोरिया परमाणु संपन्न होने की दिशा के अंतिम चरण में पहुंच चुका है."

हालांकि उत्तर कोरिया ने ऐसे परीक्षण का दावा 2016 में भी किया था, हालांकि तब विशेषज्ञों ने इसके हाइड्रोजन बम होने से नकार किया था.

लेकिन इस मौके पर विशेषज्ञों का मानना है कि ये हाइड्रोजन बम का परीक्षण, 2006 से चल रहे आण्विक परीक्षण में ये सबसे शक्तिशाली परीक्षण था.

ये दावा किया जा रहा है कि उत्तर कोरिया ने जिस बम का परीक्षण किया है वो 1945 में हिरोशिमा को तबाह करने वाले परमाणु बम की तुलना में 16 गुना ज़्यादा शक्तिशाली है.

3. इंटरकांटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल

2017 में उत्तर कोरिया ने इंटरकांटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल भी लांच किया. इस मिसाइल के इस्तेमाल से उत्तर कोरिया ने अपनी रेंज़ काफ़ी बढ़ा ली है.

उत्तर कोरिया ने इंटरकांटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल के तीन परीक्षण इस साल किए हैं और 28 नवंबर को अंतिम परीक्षण करने के बाद उत्तर कोरिया ने साफ़ तौर पर कहा कि लक्ष्य उनकी सीमा में आ गए हैं.

उत्तर कोरिया की सरकारी टेलीविजन की प्रजेंटर राइ चुंग ही ने कहा था, "इंटरकांटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल की जद में अमरीका के पूरे द्वीप आ गए हैं."

उत्तर कोरिया के दावों को भले ही शक की नज़र से देखा जाता रहा हो लेकिन पेंटागन स्थित उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम के विशेषज्ञ माइकल इलिमैन को पूरा विश्वास है कि उत्तर कोरिया पूरे अमरीका पर निशाना साध सकता है.

4. मिसाइल में नया इंजन

इंटरकांटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) मिसाइल के परीक्षण के साथ साथ इसमें इस्तेमाल होने वाले इंजनों को भी बेहतर किया गया है.

इलिमैन इन दिनों इंटरनेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ़ स्ट्रेटज़िक स्टडीज़ (आईआईएसएस) में रिसर्चर हैं और अपने विस्तृत विश्लेषण में उन्होंने दावा किया है कि उत्तर कोरिया की मिसाइल की क्षमता बेहतर होने की वजह विदेशी तकनीक है, ये तकनीक सोवियत डिज़ाइन वाली है और यूक्रेन और रूस के रास्ते से इसके उत्तर कोरिया पहुंचने का दावा किया जा रहा है.

इलिमैन ने बीबीसी मुंडो से बताया, "ये ऐसी तकनीक है, जिसके लिए कम से सैकड़ों टेस्ट होने ज़रूरी है. और अब तक उत्तर कोरिया में ऐसे टेस्ट होने के सबूत तो नहीं मिले हैं."

इलिमैन को विश्वास है कि उत्तर कोरिया की ये तकनीक 1990 के दशक की है, लेकिन ये तकनीक रूस और यूक्रेन के अधिकारियों की मदद के बिना हासिल की गई होगी.

सबसे बड़ा सवाल

इन क्षमताओं को हासिल करने के बाद क्या उत्तर कोरिया अमरीका पर परमाणु हमला कर सकता है? सबसे बड़ा सवाल यही है.

विशेषज्ञ इसको लेकर एकमत नहीं हैं, कुछ को अंदेशा है कि उत्तर कोरिया के पास अमरीकी सीमा तक पहुंचने वाली मिसाइल नहीं है, लेकिन कुछ को लगता है कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी मिसाइलें हैं.

उत्तर कोरिया की मिसाइल कार्यक्रम के एक्सपर्ट माइकल इलिमैन कहते हैं, "मेरा अनुमान है कि वे मीडियम रेंज से ऐसा कर सकता है. हमले के कामयाब होने की आशंका ज़्यादा है. हालांकि इसके बाद भी वे अमरीका पर हमला करेंगे, इस पर संदेह है."

अगर अमरीका के साथ उत्तर कोरिया युद्ध नहीं करेगा तो फिर वह अपने आण्विक कार्यक्रमों पर इतना ख़र्च क्यों कर रहा है?

मेलिस्सा हेनमैन इस बारे में कहती हैं, "उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था कोई बेहतर तो है नहीं, इसके बाद भी वे अपने संसाधन का अच्छा खासा हिस्सा सैन्य कार्यक्रमों पर खर्च करते हैं. वो जो खर्च करते हैं उसे साबित करने के लिए उनके पास परमाणु परीक्षण करने के सिवा दूसरा रास्ता नहीं है."

पिछले कुछ महीनों में, उत्तर कोरिया ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वह पैसेफ़िक महासागर में पहली गैर-अंडरग्राउंड आण्विक परीक्षण कर सकता है. ऐसा हुआ तो उसके परिणाम क्या होंगे, इसको लेकर केवल कयास ही लगाए जा सकते हैं.

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